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महाकुंभ में धर्म संसद, कुंभ से जुड़े इन शब्दों से लेकर प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट पर क्या होने वाला है?

अखाड़ों के समूह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) ने धर्म संसद में चर्चा के लिए महत्वपूर्ण विषयों की रूपरेखा सामने रखी है. धर्म संसद में विश्व हिंदू परिषद (VHP ) भी भाग लेगा.

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(फोटो- इंडिया टुडे)

27 जनवरी को प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में धर्म संसद का आयोजन होने जा रहा है. अखाड़ों के समूह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) ने धर्म संसद में चर्चा के लिए महत्वपूर्ण विषयों की रूपरेखा सामने रखी है. धर्म संसद में विश्व हिंदू परिषद (VHP ) भी भाग लेगा. कहा जा रहा है कि इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में मंदिर-मस्जिद विवादों के बारे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के रुख को संबोधित करना है. धर्म संसद में किन-किन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी, इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

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कुंभ आयोजनों के नाम में बदलाव

ABAP द्वारा दिए गए प्रस्तावों में सबसे चर्चित प्रस्ताव है पारंपरिक कुंभ आयोजनों का नाम बदलना. जिसमें 'शाही' और 'पेशवाई' जैसे शब्दों को हटाया जाएगा, इन्हें मुगल काल से जोड़कर देखा जाता है. इंडिया टुडे में छपी अवनीश मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक ABAP के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि प्रस्तावित बदलावों में 'शाही स्नान' (शाही स्नान) का नाम बदलकर 'राजसी स्नान' करना और कुंभ समागमों में अखाड़ों के भव्य प्रवेश के लिए 'पेशवाई' के बजाय 'छावनी प्रवेश' का उपयोग करना शामिल है. पुरी ने आगे कहा,

''हम सनातन धर्म और परंपरा को बढ़ावा देना चाहते हैं. इसका उद्देश्य मुगल काल को दर्शाने वाले तत्वों की जगह हमारी सांस्कृतिक विरासत में निहित तत्वों को लाना है.''

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उन्होंने ये भी कहा कि ये विचार सबसे पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सामने रखा था. जिसे अब अखाड़ों ने अपना लिया है और धर्म संसद में इसे औपचारिक रूप देने का इरादा है.

Places of Worship Act पर पुनर्विचार

एजेंडे में दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 में संशोधन से जुड़ा है. अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों का मानना है कि मौजूदा कानूनी ढांचा मुगल काल के दौरान कथित तौर पर ध्वस्त किए गए हिंदू मंदिरों के पुनर्निर्माण में बाधा डालता है. ABAP के एक पदाधिकारी ने बताया,

"अगर हमें हिंदू राष्ट्र की कल्पना को साकार करना है तो इस कानून को चुनौती देने का ये सटीक समय है."

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यही नहीं पड़ोसी देशों, खास तौर पर बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं की दुर्दशा पर भी चर्चा होने का अनुमान है. हिंदू संतों और मंदिरों पर बढ़ते हमलों के बारे में भी बात सामने रखी जाएगी. इन देशों में हिंदू समुदायों के लिए राजनयिक हस्तक्षेप और सुरक्षा उपायों की मांग की जाएगी.

‘वक्फ बोर्ड’ जैसा बोर्ड बनेगा!

धर्म संसद के दौरान 'सनातन बोर्ड' के गठन की बात को भी सामने रखा जाएगा. पुरी ने बताया कि इसकी रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए विभिन्न हितधारकों और प्रमुख संतों के साथ परामर्श किया गया है. इस बोर्ड में सभी 13 अखाड़ों को शामिल किया जाएगा. जिससे उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी और एक साथ लिए गए निर्णय सरकार के लिए बाध्यकारी होंगे.

पुरी ने आगे कहा,

''सनातन बोर्ड हिंदू मंदिर संपत्तियों और मठों की सुरक्षा के लिए एक छत्र संगठन के रूप में काम करेगा. ठीक वैसे ही जैसे मुसलमानों के लिए वक्फ बोर्ड करता है.''

उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार से पहले ही कई अपील की जा चुकी हैं. धर्म संसद से उम्मीद है कि वो इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए जोर लगाएगी.

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