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'कांवड़' ग्रुप का नाम, बम AI से बनाया, ऑनलाइन आया सामान, दिल्ली ब्लास्ट की कहानी खुली

Delhi Red Fort blast NIA: NIA की चार्जशीट में पता चला है कि दिल्ली कार ब्लास्ट के आरोपी ChatGPT से मदद लेते थे और फ्लिपकार्ट से ऑनलाइन सामान मंगवाते थे. इसका इस्तेमाल बम बनाने के लिए किया जाता था. अब पूरी कहानी सामने आई है.

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दिल्ली लाल किला ब्लास्ट में NIA ने चार्जशीट में नई जानकारी दी है. (फाइल फोटो)

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  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली लाल किला ब्लास्ट मामले में चार्जशीट दायर की है जिसमें आरोप है कि मुख्य आरोपी जसीर बिलाल वानी ने बम बनाने के लिए AI और ChatGPT की मदद ली।
  • चार्जशीट के अनुसार आरोपियों ने व्हाट्सऐप और टेलीग्राम की जगह सिग्नल ऐप पर समूह बनाकर ऑपरेशन की योजना बनाई और दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 तक फ्लिपकार्ट से बम बनाने का सामान मंगाया।
  • NIA ने बताया कि इस आत्मघाती हमले से 13 लोगों की मौत हुई और आरोपियों का संबंध अल-क़ायदा के जुड़े अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद संगठन से है, जिसकी जांच आगे जारी रहेगी।

दिल्ली लाल किला ब्लास्ट में NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की चार्जशीट में नई जानकारी सामने आई है. NIA का दावा है कि नवंबर 2025 में हुए ब्लास्ट के एक मुख्य आरोपी ने बम बनाने के लिए AI का इस्तेमाल किया था. आरोप है कि उसने AI से बम बनाने की विधि सीखी और फ्लिपकार्ट से कुछ सामान मंगाए थे. ये भी बताया गया कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम की जगह सिग्नल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा था.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, NIA ने बताया कि आरोपी जसीर बिलाल वानी ने यूट्यूब पर भी कुछ वीडियो सर्च किए थे. सवाल पूछा- रॉकेट कैसे बनाएं? चीनी की मदद से रॉकेट कैसे बनाएं या पोटैशियम नाइट्रेट से रॉकेट कैसे बनाएं? इसके बाद IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने के लिए ChatGPT से मदद ली. चार्जशीट में जसीर को A-3 नाम दिया गया है. 

सिग्नल ग्रुप के बारे में क्या पता चला?

रिपोर्ट के मुताबिक, NIA का दावा है कि आरोपियों ने व्हाट्सऐप और टेलीग्राम की जगह सिग्नल ऐप पर एक ग्रुप बनाया था. इस ग्रुप में ऑपरेशन की प्लानिंग की जाती थी. आरोप है कि उन्होंने अपने ग्रुप्स के नाम "शोले", "गब्बर सिंह 1975" और "कावड़ यात्रा" रखे थे. NIA के मुताबिक, आरोपी इरफ़ान अहमद ने एक चैट में कहा कि भले ही ये ऐप्स ‘काफिरों’ ने बनाए हैं मगर एक्सपर्ट का कहना है कि यहां बातचीत सुरक्षित है.

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चार्जशीट के मुताबिक लाल किले के पास हुआ धमाका एक आत्मघाती हमला था. लाल किला के बाहर एक हुंडई i20 कार खड़ी थी जो उमर-उन-नबी चला रहा था. कार में हुए धमाके से 13 लोगों की मौत हो गई थी. उमर-उन-नबी कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला डॉक्टर था और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था. उमर को A-1 कहा गया है.

फ्लिपकार्ट से मंगाया बम का सामान

चार्जशीट में कहा गया है कि IED बनाने के लिए A-3 (वानी) ने दिसंबर, 2023 से जनवरी, 2024 के बीच अपने मोबाइल नंबर 9541813661 से रजिस्टर करके Flipkart से कई ज़रूरी सामान खरीदे. सामान खरीदने के लिए पैसे A-1 ने A-3 को दिए थे और A-3 ने सभी सामान कैश ऑन डिलीवरी पर खरीदे थे. 

बताया गया कि बम में इस्तेमाल होने वाले यूरिया के लिए आरोपियों ने घर पर ही यूरिन इकट्ठा किया था. A-1 एक पॉलीबाग में यूरिन इकट्ठा करता था और कमरे से  बाहर भी नहीं निकलता था. एक पेन ड्राइव भी जब्त की गई, जिसमें यूरिन से यूरिया बनाने की पूरी PDF पड़ी थी.

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आगे की जांच कैसे होगी?

लाल किला ब्लास्ट की जांच में NIA ने अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल की भूमिका पर भी फोकस किया है. अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) अल-क़ायदा से जुड़ा एक इस्लामी चरमपंथी संगठन है. आरोप है कि लाल किला धमाके के आरोपी इस संगठन के सदस्य थे. 

चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी लाल किले को भारत का प्रतीक मानते थे. A-1 के ठिकाने से जब्त किए गए हाथ से लिखे नोटों से साफ़ पता चलता है कि AGuH के सदस्य लोकतंत्र के ख़िलाफ़ थे और भारत में शरिया कानून लागू करना चाहते थे. इस धमाके की प्लानिंग भी करीब डेढ़ साल पहले से हो रही थी. 

वीडियो: दिल्ली ब्लास्ट का हमास से क्या कनेक्शन निकला?

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