नरेंद्र मोदी सरकार ने 4 जुलाई को 23 लोगों को ‘टेररिस्ट’ यानी ‘आतंकियों की सूची’ में शामिल कर दिया है. ये 23 लोग आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’ (JeM) और ‘लश्कर-ए-तैयबा’ (LeT) से जुड़े हैं. ये लोग आतंकियों की भर्ती, घुसपैठ में मदद, हथियारों की सप्लाई और जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों की प्लानिंग में शामिल रहे हैं. इन 23 लोगों में से तीन, LeT के फाउंडर हाफिज मुहम्मद सईद के करीबी सहयोगी बताए जा रहे हैं. तीन लोग कथित तौर पर नगरोटा में सेना के कैंप पर 2016 में हुए आतंकी हमले में शामिल थे और दो लोग कथित तौर पर सुंजवान मिलिट्री स्टेशन पर 2018 में हुए आतंकी हमले में शामिल थे.
राम मंदिर की रेकी करने वाला आतंकी घोषित, 22 और लोगों के नाम लिस्ट में
ये 23 लोग आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े हैं. ये लोग आतंकियों की भर्ती, घुसपैठ में मदद, हथियारों की सप्लाई और जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों की प्लानिंग में शामिल रहे हैं.


भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर इस बारे में जानकारी दी है. इसमें अब्दुल रऊफ, हाफिज खालिद वलीद और राणा इफ्तिखार की पहचान हाफिज सईद के करीबी साथियों के तौर पर की गई है. नोटिफिकेशन में कहा गया है,
54 साल का राणा इफ्तिखार जिहाद, विरोधी संगठनों के बीच तालमेल बिठाता है. वो युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उकसाता है. साथ ही वो हाफिज सईद का करीबी है. 52 साल का अब्दुल रऊफ LeT और जमात-उद-दावा से जुड़ा है. वो आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने और उनमें तालमेल बिठाने, फंड इकट्ठा करने में शामिल हैं और हाफिज मुहम्मद सईद की सीधी कमान में LeT के मुख्य आतंकवादियों में से एक है.
नोटिफिकेशन में आगे कहा गया,
भर्ती करने वालों से लेकर हमलावर तक51 साल के हाफिज खालिद वलीद, हाफिज सईद की सुरक्षा में रहकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से काम करता है और कई आतंकवादी घटनाओं का मास्टरमाइंड है.
सरकार की ओर से जारी की गई लिस्ट में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें एक नाम मसूद इलियास कश्मीरी का भी है. उसे मुफ्ती मसूद इलियास के नाम से भी जाना जाता है. नोटिफिकेशन में बताया गया है कि वो अभी पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के रावलकोट में रह रहा है. वह JeM का एक सीनियर मेंबर है जो युवाओं की भर्ती, उन्हें ट्रेनिंग देने और भारत में घुसपैठ कराने में शामिल रहा है. केंद्र सरकार के मुताबिक, वो जम्मू के सुंजवान में सुरक्षाबलों पर 22 अप्रैल, 2022 को हुए हमले से भी कनेक्टेड है.
नोटिफिकेशन में कहा गया,
पाकिस्तान के नारोवाल जिले के शाकरगढ़ का रहने वाला 38 साल का मोहम्मद मुसादिक, जिसे डॉक्टर या हमजा के नाम से भी जाना जाता है, उसे भी लिस्ट में रखा गया है. वह J&K में पाकिस्तानी JeM आतंकवादियों की घुसपैठ के मुख्य हैंडलर्स में से एक है. साथ ही वो सुंजवान हमले में शामिल था. उसने सीमा पार से ड्रोन के जरिए एलओसी पार कर हथियार और गोला-बारूद पहुंचाया है. वह JeM के साइबर ऑपरेटर्स की एक टीम को संभालने में भी शामिल है, जो संगठन के लिए युवाओं की भर्ती करने के लिए अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते हैं.
आतंकियों की लिस्ट में एक नाम मोहम्मद मुसद्दिक उर्फ डॉक्टर का भी है इसे अब्दुल मन्नान के नाम से भी जाना जाता है. मुसद्दिक JeM का एक ऑपरेटिव है. उसने अयोध्या में राम जन्मभूमि, नागपुर में RSS मुख्यालय और पानीपत में इंडियन ऑयल रिफाइनरी की रेकी करने में अहम भूमिका निभाई थी. वह लसियाकोट सेक्टर के लिए लॉन्चिंग कमांडर के तौर पर भी काम कर रहा है. यानी वो आतंकियों को ट्रेनिंग के बाद घुसपैठ करवाता है. वो सुरंगों के ज़रिए घुसपैठ में मदद करने के साथ-साथ ड्रोन का इस्तेमाल करके भारत में हथियार और गोला-बारूद भी भेजता है.
इसके अलावा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के अब्बासपुर का रहने वाला 52 साल का मुफ्ती मुहम्मद असगर खान, जिसे अबू साद के नाम से भी जाना जाता है, उसे भी आतंकी घोषित किया गया है. वह जम्मू-कश्मीर में JeM आतंकवादियों का लॉन्चिंग कमांडर है और जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर 29 नवंबर, 2016 को हुए हमले के मास्टरमाइंड्स में से एक है.
केंद्र सरकार ने 56 साल के हाफिज अब्दुल शकूर को भी आतंकवादी घोषित किया है. वह J&K में JeM के लिए 'लॉन्चिंग कमांडर' के तौर पर काम करता है और 2016 के नगरोटा हमले में शामिल था. इसके साथ ही 47 साल के अब्दुल्ला जिहादी को भी आतंकवादी घोषित किया गया है. वो नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले में शामिल था.
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ड्रोन्स के जरिए हथियार भेजने वाले भी लिस्ट मेंआतंकियों की लिस्ट में ऐसे लोग शामिल हैं, जिन पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ड्रोन, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भर्ती चैनलों का इस्तेमाल करने का आरोप है. लिस्ट में 33 साल के फिरदौस अहमद भट का नाम शामिल है. फिरदौस पर विदेशी आतंकवादियों को सीमा पार से भारत में सुरक्षित रूप से लाने-ले जाने में घुसपैठ कराने का आरोप है.
साथ ही 42 साल के गुलाम फरीद का नाम भी इस लिस्ट में है. फरीद पर देश में गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकवादियों को हथियार और गोला-बारूद सप्लाई कराने का आरोप है. लिस्ट में 36 साल का हारून रशीद गनई भी है जिस पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से युवाओं को आतंकी गुटों में भर्ती करने में शामिल होने का आरोप है.
इसके अलावा नोटिफिकेशन में कहा गया है कि 40 साल के मोहम्मद शहीद फैसल का संबंध LeT, अल-कायदा और ISIS मॉड्यूल से है. वह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भर्ती करता है, पाकिस्तान में हथियारों की ट्रेनिंग का इंतजाम करता है और आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाता है. वह एजेंसियों से बचने के लिए डेटा एन्क्रिप्शन और नकली पहचान का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग देने में भी शामिल रहा है. एक और नामित आतंकवादी, 27 साल का बिलाल अहमद मीर है जो LeT और 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) से जुड़ा है.
सपोर्ट देने और फंडिंग करने वाले भी शामिलआतंकवादी घोषित किए गए अन्य लोगों में आबिद कय्यूम लोन का नाम शामिल है. वो आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें कोऑर्डिनेट करने, फंड इकट्ठा करने और आतंकवादियों को लॉजिस्टिक्स मुहैया कराने के मामलों में शामिल रहा है. साथ ही, लिस्ट में नजीर अहमद गुज्जर भी है जो ड्रोन का इस्तेमाल करके हथियार और गोला-बारूद भेजने में शामिल रहा है. अशफाक अहमद को भी टेररिस्ट लिस्ट में शामिल किया गया है, जो आतंकवादी गतिविधियों के लिए तकनीकी मदद देने और फंड जुटाने का काम करता है.
केंद्र सरकार ने मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की को भी आतंकवादी घोषित किया, जो कई आतंकवादी हमलों का कोऑर्डिनेटर और JeM के कई गुटों का हेड है. साथ ही मौलाना सैफुल्ला खालिद का नाम भी है जो जमात-उद-दावा के कई गुटों में एक्टिव है. आतंकवादी घोषित किए गए अन्य लोगों में मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ तैबी, वसीम नूर जट, ओवैस फारूक और कारी याकूब शेख भी शामिल है.
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