पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही ममता बनर्जी को एक के बाद एक राजनीतिक झटके लग रहे हैं. पहले चुनाव में हार मिली. फिर उनकी पार्टी के विधायक बागी हो गए. नया दल बनाने लगे. कई बड़े चेहरों ने उनका साथ छोड़ दिया और अब उन्हें एक और झटका लगा है. उनकी पार्टी की बंगाल की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने 4 जुलाई को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया. ये वही चंद्रिमा हैं, जिन्हें चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी की कार्यकारिणी के पुनर्गठन के दौरान ममता बनर्जी ने प्रदेश की कमान सौंपी थी.
ममता बनर्जी ने जिसे प्रदेश की कमान सौंपी, वह भी बागियों से जा मिली, दे दिया इस्तीफा
TMC से इस्तीफा देने के तुरंत बाद, Chandrima Bhattacharya ने बंगाल विधानसभा में Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाले बागी गुट से मुलाकात की. ऋताब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है, क्योंकि ज्यादातर विधायकों ने उनका समर्थन किया था.


विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य को बंगाल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. चुनावी हार के बाद 3 जून को ममता बनर्जी ने पार्टी की सभी कमेटियां भंग कर दी थीं. साथ ही वापस TMC संगठन का पुनर्गठन किया था. इसके बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सुब्रत बख्शी की जगह प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला था. अब वह भी इस्तीफा दे चुकी हैं. अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा,
मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देती हूं, जो मुझे 03 जून 2025 को कालीघाट में हुई बैठक में सौंपा गया था. मैं उन सभी अन्य पदों से भी इस्तीफा देती हूं, जिन पर मैं अभी काम कर रही हूं.
उन्होंने आगे कहा,
कृपया ध्यान दें कि मैं अलग-अलग बैंकों में मौजूद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और उससे जुड़ी सभी संस्थाओं के खातों के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज्ड सिग्नेटरी) के तौर पर अपना नाम वापस ले रही हूं. साथ ही मैं भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष आपके अधिकृत व्यक्ति के तौर पर भी अपना नाम वापस ले रही हूं.
उन्होंने लेटर के अंत में कहा कि ममता बनर्जी के प्रति उनके मन में हमेशा बहुत सम्मान रहेगा. अपने पदों से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा कि जहां भरोसा न हो, जहां विश्वास न हो, वहां काम करना मुमकिन नहीं है. इसीलिए हमने इस्तीफा दिया.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इस्तीफा देने के तुरंत बाद, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बंगाल विधानसभा में ऋताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट से मुलाकात की. ऋताब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है, क्योंकि ज्यादातर विधायकों ने उनका समर्थन किया था. वहीं, ममता बनर्जी ने इस पद के लिए सीनियर विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नामित किया था.
ममता बनर्जी ने क्या कहा?ममता बनर्जी ने चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद एक वीडियो मैसेज जारी किया. वीडियो में उन्होंने कहा,
चेयरपर्सन के तौर पर मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस दोनों की देखरेख करूंगी. अब मेरे पास कोई और काम नहीं है. अब से मैं पूरी तरह से पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान दूंगी. मैं हर रोज पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलती हूं, इसलिए अब मैं इस पर और भी ज्यादा ध्यान दूंगी.
ममता बनर्जी ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतने के बाद संगठन के साथ धोखा करने वाले कई पूर्व पार्टी नेताओं पर भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा,
जिन लोगों ने मेरे साइन वाले तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता, वे अब दावा कर रहे हैं कि 2023 से पार्टी का कोई अस्तित्व ही नहीं है. अगर यह सच है, तो उन्होंने हमारे चुनाव चिह्न पर 2026 का चुनाव कैसे लड़ा? चुनाव आयोग ने मेरे हस्ताक्षर के बाद ही उनकी उम्मीदवारी को मंजूरी दी थी.
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इसके अलावा उन्होंने पार्टी छोड़ने वालों को ‘गद्दार’ बताते हुए चुनौती दी कि वे उस गुप्त राजनीतिक गठबंधन को जारी रखने के बजाय औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो जाएं. उन्होंने कहा,
धोखाधड़ी की भी एक सीमा होती है. आपने उसी पार्टी के साथ धोखा किया है जिसने आपको राजनीतिक जीवन दिया. अगर आपमें हिम्मत है, तो जाकर खुलेआम भाजपा में शामिल हो जाएं. आपको क्या लगता है? कि मैं मर चुकी हूं?
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वह पार्टी छोड़ने वालों को दोष नहीं देतीं. उन्होंने कहा कि उनके परिवार और व्यक्तिगत जिम्मेदारियां थीं.
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