हरियाणा बिजली वितरण निगम के सस्पेंडेड इंजीनियर (एसई) गीतू राम तंवर (Geetu Ram Tanwar Death) की सोमवार, 1 सितंबर को आत्महत्या से मौत हो गई. करनाल के सेक्टर-9 में डीएवी पब्लिक स्कूल के पास कार के अंदर उनका शव मिला है. गीतू राम ने जिस दिन आत्महत्या की और जिस दिन उनका शव मिला उसी दिन वो रिटायर होने वाले थे.
जाट समुदाय पर टिप्पणी के बाद सस्पेंड हुए सरकारी इंजीनियर का रिटायरमेंट के दिन शव मिला
हरियाणा के करनाल में सस्पेंडेड Superintending Engineer गीतू राम अपनी रिटायरमेंट वाले दिन कार में मृत मिले. कथित सुसाइड नोट में उन्होंने एक IAS अधिकारी समेत कई अफसरों पर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप लगाया है; पुलिस मौत की वजह और मामले की जांच कर रही है.

गीतू राम की छोटी बेटी ने बताया कि वह काफी दिनों से मानसिक तनाव में थे. घटना वाले दिन सुबह घर से ये कहकर निकले कि बड़े अफसरों को अपना अंतिम शिकायती पत्र सौंपने जा रहा हूं. लेकिन बाद में एक स्कूल के पास अपनी कार में बेहोश पाए गए. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच से ऐसा लगता है कि गीतू राम ने कोई जहरीला पदार्थ खाया है. लेकिन मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी.
सुसाइड नोट में अधिकारियों पर आरोपहिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVNL) के सोनीपत सर्कल के सस्पेंडेड Superintending Engineer गीतू राम ने कथित तौर पर एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है. इसमें उन्होंने एक आईएएस अधिकारी और कई अन्य अधिकारियों पर जाति के आधार पर भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप लगाया है. इसे ही अपने आत्मघाती कदम की वजह भी बताया है. जिन अधिकारियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगे हैं उनमें कई एसई, एक्सईएन, एसडीए और गीतू राम के अन्य सहयोगी भी शामिल हैं. हालांकि, उनके नाम अभी जाहिर नहीं हुए हैं.
ये भी पढ़ेंः सास ने मिलने बुलाया, सालों ने बीच सड़क चाकू से गोदा, लव मैरिज के बाद युवक की हत्या
अप्रैल में वायरल हुआ था वीडियोबता दें कि अप्रैल में गीतू राम का एक वीडियो वायरल हुआ था. इसमें उन्होंने कथित तौर पर जाट समुदाय पर विवादित टिप्पणी की थी. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सड़क पर इसका जमकर विरोध हुआ. इसके बाद गीतू राम को निलंबित कर दिया गया था.
हालांकि, उन्होंने अपने बचाव में कहा कि वीडियो को गलत तरीके से एडिट करके चलाया जा रहा है. सुसाइड नोट में उन्होंने इसके बारे में लिखा है कि वायरल वीडियो को दो अधिकारियों ने छिपकर रिकॉर्ड किया था. इसका मकसद एक खास समुदाय को उनके खिलाफ भड़काना था और ऐसे हालात पैदा करना था, जिससे शांति भंग हो सकती थी. वीडियो से छेड़छाड़ के आरोप भी उन्होंने लगाए और कहा कि जांच के लिए वीडियो को किसी फॉरेन्सिक लैब में भी नहीं भेजा गया था.
वीडियो: नेपाल बाढ़ के 5 दिन बाद Nuwakot से Rasuwa तक के रास्ते का क्या हाल है?












