बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने शायद पहली बार साफ-साफ नाम लेकर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर आजाद पर हमला बोला. उन्होंने चंद्रशेखर को एक तरह से ‘बीजेपी का एजेंट’ ही घोषित कर दिया. आरोप ये लगाया कि बीजेपी ने चुनाव में धांधली करके नगीना से चंद्रशेखर आजाद को चुनाव जितवा दिया, जहां उनका कोई जनाधार ही नहीं है. मायावती के इस बयान पर चंद्रशेखर ने कोई बहुत ‘तीखा’ जवाब तो नहीं दिया, लेकिन इशारों-इशारों में ‘अपनी पार्टी की बढ़ती ताकत’ का ताना जरूर मार दिया.
मायावती ने चंद्रशेखर आजाद को 'बीजेपी एजेंट' बोला, नगीना सांसद ने भी ताना मार दिया
मायावती ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने EVM में धांधली कर चंद्रशेखर आजाद को नगीना से जिताया, जबकि उनका वहां कोई जनाधार नहीं था.

चंद्रशेखर ने कहा कि मायावती ने जो आरोप लगाए, वो नगीना की जनता की भावनाएं आहत करती हैं. जनता ने उन्हें 5 लाख से ज्यादा वोटों से जिताया है. ये बयान वोटर्स के विवेक का अपमान है. उन्होंने ये भी कहा कि वो मायावती का हमेशा सम्मान करते हैं. इस बात से खुश भी हैं कि कल तक जो (मायावती) सियासत में चंद्रशेखर आजाद के अस्तित्व से ही इनकार करती थीं, उन्हें अब जनता ने बता दिया कि चंद्रशेखर कौन है. वो भी मानने लगीं कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) अब एक बड़ी ताकत बन गई है.
मायावती ने क्या कहा?सोमवार, 28 सितंबर को मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इसमें उन्होंने चुनाव में धांधली को लेकर बीजेपी पर कई आरोप लगाए. मायावती ने कहा कि बीजेपी के नेता चुनाव में ईवीएम पर रोक लगाने की बात कहते थे. उसी पार्टी की जब सरकार बनी तो उसने भी ईवीएम से ही वोटिंग और काउंटिंग जारी रखा. उन्होंने ईवीएम पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि बीएसपी ने हमेशा ही ईवीएम से वोटिंग का खुलकर विरोध किया है.
मायावती ने कारण बताया कि बीएसपी दलित, अति पिछड़े और जनरल कैटिगरी के गरीब लोगों की अकेली हितैषी पार्टी है. इस वर्ग के लोग बीएसपी के ही उम्मीदवारों को वोट देते हैं. लेकिन उनका वोट बीएसपी को न जाकर किसी और खाते में खुल जाता है. इससे उनका मतदान से भरोसा उठता जा रहा है. मायावती ने इसे समझाने के लिए सहारनपुर की नगीना सीट का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा,
इसका सबसे बड़ा उदाहरण ‘आजाद समाजवादी पार्टी’ का सांसद (चंद्रशेखर आजाद) है. नगीना लोकसभा सीट पर उनका कुछ भी जनाधार नहीं है. लेकिन फिर भी उसे षड्यंत्र के तहत, खासकर बीएसपी को नुकसान पहुंचाने के लिए बीजेपी ने ईवीएम में धांधली कराके चुनाव जितवा दिया. ऐसा वहां के लोगों का मानना है.
मायावती ने आगे कहा कि चंद्रशेखर आजाद बीजेपी के इशारों पर चलकर देश में हर उस जगह पहुंच जाते हैं, जहां खासतौर पर दलितों पर अन्याय या अत्याचार होता है. वहां अधिकारियों से बात करने के बजाय वो युवाओं को आगे करके धरना-प्रदर्शन करते हैं. इससे उन युवाओं के खिलाफ केस दर्ज हो जाता है, जिससे उन्हें सरकारी नौकरी भी नहीं मिल पाएगी. फिर ये लोग कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़कर पिछड़ते ही चले जाएंगे.
चंद्रशेखर ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ‘बहनजी’ ने जिसका भी लिखा प्रेस नोट पढ़ा हो लेकिन वह इस बात से खुश हैं कि जो लोग कभी कहते थे, ‘कौन चंद्रशेखर?’, उन्हें इस देश की जनता ने बता दिया कि हमारे लिए लड़ने वाला, सड़क पर संघर्ष करने वाला चंद्रशेखर कौन है. उन्होंने आगे कहा,
मुझे खुशी है कि अब माननीया बहनजी ने यह मान लिया है कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) एक बड़ी ताकत बन गई है. उनके प्रति मेरे मन में सदैव सम्मान रहा है.
उन्होंने कहा कि वह उसी सम्मान के साथ कहना चाहते हैं कि नगीना की जनता ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें 5 लाख 12 हजार 552 वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुना और इसके लिए वह जनता के ऋणी हैं. चंद्रशेखर के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया और EVM की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाना लोकतंत्र में सभी का अधिकार है. वह खुद भी चुनाव प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता और बैलट पेपर से चुनाव की मांग करते रहे हैं. लेकिन नगीना की जनता के जनादेश को किसी षड्यंत्र से जोड़ने से उन लाखों मतदाताओं की भावना भी आहत होती है, जिन्होंने अपने विवेक से मतदान किया.
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चंद्रशेखर ने कहा कि वह किसी व्यक्ति के विरोध पर आधारित राजनीति नहीं करते और उनके मन में बहनजी (मायावती) के लिए हमेशा सम्मान है. मतभेद हो सकते हैं लेकिन बहुजन समाज के बीच संवाद, सम्मान और भाईचारा बना रहना चाहिए. अंत में चंद्रशेखर ने मायावती को करेक्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का नाम आजाद समाज पार्टी है. ‘आजाद समाजवादी पार्टी’ नहीं.
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