गोवा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ी की शिकायतें थम नहीं रहीं. इससे जुड़ी एक और कहानी सुनिए. वास्को के रहने वाले 26 साल के शेरविन कोरेया को चुनाव आयोग से एक नोटिस मिला. कहा गया कि उनका नाम किसी ऐसे व्यक्ति से कनेक्टेड नहीं है, जो 2002 की वोटर्स लिस्ट में हो. आगे कहा गया कि वो अपने जरूरी डॉक्युमेंट्स लेकर ERO के सामने पेश हों. कोरेया को लगा कि ये तो आसान काम है. उनके पास दस्तावेज हैं. मां और पिता दोनों का नाम 2002 की लिस्ट में है. नाम तो वोटर्स लिस्ट में जुड़ ही जाएगा. लेकिन ये इतना आसान था नहीं, जितना कोरेया समझ रहे थे.
पुरानी वोटर लिस्ट में मां-बाप का नाम था, ये साबित करने के बाद भी SIR लिस्ट से नाम कट गया
गोवा के वास्को में 26 साल के शेरविन कोरेया का नाम SIR के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट से हटा दिया गया, जबकि उनके माता-पिता दोनों के नाम 2002 की वोटर लिस्ट में दर्ज थे.

कोरेये के साथ क्या-क्या हुआ, चलिए विस्तार से बताते हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के वास्को के रहने वाले शेरविन कोरेया 26 साल के हैं. पेशे से वकील हैं. गोवा में SIR हुआ तो उन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म भरकर जमा किया. बाद में उनके पास एक नोटिस आया. कहा गया कि उन्होंने अपनी या अपने किसी ऐसे रिश्तेदार की जानकारी नहीं दी है, जो 2002 की वोटर्स लिस्ट में हो. इससे उनका संबंध पुरानी वोटर्स लिस्ट से साबित नहीं हो पाता. उन्हें निर्वाचन अधिकारी (AERO) के सामने अपने दस्तावेजों के साथ पेश होना पड़ेगा. इस नोटिस से वह चौंके तो जरूर लेकिन उन्हें लगा कि वो इस दावे को आसानी से गलत साबित कर देंगे. लेकिन यहीं वो खुद ‘गलत साबित’ हो गए.
कोरेया ने RTI के जरिए अपना एन्यूमरेशन फॉर्म निकाला तो पता चला कि फॉर्म में उन्होंने अपनी मां का डिटेल भरा था, जिनका नाम 2002 की लिस्ट में था. फिर भी नोटिस मिलने के बाद 15 जनवरी 2026 को वह अपने पिता के डॉक्युमेंट्स लेकर चुनाव अधिकारी के सामने पेश हुए. उनके पिता भी 2002 की वोटर्स लिस्ट में थे. दस्तावेजों का मिलान किया गया और उनका रिकॉर्ड दर्ज कर लिया गया. लेकिन, जब गोवा SIR की फाइनल लिस्ट आई तो उसमें से कोरेया का नाम गायब था.
रिपोर्ट के मुताबिक उनके फॉर्म को ये कहते हुए रिजेक्ट कर दिया गया था कि…
वोटर को बुलाया गया. वो आए और दस्तावेज भी जमा किए. लेकिन फॉर्म इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि माता-पिता में से किसी एक के दस्तावेज जमा नहीं किए गए थे.
कोरेया हैरान रह गए. उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी के सामने अपील की. 20 मार्च 2026 को उनके पक्ष में फैसला भी आया. अधिकारी ने माना भी कि कोरेया ने सारे जरूरी कागज पेश किए थे. फिर भी उनका नाम तुरंत वोटर्स लिस्ट में बहाल नहीं किया गया. उनके मुताबिक, ईआरओ ने उनसे कहा कि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी है. इसलिए उन्हें फॉर्म-6 भरना पड़ेगा. फॉर्म-6 नए वोटरों को लिस्ट में जोड़ने के लिए भरा जाता है. यानी कोरेया को नए सिरे से वोटर लिस्ट में रजिस्टर होने के लिए कहा गया.
कोरेया ने कहा कि वो जल्द ही हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे ताकि वोटर्स लिस्ट में उनका नाम और पुराना EPIC नंबर बहाल हो सके. उनका कहना है कि इस गड़बड़ी के लिए फॉर्म-6 भरना सही तरीका नहीं है.
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सवालों के घेरे में SIRकोरेया के साथ ये घटना ऐसे समय में हुई जब चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया सवालों के घेरे में है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बाकी चुनाव आयुक्तों को बाईपास करके फैसले लेने के आरोप लगे हैं. इसके साथ ही आयोग की ECINet पोर्टल को लेकर भी गड़बड़ियों की आशंका जताई जा रही है.
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