दिल्ली में एक तरफ़ 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और युवाओं का ‘चलो संसद’ मार्च चल रहा था. दूसरी तरफ़, दिल्ली हाईकोर्ट में सोनम वांगचुक को लेकर सुनवाई भी जारी थी. ये सुनवाई उस याचिका पर हो रही थी, जो वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि अंगमो ने दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन सफदरजंग हॉस्पिटल में रखा है, ताकि वो दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा न ले सकें.
हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट्स मांगीं, प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करने पर क्या कहा?
Delhi High Court ने सफदरजंग हॉस्पिटल के डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वो सोनम वांगचुक की मेडिकल जांच से जुड़ी पूरी जानकारी हलफ़नामे के साथ कोर्ट में दाखिल करें. कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 21 जुलाई तय की है.


मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच कर रही थी. बेंच ने सफदरजंग हॉस्पिटल के डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वो सोनम वांगचुक की मेडिकल जांच से जुड़ी पूरी जानकारी हलफ़नामे के साथ कोर्ट में दाखिल करें. खास तौर पर इसमें तीन अलग-अलग जगहों पर जांचे गए सैंपल्स की सारी पैथोलॉजिकल रिपोर्ट्स शामिल हों. ये रिपोर्ट्स सफदरजंग हॉस्पिटल, एम्स और एक प्राइवेट लैब से तैयार की गई हों.
कोर्ट ने क्या कहा?लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा,
‘मौजूदा परिस्थितियों और दोनों पक्षों की दलीलों को देखते हुए हम निर्देश देते हैं कि सफदरजंग हॉस्पिटल, एम्स और प्राइवेट लैब में जांचे गए सैंपल्स की सभी पैथोलॉजिकल रिपोर्ट्स हॉस्पिटल के डायरेक्टर की ओर से हलफ़नामे के साथ दाखिल की जाएं.’
कोर्ट ने गीतांजलि अंगमो को भी निर्देश दिया कि जिन मेडिकल रिपोर्ट्स का हवाला वो दे रही हैं, उन्हें भी रिकॉर्ड पर पेश किया जाए. इसके अलावा, हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले में सोनम वांगचुक के ट्रीटमेंट से जुड़े सभी डॉक्टर्स अगली पेशी के दौरान कोर्ट में मौजूद रहें. अगली सुनवाई आज यानी 21 जुलाई को होनी है.
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सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने दलील दी कि इस मामले में शासन की भी एक अहम जिम्मेदारी है. उनका कहना था कि अगर सोनम वांगचुक की तबीयत ज़्यादा बिगड़ती है या उनकी जान को कोई खतरा होता है, तो उसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़ सकता है. इसके बाद उन्होंने इस मामले को इच्छामृत्यु से जोड़कर कुछ बातें कहीं. सरकार की ओर से तुषार मेहता ने कहा,
‘हम यहां इच्छामृत्यु जैसे किसी मामले से नहीं निपट रहे हैं. हम ऐसे शख्स के मामले से निपट रहे हैं, जिसे विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है. लेकिन अगर कोई कहे कि जब तक उसकी मांग पूरी नहीं होगी, तब तक वो खुद की जान लेगा, तो वहां पब्लिक इंटरेस्ट का सवाल सामने आ जाता है.’
SG तुषार मेहता ने कहा कि ऐसी स्थिति में शासन का कर्तव्य है कि उस व्यक्ति की सेहत और ज़्यादा खराब न होने दी जाए. ये दलील सोनम वांगचुक के उस अनिश्चितकालीन अनशन से जुड़ी थी, जो उन्होंने 28 जून को शुरू किया था.
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