उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कांवड़ यात्रा के दौरान स्कूल बंद करने के आदेश दिए गए. गाजियाबाद जिले में भी छात्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए 12 अगस्त तक स्कूल बंद हैं. कई स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास शुरू कर दीं या वॉट्सऐप ग्रुप पर काम भेजना शुरू कर दिया. लेकिन यह रास्ता हर बच्चे के लिए आसान नहीं है. कई छात्रों के पास या तो स्मार्टफोन नहीं है या उसे लगातार यूज नहीं कर सकते. जिनके पास है भी, उनके पास कोई ऐसा नहीं है जो यह समझा सके कि क्या पढ़ाया जा रहा है.
कांवड़ यात्रा की वजह से स्कूल बंद, छात्र बोले- 'टीचर वॉट्सऐप पर काम भेजते, लेकिन फोन ही नहीं है'
Kanwar Yatra की वजह से Uttar Pradesh के कई जिलों में स्कूल बंद हैं. कई स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाना शुरू किया है. लेकिन स्मार्टफोन की कमी से कई बच्चों को परेशानी हो रही है. छात्रों ने बातचीत में सब बताया है.

इंडियन एक्सप्रेस ने ऐसे ही कुछ छात्रों से बातचीत की, जो इस संकट का सामना कर रहे हैं. गाजियाबाद के मकनपुर इलाके में रहने वाली 16 साल की छात्रा ने बताया कि घर में इकलौता फोन उसकी मां के पास है, जिसे वह काम पर ले जाती हैं और देर से लौटती हैं. छात्रा ने बताया,
"टीचर स्कूल के वॉट्सऐप ग्रुप पर काम भेजते रहते हैं, लेकिन 3 अगस्त के बाद से मैंने कोई मैसेज नहीं देखा. मैं किताबों से पढ़ती हूं... जब कोई फोन ही नहीं तो हम क्या कर सकते हैं?"
जब से स्कूल बंद हैं, तब से छात्रा अपनी मां के साथ पास की कोठियों में बर्तन धोने के काम में हाथ बंटाने जा रही है. आमतौर पर उसका दिन ऐसे शुरू नहीं होता है. होम साइंस और म्यूजिक की 9वीं क्लास की यह छात्रा ‘बालिका इंटर कॉलेज’ में पढ़ाई करती है. लेकिन कांवड़ यात्रा की वजह से 10 दिनों तक स्कूल बंद हैं, इसलिए उसे खुद ही पढ़ाई करनी पड़ रही है.
भाई-बहन चार, फोन सिर्फ एकगाजियाबाद में इंदिरापुरम के ज्ञान खंड III इलाके में रहने वाले 7वीं कक्षा के स्टूडेंट अरुण कनौजिया ने बताया कि उन्हें मैथ सब्जेक्ट पसंद नहीं है, लेकिन स्कूल में उनके टीचर्स उनकी मदद किया करते थे. अरुण चार भाई-बहन हैं. उन्होंने कहा,
“मेरे पिता एक जिम में काम करते हैं… वे सुबह 5 बजे घर से निकलते हैं और दोपहर 3 बजे वापस आते हैं. फिर मैं शाम 4:30 बजे तक पढ़ाई करता हूं, जिसके बाद मेरा भाई, जो 9वीं क्लास में है, फोन इस्तेमाल करता है… दिक्कत यह है कि मैं कॉन्सेप्ट्स को समझ नहीं पा रहा हूं. क्लास में, मैं हाथ उठाकर अपने डाउट्स क्लियर कर सकता था.”
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां बटन वाला फोन इस्तेमाल करती हैं. यह परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर का रहने वाला है.
'स्कूल ने काम ही नहीं दिया'इसी इलाके के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले तीन भाइयों को स्कूल बंद होने के बाद कोई काम नहीं मिला. उनके पिता राशिद (30) पेशे से पेंटर हैं. उन्होंने बताया,
"मेरा बड़ा बेटा (8वीं क्लास में) एक महीने तक रेगुलर पढ़ता रहा... अब इस 10 दिन की छुट्टी के बाद वह सब भूल जाएगा जो उसे सिखाया गया था."
यह परिवार बिहार के पूर्णिया का रहने वाला है. सबसे छोटे बच्चे की ओर देखते हुए (जो तीसरी कक्षा में है) राशिद ने पूछा,
"अगर वे अभी नहीं सीखेंगे, तो कब सीखेंगे? सर्दियों में जब प्रदूषण की वजह से स्कूल बंद होते थे, तो टीचर रात 10 बजे तक ऑनलाइन क्लास लेते थे... कभी-कभी तो आधी रात तक भी. लेकिन अगर उन्हें स्कूल से काम ही नहीं मिलेगा, तो वे क्या करेंगे?"
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BSA ने क्या बताया?बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि स्कूल खुद तय करते हैं कि ऐसे समय में पढ़ाई जारी रखने के लिए वे किस तरीके का इस्तेमाल करना चाहते हैं. इसमें ऑनलाइन क्लास, ऑनलाइन काम भेजना या छुट्टी शुरू होने से पहले ही काम देना शामिल हो सकता है. ओपी यादव ने बताया कि उन्होंने निर्देश दिए हैं कि होमवर्क दिया जाए ताकि हर बच्चा कुशल बने और छुट्टियों के बावजूद क्लास के हिसाब से सीखने का स्तर बना रहे.
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