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फ्रीलांसर हैं या YouTube से छाप रहे नोट? ITR भरते वक्त रहें अलर्ट, वरना होगा बड़ा नुकसान

पिछले कुछ समय में फुल टाइम जॉब छोड़कर फ्रीलांस और यूट्यूब चैनल वगैरह से कमाई करने का ट्रेंड शुरू हुआ है. हालांकि, इनकम टैक्स रिटर्न करना फ्रीलांसर्स के लिए भी जरूरी है. 31 अगस्त ITR फाइल करने की लास्ट डेट है. जान लें काम की सारी डिटेल.

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बिजनेस या प्रोफेशन से कमाने वालों के लिए रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है, और फ्रीलांसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स तथा बिजनेस वाले लोगों को इसे दाखिल करना अनिवार्य है।
  • फ्रीलांसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स की कमाई कई स्रोतों से होती है, जिसके कारण आय की सही वर्गीकरण और खर्चों के उचित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता होती है।
  • आईटीआर दाखिल करने के बाद टैक्स विभाग की जांच और जीएसटी दायित्वों की पूर्ति के लिए सही रिकॉर्ड रखना तथा नियमों का पालन करना आवश्यक होगा।

अगर आपकी कमाई का जरिया बिजनेस या कंटेट क्रिएशन है या फ्रीलांसर्स हैं तो इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करना आपके लिए भी जरूरी है. आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त काफी करीब आ रही है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आईटीआर दाखिल करना सबके लिए ज़रूरी है. नियमों के तहत, जिन टैक्सपेयर्स की बिजनेस या प्रोफेशनल कमाई को ऑडिट कराने की जरूरत नहीं होती है,  उन्हें आमतौर पर 31 अगस्त तक ITR दाखिल करना होता है. 

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हालांकि, समय सीमा से पहले रिटर्न दाखिल करना काम का सिर्फ एक हिस्सा है. कमाई गलत दिखाने, बिना सबूत के खर्चे बताने या गलत टैक्स रिजीम चुनने पर आपका आयकर रिटर्न इनकम टैक्स विभाग की जांच के दायरे में आ सकता है.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में 5 ऐसे चेक प्वाइंट्स बताए गए हैं, जिसे फ्रीलांसर्स और क्रिएटर्स को फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के आयकर रिटर्न दाखिल करने से समझना जरूरी है.

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इनकम की गलत जानकारी देना 

फ्रीलांसर और क्रिएटर्स कई स्रोतों से पैसा कमा सकते हैं. मसलन कंसल्टिंग, फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स, ब्रांड सहयोग, कंटेट क्रिएशन और दूसरे प्रोफेशनल कामों से. पहला कदम यह समझना है कि इस इनकम को कैसे क्लासीफाइड किया जाना चाहिए. पेशेवर या व्यावसायिक आय को गलत तरीके में दिखाने पर  आईटीआर फॉर्म, बही-खाता संबंधी जरूरतों और दूसरे टैक्स नियमों के पालन पर असर पड़ सकता है.

मखीजानी गेरा एंड एसोसिएट्स के टैक्स हेड गौरव मखीजानी ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, "फ्रीलांसर्स और क्रिएटर्स के लिए टैक्स के लिहाज से आय को सही कैटेगरी में दाखिल करना जरूरी है." उन्होंने आगे कहा कि कंसल्टिंग, फ्रीलांस  प्रोफेशनल सर्विसेज ,  कंटेट क्रिएटर या ब्रांड से कमाई को बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम के तौर पर अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाना पड़ सकता है.

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निजी खर्चों को कंपनी के खर्च में क्लेम करना 

रिपोर्ट बताती है कि इस मामले में फ्रीलांसर्स और कंटेट क्रिएटर्स को काफी सावधानी बरतने की जरूरत है. घर से काम करना या पर्सनल कार का उपयोग करना, हर घरेलू या यात्रा खर्च को टैक्स कटौती के तौर पर क्लेम नहीं किया जा सकता है. 

खर्चों और कमाई के बीच संबंध दिखना चाहिए और इनका रिकॉर्ड भी देना ज़रूरी है. जैसे कि एक कंटेट क्रिएटर अपनी निजी यात्रा में किए गए खर्च को अपने काम के लिए की गई यात्राओं के तौर पर क्लेम नहीं कर सकता है. 

मखीजानी गेरा एंड एसोसिएट्स के टैक्स हेड गौरव मखीजानी ने कहा कि करदाताओं को कंपनी के काम में खर्च किए गए अमाउंट को ही क्लेम करना चाहिए. इन खर्चों का वैलिड बिल भी होना चाहिए.'

अगर कोई खर्च इस तरह का है जिसमें बिजनेस के साथ निजी कामों के लिए खर्चे शामिल हैं, तो इसमें सिर्फ कारोबार के लिए किए खर्चों को ही शामिल किया जाएगा. धारा 44ADA के तहत टैक्स रिटर्न दाखिल करना आसान होता है. लेकिन, यह नहीं भूलना चाहिए कि सिर्फ फ्रीलांसर होने की वजह से हर टैक्सपेयर इसका फायदा नहीं उठा सकते हैं. 

मान लीजिए कि आपकी 40 लाख रुपये की कमाई हुई है. यह कमाई किसी ऐसे काम से हुई है, जो इनकम टैक्स कानून के मुताबिक 'निर्दिष्ट पेशा' (Specified Profession) नहीं है. ऐसी स्थिति में आप 50% यानी 20 लाख रुपये की सीधी छूट दिखाकर टैक्स नहीं भर सकते.

इसलिए टैक्स दाखिल करने से पहले फ्रीलांसरों को दो बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- आपका काम टैक्स विभाग की तय की गई पेशेवर लिस्ट में आता है या नहीं.
- आप इसकी बाकी शर्तें पूरी करते हैं या नहीं.

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रिटर्न दाखिल करते समय GST का ध्यान रखना 

आयकर और जीएसटी को लेकर अलग अलग नियम है.  आयकर रिपोर्ट दाखिल करने से जीएसटी से जुड़े आपके दायित्व पूरे नहीं होते हैं. अपनी सेवाओं की प्रकृति और मूल्य के आधार पर, फ्रीलांसर्स और क्रिएटर को कारोबार की शर्तों को पूरा करने के बाद जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन करना पड़ सकता है. विदेशी ग्राहकों से कमाई करने वालों के लिए, लेन-देन को सर्विसेज के निर्यात के नजरिये से भी जांचने की जरूरत पड़ सकती है. 

टैक्स हेड गौरव मखीजानी ने कहा कि फ्रीलांसर्स और क्रिएटर्स को आईटीआर दाखिल करने को अलग-थलग करके नहीं देखना चाहिए. इसकी वजह ये है कि इनकी कमाई, खर्च, जीएसटी खाते और ऑडिट संबंधी सभी जरूरतों पर एक साथ विचार करने की आवश्यकता है.

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लास्ट डेट से पहले ही कर लें काम पूरा 

फ्रीलांसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए टैक्स फाइलिंग सिर्फ बैंक क्रेडिट को जोड़कर रिटर्न जमा करने से कहीं अधिक जटिल हो सकती है. विभिन्न प्लेटफॉर्म, ब्रांड डील, कंसल्टिंग असाइनमेंट और अन्य तरीकों से होने वाली कमाई का सही हिसाब रखना बेहद जरूरी है.

टैक्स जमा करने से पहले, करदाताओं को अपनी कमाई का वर्गीकरण जांचना चाहिए, चालान और कहां पैसा खर्च हुआ ये सब रिकॉर्ड तैयार रखने चाहिए. साथ ही, ये समझना होगा कि क्या धारा 44ADA उन पर लागू होती है . 

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