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BJP नेता के गलत आरोप पर सस्पेंड हुए थे मुस्लिम हेडमास्टर, यूपी मंत्री बोले- 'कोई गंभीर मामला नहीं'

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि हेडमास्टर जान मोहम्मद के ऊपर लगे आरोप गलत हैं, जिसके बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी गई. शिक्षा विभाग ने उनका सस्पेंशन रद्द कर उन्हें शुक्रवार, 6 फरवरी को बहाल कर दिया.

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BSA रतन कीर्ति (बाएं) ने हेडमास्टर जान मोहम्मद (बीच में) को सस्पेंड किया था. यूपी के मंत्री संदीप सिंह (दाएं) ने भी प्रतिक्रिया दी. (ITG)
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मदन गोपाल शर्मा

उत्तर प्रदेश के मथुरा में सरकारी स्कूल के हेडमास्टर जान मोहम्मद की सेवा बहाल कर दी गई है. उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक नेता की शिकायत के बाद सस्पेंड कर दिया गया था. शिक्षा विभाग की विभागीय जांच में हेडमास्टर के खिलाफ आरोप बेबुनियाद पाए गए, जिसके बाद उन्हें बहाल कर दिया गया. स्थानीय लोगों ने भी उनके सस्पेंशन का विरोध किया था.

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भाजपा नेता और पार्टी के नौहझील मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान ने हेडमास्टर पर स्कूल के बच्चों को नमाज पढ़ने के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया था. आरोप है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) रतन कीर्ति ने शिकायत मिलने के तुरंत बाद शुक्रवार, 30 जनवरी को बिना किसी जांच के जान मोहम्मद को सस्पेंड कर दिया.

इंडिया टुडे से जुड़े मदन गोपाल शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP नेता के गलत दावे और शिक्षा विभाग पर उठे सवालों पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और जिले के प्रभारी मंत्री संदीप सिंह ने कहा,

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“मुझे नहीं लगता इसमें इतना कोई गंभीर मामला है.”

उन्होंने शिक्षा विभाग की गलती मानने से साफ इनकार किया. हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ गलत कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने आगे कहा,

‘अगर कोई प्रकरण है और कोई व्यक्ति निर्दोष है और किसी भी तरह की कोई गलती नहीं है, तो जांच करने के बाद उसे दोषमुक्त कर दिया जाता है.’

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हेडमास्टर जान मोहम्मद की बहाली को लेकर BSA रतन कीर्ति से सवाल किया गया. उन्होंने जवाब देते हुए कहा,

'हेडमास्टर पर लगे आरोपों की जांच की गई. जांच रिपोर्ट में पाया गया कि उनपर लगे आरोप गलत हैं, जिसके बाद तीन दिन के अंदर उन्हें बहाल कर दिया गया.'

हेडमास्टर को सस्पेंड किए जाने पर स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मामले की जांच की गई, जिसमें उन्हें क्लीन चिट मिल गई. 52 साल के हेडमास्टर जान मोहम्मद मथुरा जिले के नौहझील इलाके में सरकारी प्राइमरी स्कूल में साल 2007 से तैनात हैं.

जब उन्हें सस्पेंड किए जाने की जानकारी आस-पास के लोगों को मिली, तो उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया. कुछ स्थानीय लोग हेडमास्टर के समर्थन में सस्पेंशन के खिलाफ मथुरा जिलाधिकारी (DM) के ऑफिस भी पहुंचे. उन्होंने कहा कि हेडमास्टर इस तरह के काम स्कूल में नहीं करते हैं.

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मामले में राजनीतिक एंगल आने के बाद जांच शुरु की गई. जिसके बाद जांच टीम स्कूल पहुंची. उन्होंने स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और उनके माता-पिता के बयान दर्ज किए. टीम ने जांच रिपोर्ट बनाकर जमा कर दी. रिपोर्ट में सामने आया कि हेडमास्टर जान मोहम्मद के ऊपर लगे आरोप गलत हैं, जिसके बाद उन्हें क्लीन चिट दे दी गई. शिक्षा विभाग ने उनका सस्पेंशन रद्द कर उन्हें शुक्रवार, 6 फरवरी को बहाल कर दिया.

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