भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए तीन पॉइंट वाला एक पीस प्लान भेजा है. इस प्लान में एनर्जी फैसिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला रोकने, ब्लैक सी के ज़रिए अनाज सप्लाई जारी रखने और कमर्शियल शिपिंग पर स्ट्राइक ख़त्म करने की बात कही गई है. कुछ दिन पहले ही रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी के पास इस युद्ध को रोकने का आइडिया है. रूस-यूक्रेन जंग अपने पांचवे साल में है और कई देश शांति बहाल करने की कोशिश में जुटे हैं. ख़बर है कि तुर्किए, मिस्र और अमेरिका ने भी पीस प्लान भेजा है.
रूस-यूक्रेन जंग रोकने के लिए भारत ने भेजा पीस प्लान, 3 पॉइंट में दिया पूरा सॉल्यूशन
भारत ने तीन पॉइंट्स में रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर कराने के लिए प्लान भेजा है. इसमें एनर्जी फैसिलिटी पर हमलों को रोकना और ब्लैक सी के ज़रिए अनाज का सप्लाई चालू रखना शामिल है. यूक्रेन ने इस प्लान को 'सबसे विस्तृत' प्लान बताया है.

NDTV ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन तक ये प्लान पहुंचा दिया है. पिछले महीने 3 सितंबर को जयशंकर यूक्रेन दौरे पर गए थे तभी उन्होंने ये प्लान कीव को सौंपा था. अब 2 अक्टूबर को यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कन्फर्म किया है कि नई दिल्ली ने उन्हें प्रपोजल भेजा है.
क्या कहा यूक्रेन ने?रिपोर्ट के मुताबिक, एंड्री सिबिहा ने बताया कि भारत का पीस प्रपोजल अपने आप में ‘संपूर्ण’ (most comprehensive) है. यूक्रेन को और तीन देश से सीजफायर के लिए प्रपोजल आए हैं. लेकिन भारत का प्रपोजल इनसे अलग है. पहले ये जानते हैं कि भारत ने क्या भेजा है.

भारत ने तीन पॉइंट्स में रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर कराने के लिए प्लान भेजा है. पहला, रूस और यूक्रेन को एक दूसरे के एनर्जी फैसिलिटी और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को रोकना होगा. दूसरा, ब्लैक सी के बंदरगाहों से अनाज और एनर्जी सप्लाई को चालू करना होगा. तीसरा, इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमलों को खत्म करना होगा.
भारत का प्रपोजल अलग कैसे?सूत्रों का कहना है कि मिस्र और तुर्किए ने कमर्शियल शिपिंग पर हमले रोककर ब्लैक सी के ज़रिए अनाज की सप्लाई बिना किसी रुकावट के होने पर ज़ोर दिया है. अमेरिका का प्रस्ताव "एनर्जी सीज़फ़ायर" (ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम) पर केंद्रित बताया जा रहा है. ऐसे में भारत का भेजा गया प्लान एक कंप्लीट डील की तरह लग रहा है, जिसमें तीनों पॉइंट को शामिल किया गया है.
यूक्रेनी विदेश मंत्री का भी कहना है कि कीव सीजफायर के लिए अलग-अलग तरीकों पर विचार करने को तैयार है. लेकिन किसी भी समझौते में न सिर्फ़ लड़ाई, बल्कि एनर्जी और पोर्ट के बुनियादी ढांचे पर हमले और ब्लैक सी की स्थिति को भी शामिल किया जाना चाहिए.
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रूस ने क्या कहा था?यूक्रेनी विदेश मंत्री का बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बाद आया है. पुतिन ने मॉस्को में कहा था कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए बढ़िया आइडिया है.’ उन्होंने पीएम मोदी के न्यूट्रल रहकर जंग रुकवाने के फैसले की भी तारीफ की. तब ‘आईडिया’ क्या है इसका कोई आईडिया नहीं था. लेकिन अब पीस प्लान का पता चला है. SCO समिट में पीएम मोदी ने पुतिन से कहा था कि ‘कभी न रुकने वाली इस जंग को हमेशा के लिए रोक दिया जाए.’
लेकिन, भारत को सीजफायर की क्यों पड़ी है? इसे समझिए. रूसी एनर्जी का तकरीबन 30 फीसदी हिस्सा ब्लैक सी के रास्ते भारत आता है. जंग के बाद से रूसी कच्चे तेल के एक्सपोर्ट के लिए सप्लाई में कमी आई है. ढुलाई की लागत भी बढ़ी है. इसके अलावा अमेरिका ने भी एक एक्ट (SRIA) पास कर दिया है. इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा.
एक और कारण है. हाल के हफ़्तों में रूस और यूक्रेन के हमलों की वजह से कमर्शियल जहाज़ों पर सवार पांच भारतीय नाविक की मौत. इस हमले के बाद भारत ने बार-बार कमर्शियल शिपिंग पर हमले रोकने की मांग की है. एस. जयशंकर का कहना है कि भारत पिछले कुछ महीनों से रूस और यूक्रेन दोनों से युद्ध रोकने को लेकर बातचीत कर रहा है.
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