अमेरिका में गौतम अडानी के खिलाफ सारे केस खत्म होंगे? 'अजीब ऑफर' ने दिलाई राहत?
गौतम अडानी के लिए अमेरिकी से एक अच्छी खबर आई है. अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ रिश्वत और धोखाधड़ी से जुड़े मामले को खत्म करने की तैयारी कर रहा है. अगर ये मामला बंद होता है तो पिछले एक साल से अमेरिका में अडानी के खिलाफ चल रहे कानूनी विवाद का अंत हो सकता है.

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के लिए अमेरिका से राहत की खबर सामने आई है. अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) में अडानी के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी के आपराधिक मामले को खत्म करने की तैयारी चल रही है. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी मामले को वापस लेने की दिशा में काम कर रहे हैं.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट इसी हफ्ते अडानी के खिलाफ लगे आरोपों को वापस लेने की घोषणा कर सकता है. अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) भी अडानी और उनके सहयोगियों के खिलाफ नवंबर 2024 में शुरू किए गए पैरलल सिविल फ्रॉड के मामले को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. अगर ये मामला बंद होता है तो पिछले एक साल से अमेरिका में अडानी के खिलाफ चल रहे कानूनी विवाद का अंत हो सकता है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक गौतम अडानी को ये राहत दिलाने में उनकी लीगल टीम के लीडर रॉबर्ट गुफ्रा जूनियर का बड़ा हाथ है. वो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के करीबी वकीलों में गिने जाते हैं. NYT ने बताया कि रॉबर्ट की टीम ने जस्टिस डिपार्टमेंट के सामने ‘अजीब’ प्रस्ताव रखा था. इस कथित प्रस्ताव के तहत अडानी पर लगे आरोप ड्रॉप किए जाने के बदले अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ‘10 अरब डॉलर का निवेश किया जाता और 15 हजार नौकरियां पैदा की जातीं’.
अडानी ग्रुप की ओर से अब तक इस मामले में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि अडानी ग्रुप पहले दिन से इन आरोपों से इनकार करता रहा है. इन मामलों के खत्म होने से अडानी ग्रुप के लिए इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट के दरवाजे फिर से खुल जाएंगे. इससे ग्रुप को अपनी विस्तार की योजनाओं को अग्रेसिव स्ट्रैटजी के साथ आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
ब्लूमबर्ग ने मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट देश के बाहर हुई घटनाओं से जुड़े मामलों में आरोपों को हटाने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है. लेकिन SEC मामले को निपटाने के लिए कुछ आर्थिक जुर्माना भी लगा सकता है. अमेरिकी अटॉर्नी के ब्रूकलिन स्थित ऑफिस ने फिलहाल इस मामले पर कोई कॉमेंट करने से इनकार किया है. वहीं SEC ने भी अब तक इस पर कोई आधिकारिक कॉमेंट नहीं किया है.
ब्रुकलिन अटॉर्नी ऑफिस ने अडानी और उनके सहयोगियों पर भारत में सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए 250 मिलियन डॉलर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. साथ में ये भी आरोप थे कि अमेरिकी निवेशकों से पैसे जुटाते समय इस बात को छिपाया गया था. अडानी ग्रुप इन आरोपों को खारिज करता रहा है.
गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी अब तक इस मामले में अमेरिकी अदालत में पेश नहीं हुए हैं. उनके वकीलों ने अदालत में ये दलील दी थी कि अमेरिकी रेगुलेटर्स के पास इस मामले में जरूरी अधिकार क्षेत्र नहीं हैं और लगाए गए आरोप कानूनी तौर पर टिकाऊ नहीं हैं.
वीडियो: खर्चा-पानी: वेदांता ग्रुप ने अडानी को लेकर क्यों खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा?

