प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने पूरे भारत में फैले कथित साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में एक वकील को गिरफ्तार किया है. इस नेटवर्क ने कथित तौर पर लगभग 28 हजार करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन किए. साथ ही करीब 2900 करोड़ रुपये नकद जमा कराए. इस कार्रवाई के बाद इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 7 हो गई. वकील को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में सवार होने से ठीक पहले गिरफ्तार किया गया.
28 हजार करोड़ का साइबर फ्रॉड, फ्लाइट में चढ़ने से पहले वकील को ईडी ने धर लिया
ED ने देशभर में फैले कथित साइबर फ्रॉड और ‘डिजिटल अरेस्ट’ नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक वकील को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान राशेश उपाध्याय उर्फ राशेष शाह के तौर पर हुई है. ED के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क से करीब 28 हजार करोड़ रुपये के बैंकिंग ट्रांजैक्शन जुड़े हैं और लगभग 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए.

ये कार्रवाई पणजी की ED टीम ने की है. गिरफ्तार वकील का राशेश उपाध्याय उर्फ राशेश शाह है. राशेश को खोजने में कस्टम और CISF ने ED की मदद की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राशेश को पणजी ले जाया गया है. उसे प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की एक स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने उसे 29 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेज दिया है.
कैसे शुरू हुई जांच?यह जांच तब शुरू हुई जब गोवा पुलिस ने 9 जून 2025 को एक FIR दर्ज की. ED के अनुसार, साइबर जालसाजों ने गोवा की एक महिला को कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और उसे धोखा देकर 21 मई से 2 जून, 2025 के बीच कई 'म्यूल अकाउंट्स' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते) में 2.60 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए. कोर्ट से उपाध्याय की हिरासत मांगते हुए ED ने बताया कि वह इस नेटवर्क का एक मुख्य हिस्सा था. एजेंसी का आरोप है कि जब पुलिस की शिकायतों के बाद साइबर क्राइम नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया तो उसने 'अंगड़िया' (नकद लेनदेन करने वाले लोगों का एक निजी नेटवर्क) के जरिए अधिकारियों को रिश्वत देकर उन खातों को अनफ्रीज करवा लिया.
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कहने को वकील, लेकिन कभी वकालत नहीं कीED का आरोप है कि उपाध्याय ने वकील के तौर पर रजिस्ट्रेशन तो कराया था, लेकिन उसने कभी भी किसी आरोपी या उनकी कंपनियों की ओर से कोर्ट में पेश होकर वकालतनामा दाखिल नहीं किया. एजेंसी के मुताबिक, गोवा की पीड़िता से ठगी गई रकम को 400 ऐसे म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया, जो कमोडिटी, ट्रैवल और फॉरेन एक्सचेंज कंपनियों के थे. इन कंपनियों को डमी डायरेक्टर्स (फर्जी डायरेक्टर्स) के जरिए चलाया जा रहा था.
बाद में, इन पैसों को कैश करा कर निकाल लिया गया. इसके RBI से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स के जरिए पैसों को विदेशी मुद्रा में बदल दिया गया. ED ने बताया कि इस कथित नेटवर्क से जुड़े खाते 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीड़ितों की 300 से अधिक शिकायतों और 160 से अधिक FIR में सामने आए हैं. कुल नुकसान 400 करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है. एजेंसी उन अधिकारियों की भी पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर रिश्वत ली थी. साथ ही, इसमें शामिल अंगड़ियों और बिचौलियों का पता लगाया जा रहा है. इस कथित अपराध से हासिल पूरी रकम का भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है.
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