गूगल अपने कुछ कर्मचारियों को एक्जिट पैकेज देने पर विचार कर रहा है. इसे 'सेवरेंस पैकेज' कहा जा रहा है. सेवरेंस यानी नौकरी छोड़ने पर मिलने वाला पैकेज. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कंपनी अपने खर्चों को थोड़ा कम कर सके. साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अधिक निवेश करने के इरादे से किया जा रहा है. यह प्रोग्राम अब पांच देशों के कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है.
Google ने अपने कर्मचारियों को दिया ऑफर, एक्जिट पैकेज लेकर नौकरी छोड़ो
Google ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में कुछ कर्मचारियों के लिए Voluntary Exit Package शुरू किया है. इसके तहत, कर्मचारियों को ऑफर दिया गया है कि वो अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ते हैं तो उन्हें कुछ अतिरिक्त पैसा मिलेगा.

इसका मतलब यह नहीं है कि Google खुद कर्मचारियों को निकालकर उन्हें मुआवजा दे रहा है. Google अपने कर्मचारियों से कह रहा है कि अगर वे अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ना चाहते हैं, तो कंपनी उन्हें इसके बदले पैसा देगी. यानी नौकरी कर्मचारी छोड़ेंगे, लेकिन बदले में आर्थिक पैकेज Google देगा. इसे Voluntary Exit Package कहते हैं।
5 देशों में EXIT प्रोग्राम उपलब्धरॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गूगल ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में ये प्रोग्राम शुरू कर दिया है. फिलहाल गूगल ने यह नहीं बताया है कि कितने कर्मचारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया है. कंपनी के एक प्रवक्ता ने रॉयटर्स से इस बात की पुष्टि की है. प्रवक्ता ने बताया कि जून में अन्य देशों तक इसे बढ़ाने से पहले, 2025 की शुरुआत में ही कुछ टीमों के लिए ऐसे प्रोग्राम शुरू किए गए थे.
हालांकि ये प्रस्ताव गूगल के सभी बिजनेस डिविजनों में उपलब्ध नहीं हैं. कहा जा रहा है कि कंपनी का AI रिसर्च डिवीजन DeepMind और Google Cloud इस प्रोग्राम से बाहर हैं. ठीक उसी तरह, जैसे इससे पहले Voluntary Exit प्रोग्राम्स में हुआ था. इन दोनों यूनिट्स में गूगल को और अधिक Hiring की जरूरत महसूस हो रही है. कंपनी अपने AI और क्लाउड बिजनेस को मजबूत करने पर काम कर रही है.
यही वजह है कि कंपनी कुछ क्षेत्रों में अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने या उनकी वर्क फ्रोफाइल व्यवस्थित करने की योजना बना रही है. लेकिन भविष्य की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली AI जैसी टीमों में निवेश जारी रहेगा. गूगल की पैरेंट कंपनी, अल्फाबेट, AI पर अपना खर्च बढ़ा रही है. इससे कंपनी पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह अपने इन्वेस्टमेंट प्लान्स के साथ-साथ खर्चों को भी सही ढंग से मैनेज करे.
स्विट्जरलैंड में दिखने लगा असरइस प्रोग्राम का असर स्विट्जरलैंड में पहले ही दिखने लगा है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, वहां गूगल के कर्मचारियों को जून में यह प्रस्ताव मिला था. जिन लोगों ने इसे स्वीकार किया, उन्होंने अगस्त से कंपनी छोड़ना शुरू कर दिया. स्विट्जरलैंड में गूगल के लगभग 5,000 कर्मचारी हैं और ज्यूरिख में कंपनी का एक बड़ा इंजीनियरिंग सेंटर भी है. एग्जिट पैकेज के तहत, काम के हर साल के बदले एक महीने की सैलरी देने की पेशकश की गई थी. लेकिन इसमें भी शर्त है. शर्त ये कि अधिकतम 12 महीने की सैलरी तक का पेमेंट ही मिल सकता था. बताया जा रहा है कि लगभग 50 कर्मचारियों वाली एक टीम से कम से कम चार लोगों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.
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माइक्रोसॉफ्ट ने भी देना शुरू किया पैकेजहाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने भी एक ‘वॉलंटरी बायआउट’ का ऑफर पेश किया है. इसमें अमेरिका, कनाडा, भारत और ब्रिटेन के लगभग 60,000 कर्मचारी शामिल हो सकते हैं. यह ऑफर लेवल 70 या उससे नीचे के एलिजिबल कर्मचारियों के लिए है. माइक्रोसॉफ्ट के कुल 2,23,000 कर्मचारियों में से लगभग 27 प्रतिशत कर्मचारी इसके दायरे में आते हैं. इस ऑफर को स्वीकार करने वाले कर्मचारी दिसंबर के अंत में कंपनी छोड़ देंगे.
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