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8.2% GDP ग्रोथ के बीच IMF की रिपोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

IMF ने भारत के नेशनल अकाउंट्स डेटा यानी GDP से जुड़े आंकड़ों को ‘C’ ग्रेड दिया है. ‘C’ ग्रेड दूसरा सबसे कम स्तर होता है, जिसका मतलब है कि डेटा में कुछ ऐसी कमियां हैं जो अर्थव्यवस्था की सही निगरानी में दिक्कत पैदा करती हैं.

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IMF ने भारत के नेशनल अकाउंट्स से जुड़े आंकड़ों को ‘C’ ग्रेड दिया है. (India today)

भारतीय सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) ने शुक्रवार, 28 नवंबर को जब जुलाई–सितंबर तिमाही का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) डेटा जारी किया तो कई अर्थशास्त्री चौंक गए होंगे. इस तिमाही में भारत का जीडीपी ग्रोथ अप्रैल-जून वाली तिमाही के 7.8 प्रतिशत से बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गया था. ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि साल की दूसरी तिमाही में ये ग्रोथ ज्यादा से ज्यादा 7.3 प्रतिशत के आसपास हो सकती है लेकिन यह 8 फीसदी के आंकड़े को भी पार कर गई. 

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जीडीपी में यह ग्रोथ पिछली 6 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है. लेकिन इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2025 के लिए भारत की जो वार्षिक रिपोर्ट जारी की है, उसमें उसने भारत के नेशनल अकाउंट्स यानी GDP से जुड़े आंकड़ों को ‘C’ ग्रेड दिया है.

‘C’ ग्रेड IMF की रेटिंग में दूसरा सबसे कम लेवल होता है, जिसका मतलब है कि डेटा में कुछ ऐसी कमियां हैं जो अर्थव्यवस्था की सही निगरानी (surveillance) में दिक्कत पैदा करती हैं. इन दोनों खबरों को मिलाकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर ले लिया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार मुद्रास्फीति को कम करके दिखा रही है ताकि जीडीपी में बढ़त दिखाई जा सके.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, IMF हर साल अपने सदस्य देशों के साथ बातचीत करता है. इसे ‘Article-IV Consultations’ कहा जाता है. इसमें IMF की टीम उस देश में जाकर आर्थिक और वित्तीय जानकारी इकट्ठा करती है. सरकारी अफसरों से बात करती है और फिर एक रिपोर्ट बनाती है. साल 2025 की ऐसी ही रिपोर्ट में IMF ने कहा कि अगर भारत अपने आर्थिक और वित्तीय आंकड़ों की क्वॉलिटी, उपलब्धता और समयबद्धता (Timeliness) बेहतर बनाए तो पॉलिसी बनाना आसान और ज्यादा सही होगा. 

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IMF ने नेशनल अकाउंट्स को सी ग्रेड दिया है (IMF)

IMF ने यह भी माना कि भारत सरकार GDP और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) जैसे Key Macroeconomic Indicators (आर्थिक संकेतकों) को अपडेट करने की कोशिश कर रही है लेकिन सुझाव भी दिया कि भारत सरकार को अपने राष्ट्रीय खातों (National Accounts), कीमतों और दूसरे बड़े आंकड़ों का नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से रिवीजन करना चाहिए. साथ ही जनगणना जल्द से जल्द कराना चाहिए और केंद्र-राज्यों का कुल वित्तीय हिसाब (consolidated fiscal data) समय पर देना चाहिए.

इन सब टिप्पणियों के साथ IMF ने भारत के नेशनल अकाउंट्स यानी जीडीपी से संबंधित डेटा को सी-ग्रेड रेटिंग दी है, जिसका मतलब है कि भारत अपने यहां के जो आर्थिक आंकड़े IMF को देता है, उनमें कुछ कमियां हैं. 

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चीन जैसी हालत?

‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल अकाउंट्स में सिर्फ बड़े आर्थिक आंकड़े जैसे GDP और GVA ही नहीं आते. बल्कि अलग-अलग सेक्टर का डेटा, निवेश कितना हो रहा है, लोग कितना खर्च कर रहे हैं और सबसे अहम Exports की हालत कैसी है, ये सब शामिल होता है. इस तरह की कमियां सरकार की नीतियों को सही दिशा में बनाने में दिक्कत पैदा करती हैं. डेटा के मामले में ‘C’ ग्रेड का मतलब यह भी है कि इस मामले में भारत की हालत चीन जैसी हो जाती है, जो ठीक नहीं है.

IMF की रेटिंग

दरअसल, IMF के पास चार कैटेगरीज हैं. ग्रेड- A, B, C और D. इसमें A ग्रेड का मतलब है कि डेटा पूरा और IMF की निगरानी के लिए पर्याप्त है.  ग्रेड B का मतलब है- कुछ कमी है लेकिन कुल मिलाकर डेटा ठीक-ठाक है. ग्रेड C का मतलब- कुछ ऐसी कमी है जो निगरानी को थोड़ा मुश्किल बनाती है. वहीं, ग्रेड D यानी गंभीर कमी है और निगरानी में बड़ी परेशानी आ रही है.

कांग्रेस के सवाल

केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय ने शुक्रवार 28 नवंबर को बताया कि साल 2025-26 की दूसरी तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 8.2% की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की इसी अवधि की 5.6% और पिछले क्वार्टर की 7.8% से काफी बेहतर है. इस डेटा के जारी होते ही कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने IMF का नाम लेते हुए इन आंकड़ों पर सवाल उठा दिए. ऊपर IMF की जिस रिपोर्ट का जिक्र है, जयराम रमेश ने उसी का जिक्र करते हुए एक्स पर पोस्ट किया,

यह भी अजीब संयोग है कि तिमाही GDP के आंकड़े ठीक उसी समय जारी किए गए हैं, जब IMF की वार्षिक रिपोर्ट में भारत के नेशनल अकाउंट्स के आंकड़ों को C ग्रेड दिया गया है, जो दूसरा सबसे कम मूल्यांकन है.

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जयराम रमेश ने जीडीपी के आंकड़ों पर सवाल उठाया है

रमेश ने आगे कहा कि जीडीपी के आंकड़े निराशाजनक बने हुए हैं. Gross Fixed Capital Formation में कोई बढ़ोतरी नहीं दिख रही है. निजी निवेश में नई गति आए बिना हाई GDP वृद्धि दर लंबे समय तक टिक नहीं सकती और ऐसी किसी सुधार के कोई सबूत दिखाई नहीं देते. उन्होंने कहा कि अवास्तविक रूप से बहुत कम GDP deflator जो यह दिखाता है कि महंगाई दर सिर्फ 0.5% है जबकि सच्चाई बिल्कुल उलट है. करोड़ों परिवार अपने रोजमर्रा खपत होने वाले वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं और उनके अनुभवों से यह आंकड़ा जरा भी मेल नहीं खाता.

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