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सरकारी क्लर्क 3 साल में 3 टाइपिंग टेस्ट में फेल, DM ने सीधा चपरासी बना दिया

Bareilly के DM ने एक जूनियर क्लर्क को चपरासी बना दिया है. क्लर्क को एक टाइपिंग टेस्ट पास करना था. लेकिन वो 3 बार इसमें फेल हो गए. जिसके बाद DM ने ये कार्रवाई की.

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बरेली के DM अविनाश सिंह (फोटो में) ने एक जूनियर क्लर्क को चपरासी बना दिया है. (Courtesy- ITG)

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  • उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में जूनियर क्लर्क रेहान खान को तीन बार टाइपिंग टेस्ट फेल होने के कारण जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने डिमोट कर चपरासी बना दिया।
  • रेहान खान की नौकरी मृतक आश्रित कोटे से मिली थी और हिंदी टाइपिंग टेस्ट पास न करने के कारण उनकी पदस्थापना पर सवाल खड़े हुए।
  • अन्य कर्मचारियों को भी टाइपिंग टेस्ट के लिए समय दिया गया है और सुधार न होने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक जूनियर क्लर्क को डिमोट करके चपरासी बना दिया गया है. यह कार्रवाई खुद जिलाधिकारी (DM) की ओर से की गई. दरअसल, क्लर्क का तीन बार टाइपिंग टेस्ट हुआ था. लेकिन शख्स तीनों ही बार इस टेस्ट को नहीं पास कर पाया. इसके बाद DM ने गुरुवार, 16 सितंबर को एक आदेश जारी कर उसे चपरासी के पद का कार्यभार सौंप दिया.

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डिमोशन पाए कर्मचारी का नाम रेहान खान है. रेहान मीरगंज तहसील में जूनियर क्लर्क के पद पर कार्यरत थे. इंडिया टुडे से जुड़े कृष्ण गोपाल राज की रिपोर्ट के मुताबिक, रेहान खान की नौकरी 5 जुलाई 2021 को मृतक आश्रित कोटे से लगी थी. यानी परिवार में किसी सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार के सदस्य को मिलने वाली नौकरी. 

लेकिन नौकरी मिलने के बाद रेहान के लिए हिंदी टाइपिंग टेस्ट पास करना जरूरी था. उनका पहला टाइपिंग टेस्ट 25 सितंबर 2023 को हुआ था. इसमें वो फेल हो गए थे. इसके बाद दूसरा मौका 21 जून 2024 को मिला. लेकिन इस बार भी वो टेस्ट पास नहीं कर पाए. फिर 8 सितंबर 2026 को उन्हें तीसरी और आखिरी बार टाइपिंग टेस्ट देने का मौका मिला. लेकिन इस बार भी वो जरूरी स्पीड और मानक पूरा नहीं कर पाए.

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इसके बाद 16 सितंबर को जिले के डीएम अविनाश सिंह ने आदेश जारी कर दिया. रेहान खान को जूनियर क्लर्क की पोस्ट से हटाकर चपरासी के पद पर भेज दिया गया. वैसे सिर्फ रेहान खान ही ऐसे कर्मचारी नहीं हैं, जिनका टाइपिंग टेस्ट हुआ था. कुछ दूसरे कर्मचारियों का भी टेस्ट हुआ है जिनके सिर पर डिमोशन का खतरा मंडरा रहा है.

इनमें राहुल कुमार और लक्ष्मी सक्सेना को तीसरी और आखिरी बार टेस्ट देने का मौका दिया गया है. वहीं कंचित चौधरी और नेहा जोशी को दूसरी बार मौका दिया गया है. इन सभी को कंप्यूटर टाइपिंग सीखने और टेस्ट की तैयारी करने के लिए दो महीने का समय मिला है. अगर इस समय के बाद भी सुधार नहीं हुआ, तो इनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है.

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लेकिन सबसे बड़ी कार्रवाई हुई फरीदपुर में तैनात रहे अंशुल वर्मा पर. अंशुल को सरकारी नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया गया है. इस सख्त कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट विभाग में हलचल मच गई है. कहा गया कि ऑफिस के कामकाज को लेकर सख्ती बढ़ सकती है. 

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