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मानव अंडाणु निकालने का रैकेट पकड़ा गया, 43 महिलाएं बचाई गईं, 8 आरोपी गिरफ्तार

महिलाओं को हर एग डोनेशन साइकल के लिए 20 हजार रुपये से 30 हजार रुपये तक देने का वादा किया गया था. पुलिस के मुताबिक, उन्हें अलग-अलग राज्यों से हैदराबाद लाकर किराये के मकानों में रखा गया और IVF सेंटरों से जोड़ा गया.

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आरोपियों को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस (COURTSEY- ITG)

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  • हैदराबाद पुलिस और मलकाजगिरी कमिश्नरेट की स्पेशल ऑपरेशंस टीम ने मानव अंडाणु रैकेट का खुलासा कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया और पश्चिम बंगाल की 43 महिलाओं को बचाया।
  • जांच में पता चला कि इस रैकेट में महिलाओं को तेलंगाना आकर अंडाणु दान करने के लिए 20 से 30 हजार रुपये भुगतान का लालच देकर भर्ती किया जाता था और उनके ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था एजेंट करते थे।
  • गिरफ्तार आरोपियों में मास्टरमाइंड अमित शर्मा और अन्य शामिल हैं, मामले में तीन प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता 2023 और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम 2021 के तहत दर्ज की गई हैं।

हैदराबाद पुलिस ने एक अंतरराज्यीय मानव अंडाणु (human egg extraction) के रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इसमें अंडाणु दान करने के लिए महिलाओं की भर्ती की जाती थी. पुलिस ने कई जगहों पर एक साथ को-ऑर्डिनेट करके छापे मारे. इस दौरान आठ लोगों को गिरफ्तार किया. साथ ही पश्चिम बंगाल की 43 महिलाओं को रेस्क्यू किया गया. यह ऑपरेशन बेगमपेट और सरूरनगर पुलिस के साथ-साथ मलकाजगिरी कमिश्नरेट की स्पेशल ऑपरेशंस टीम (SOT) द्वारा किया गया.

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जांच में क्या पता चला?

शुरुआती जांच के अनुसार, महिलाओं को कथित तौर पर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद आने के लिए लालच दिया गया. हर एग डोनेशन साइकल के लिए उन्हें 20 हजार रुपये से 30 हजार रुपये तक देने का वादा किया गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस काम के लिए गिरोह ने एजेंट्स लगा रखे थे. ये एजेंट्स अलग-अलग राज्यों से महिलाओं को भर्ती करते थे.

फिर ये उनके ट्रांसपोर्टेशन का इंतजाम करते. प्रजनन संबंधी सर्विस प्रोवाइडर्स से जोड़ने से पहले उन्हें किराए के घर में रखते. कुछ महिलाओं ने जांच अधिकारियों को बताया कि उन्हें हार्मोनल इंजेक्शन और दवाएं भी दी गई थीं.

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मेडिकल सामग्री जब्त

छापे के दौरान, पुलिस ने ह्यूमोग एचपी 150 आईयू इंजेक्शन की पांच शीशियां, एक सिरिंज, दो सुई, प्राइमोलुट और मेप्रेट टैबलेट जब्त किए हैं. साथ ही दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य सामग्री भी जब्त कर ली गई है. फिलहाल इस मामले में 8 लोग गिरफ्तार हुए हैं. गिरफ्तार किए गए लोगों में अमित शर्मा (44) पर आरोप है कि वही इस रैकेट का मास्टरमाइंड है. साथ ही निखत परवीन (31) पर उसका साथ देने का आरोप है.

अन्य आरोपी रेशमा खातून (26), मेघवथ श्रीनिवास उर्फ सोनू (23), जेप्रय प्रदीप (27), एसके परवीन (42), विजय भागवाह राव सालुंके (46) और पंकज सोनी (52) हैं. रेशमा खातून एक कथित IVF एजेंट और उप-एजेंट हैं. मेघवथ श्रीनिवास ने कथित तौर पर मेडिकली कोऑर्डिनेट किया. जेप्रय प्रदीप एक ART (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) बैंक मैनेजर है.

एसके परवीन की सटीक भूमिका की जांच की जा रही है. विजय भागवाह 'बटरफ्लाई बायो एंड ART बैंक' में डॉक्यूमेंटेशन के काम से जुड़ा है. पंकज सोनी कथित तौर पर कोऑर्डिनेशन और मध्यस्थता जैसे एक्टिविटीज में शामिल थे.

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रैकेट के संबंध में तीन मामले दर्ज किए गए हैं. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 33 (2) और 34 के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. यह ऑपरेशन मलकाजगिरी पुलिस कमिश्नर बी सुमाथी की देखरेख में किया गया था.

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