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मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस गैस एजेंसी चलाते रहे, रिटायरमेंट के बाद खुली पोल

जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल पर जज रहते हुए BPCL की LPG एजेंसी चलाने का आरोप है. नियमों के उल्लंघन के कारण BPCL ने उनकी यह डीलरशिप सस्पेंड कर दी है. मामला सामने कैसे आया?

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जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

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  • जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल पर न्यायिक पद के दौरान बिना मंजूरी के भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की LPG एजेंसी चलाने का आरोप लगा है, जिससे उनकी डीलरशिप सस्पेंड कर दी गई है।
  • इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब LPG एजेंसी के पूर्व मैनेजर की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी मोनिका यादव ने एजेंसी का मालिकाना हक अपने नाम दर्ज कराने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की और मामले की जांच हुई।
  • BPCL द्वारा नोटिसों के बावजूद जवाब न मिलने पर उनकी डीलरशिप सस्पेंड की गई है, जबकि मोनिका यादव ने कोर्ट में BPCL की कार्रवाई में देरी के खिलाफ नई याचिका दायर की है।

दिल्ली हाई कोर्ट के जज और बाद में मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल एक बड़े विवाद में घिर गए हैं. उन पर जज रहते हुए ‘भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (BPCL) की LPG एजेंसी चलाने का आरोप है. जज जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए बिजनेस करना नियमों के खिलाफ है. इसी आधार पर BPCL ने जस्टिस मृदुल की LPG एजेंसी की डीलरशिप सस्पेंड कर दी है.

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क्या है पूरा मामला?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल ने 1986 में दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू की थी. उन्हें मार्च 2008 में दिल्ली हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया और अक्टूबर 2023 में वे मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने. आरोपों के मुताबिक, वे अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान भी ‘किचन फ्लैम’ नाम से LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप चलाते रहे.

बताते चलें कि जज अपने पद की शपथ और ज्यूडिशियल कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं, जो आम तौर पर उन्हें बिजनेस करने या PSUs, सरकारी संस्थाओं या प्राइवेट संस्थाओं में ऐसे पद रखने से रोकते हैं, जिनसे कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट (हितों का टकराव) हो सकता है. इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और ईमानदारी पर भी सवाल उठ सकते हैं.

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एग्रीमेंट बार-बार हुआ रिन्यू

'किचन फ्लेम' के लिए BPCL और जस्टिस मृदुल के बीच डिस्ट्रीब्यूटरशिप एग्रीमेंट को 25 अगस्त 1995, 24 अगस्त 2005, 23 अगस्त 2010, 25 अगस्त 2015, 7 मई 2025 और फिर पिछले साल 29 सितंबर को रिन्यू किया गया था, जिसकी वैलिडिटी 24 अगस्त 2030 तक है.

मामला सामने कैसे आया?

एजेंसी के पूर्व मैनेजर की मौत के बाद उनकी पत्नी मोनिका यादव ने दो महीने पहले दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की और डिस्ट्रिब्यूटरशिप का मालिकाना हक अपने नाम ट्रांसफर करने की मांग की. इसके बाद, दिसंबर 2025 में एक औपचारिक सार्वजनिक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि LPG एजेंसी के मौजूदा मालिक एक मौजूदा जज हैं.

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BPCL ने डीलरशिप सस्पेंड की

शिकायत के बाद, BPCL ने जस्टिस मृदुल को कई 'शो-कॉज नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) जारी किए. इन नोटिसों में आरोप लगाया गया कि उन्होंने जरूरी मंजूरी के बिना न्यायिक पद पर रहते हुए व्यापार करके सर्विस नियमों का उल्लंघन किया है. कोई जवाब न मिलने पर BPCL ने 6 जुलाई को उनकी डीलरशिप सस्पेंड कर दी. मोनिका यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक नई याचिका दायर की. इसमें उन्होंने BPCL की तरफ से कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है.

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