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यूपी में नकली Himalaya Liv.52 की खेप पकड़ी गई, 50 हजार टैबलेट्स के साथ 5 गिरफ्तार

Himalaya Liv 52 Fake Tablets: गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मयंक अग्रवाल, अनूप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी के तौर पर हुई है. आरोप है कि ये लोग फर्जी दस्तावेजों, फर्जी GST नंबर और नकली मेडिसिन लाइसेंस का इस्तेमाल कर रहे थे.

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गाजियाबाद में नकली Himalaya Liv.52 बनाने वाले गिरोह पकड़ा गया. (ITG)
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मयंक गौड़

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में नकली दवाइयों के अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है. लिवर की बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली फेमस दवा Himalaya Liv.52 की भारी मात्रा में नकली खेप बरामद की गई है. इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मयंक अग्रवाल, अनूप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी के रूप में हुई है.

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इंडिया टुडे से जुड़े मयंक गौड़ की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजियाबाद पुलिस के ग्रामीण जोन की स्वॉट टीम और मुरादनगर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने इस गिरोह का पर्दाफाश किया. गुप्त सूचना के आधार पर रविवार, 8 जनवरी को मुरादनगर थाना क्षेत्र में छापेमारी की गई.

यहां से पुलिस ने नकली Liv.52 टैबलेट्स का बड़ा जखीरा बरामद किया. पुलिस ने मौके से 50 हजार नकली टैबलेट्स, 500 रैपर शीट, 1200 हरे रंग के ढक्कन, 1200 सफेद प्लास्टिक की डिब्बियां और एक कार बरामद की है.

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पूरा मामला तब सामने आया जब हिमालयन कंपनी ने मुरादनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ लोग Liv.52 दवा की नकली टैबलेट्स तैयार कर उन्हें बाजार में सप्लाई कर रहे हैं. डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP) ग्रामीण जोन, सुरेंद्र नाथ तिवारी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया,

'हिमालयन कंपनी ने शिकायत दर्ज कराई कि फर्जी माल बनाकर दुकानों पर सप्लाई किया जा रहा है. मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा, जिसके बाद उन्होंने फर्जी दवाई बनाने की बात स्वीकार की.'

हिमालयन कंपनी की शिकायत के मुताबिक, आरोपी फर्जी दस्तावेजों, फर्जी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) नंबर और नकली मेडिसिन लाइसेंस का इस्तेमाल कर रहे थे. कंपनी ने आरोप लगाया कि इन्हीं कागजातों के सहारे वे नकली दवाइयों को असली बताकर अलग-अलग शहरों में ट्रांसपोर्ट के जरिए भेज रहे थे.

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पुलिस ने कंपनी की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन किया. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूल किया कि वे बेहद कम लागत में नकली दवाइयां तैयार करते थे.

उन्होंने बताया कि एक डिब्बी टैबलेट बनाने में करीब 35 से 40 रुपये का खर्च आता था, जिसे बाजार में 100 रुपये तक में बेचा जाता था, जबकि असली दवा की कीमत इससे कहीं अधिक होती है. इस तरह वे मोटा मुनाफा कमा रहे थे.

आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि डिब्बियां, ढक्कन और रैपर वे अलग-अलग जगहों से तैयार कराते थे. वहीं, नकली टैबलेट्स को बाहर की लैब में बनवाकर उन्हें पैक कर बाजार में उतारा जाता था, ताकि किसी को शक ना हो.

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, Liv.52 जैसी दवा लिवर की सुरक्षा, पाचन सुधार, फैटी लिवर, शराब के सेवन से होने वाले नुकसान और भूख ना लगने जैसी समस्याओं में इस्तेमाल की जाती है. ऐसे में अगर मरीजों को नकली दवा मिलती, तो बीमारी ठीक होने के बजाय लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था.

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फिलहाल पुलिस ने गिरफ्तार सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इस गिरोह से जुड़े अन्य 6 लोगों की तलाश भी पुलिस कर रही है.

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