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डीयू ने अपने सिलेबस से दिल्ली सल्तनत का पेपर हटाया, इस बड़े चेंज की वजह भी बताई

Delhi Sultanate DU syllabus: यूनिवर्सिटी ने पोस्ट ग्रेजुएशन छात्रों के लिए तीसरे सेमेस्टर में कुछ पेपर ड्रॉप किए हैं. इनमें दिल्ली सल्तनत भी शामिल है.

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दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 'दिल्ली सल्तनत' का पेपर उड़ा दिया. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने पोस्ट ग्रेजुएशन के सिलेबस से इतिहास के कुछ DSE पेपर्स को हटा दिया है, जिनमें दिल्ली सल्तनत से जुड़ा कोर्स भी शामिल है, इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन 7 अगस्त को जारी हुआ।
  • न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 के बाद सिलेबस में बदलाव और विभागीय संशोधनों के कारण कुछ कोर्सेस पर अविश्वास उत्पन्न हुआ, जिसने स्टैंडिंग कमिटी को समीक्षा के लिए प्रेरित किया।
  • कोर्सेस को हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया में विश्वविद्यालय की कई कमिटियाँ शामिल होती हैं, और अब इन बदलावों के कारण पोस्ट ग्रेजुएशन छात्रों के विकल्प सीमित होंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय ने नए सिलेबस में इतिहास से जुड़े कुछ पेपर्स को ड्रॉप कर दिया है. अब पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्रों के पास ‘दिल्ली सल्तनत’ से जुड़ा कोर्स चुनने का ऑप्शन ख़त्म हो गया है. दिल्ली सल्तनत भारत में 13वीं और 14वीं शताब्दी के शासन को दिखाता है. इसी के पतन के बाद मुगलों का दौर आया था. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्ट ग्रेजुएशन छात्रों के तीसरे सेमेस्टर में कुछ पेपर ड्रॉप किए गए हैं. इनमें दिल्ली सल्तनत, हिस्ट्री ऑफ़ नॉर्थ इंडिया 1400-1550 ईसापूर्व, जेंडर एंड वीमेन इन अर्ली इंडिया 1500 ईसापूर्व से 1000 ईस्वी तक, प्राचीन भारत में राजनीतिक प्रक्रियाएं और प्राचीन भारतीय साहित्य में धर्म और समाज जैसे विषय शामिल हैं. फाइनल सिलेबस का नोटिफिकेशन 7 अगस्त को जारी किया गया, जिसमें ये कोर्स शामिल नहीं थे. 

DU में कैसे हटाए जाते हैं कोर्स?

रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी विषय DSE का हिस्सा हैं. DSE माने 'डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव कोर्स' जो छात्र अपने मूल विषयों से हटकर किसी टॉपिक पर महारत हासिल करने के लिए पढ़ते हैं. 

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लेकिन इन कोर्स को हटाना इतना सरल नहीं है. जिस विभाग को अपना सिलेबस बदलना है वो कमिटी के ज़रिए एक प्रस्ताव रखता है. जिसके बाद ये प्रस्ताव पहले यूनिवर्सिटी की स्टैंडिंग कमिटी और फिर अकादमिक कॉउन्सिल तक पहुंचता है. अकादमिक कॉउन्सिल के मुहर लगाने के बाद एग्जीक्यूटिव कॉउन्सिल इसपर आखिरी हामी भरता है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले कुछ स्टेज में ये कोर्स शामिल थे जिन्हें आगे चलकर हटा दिया गया. यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग ने कुल 38 DSE विषयों का प्रस्ताव रखा था. इनमें से केवल 16 कोर्स ही फाइनल लिस्ट में शामिल हो पाए. बताया गया कि 2020 में न्यू एजुकेशन पॉलिसी आने के बाद यूनिवर्सिटी ने कई कोर्सेस में बदलाव किए हैं. 

क्यों हटाए गए कोर्स?

इंडियन एक्सप्रेस ने DU के डीन ऑफ़ अकादमिक अफेयर्स के. रत्नाबली से जवाब मांगा. उनके मुताबिक, किसी कोर्स को रोका नहीं गया गया है. उन्होंने बताया कि स्टैंडिंग कमिटी ने कोर्स अप्रूव कर दिया था, लेकिन बाद में विभाग ने कुछ बदलाव किए. इससे अविश्वास पैदा हुआ, इसलिए उन कोर्सेस की फिर से समीक्षा की जा रही है. दूसरी तरफ अखबार ने एक सूत्र के हवाले से लिखा कि कमिटी ने विभाग को कोर्स में कुछ बदलाव करने के लिए कहा था. 

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इससे पहले 2023 में भी यूनिवर्सिटी ने अंडरग्रेजुएशन छात्रों के कुछ पेपर्स के सिलेबस में बदलाव किया था. 

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दिल्ली सल्तनत के बारे में

दिल्ली सल्तनत की स्थापना 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी. ये लगभग 320 सालों तक भारत के बड़े हिस्से पर शासन करने वाली प्रमुख सल्तनत रही. दिल्ली सल्तनत में कुल पांच राजवंश रहे. शुरुआत गुलाम राजवंश से हुई, उसके बाद खिलजी, तुगलक और सय्यद आए. फिर अंत लोदी राजवंश से हुआ. दिल्ली सल्तनत के दौरान प्रशासन का केंद्रीकरण हुआ और फारसी राजकाज की प्रमुख भाषा बनी. 

इसी दौर में कुतुब मीनार, अलाई दरवाजा और तुगलकाबाद जैसी महत्त्वपूर्ण कृतियों का निर्माण हुआ. अलाउद्दीन खिलजी के बाज़ार सुधार, मुहम्मद बिन तुगलक की प्रयोगात्मक नीतियां और फिरोज शाह तुगलक के निर्माण कार्य इस काल की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं. 1526 में इब्राहिम लोदी की हार के साथ दिल्ली सल्तनत का अंत हुआ और भारत में मुगल शासन आया.

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