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दिल्ली में PG चलाते हैं या उसमें रहते हैं तो इस नए प्रस्तावित कानून के बारे में जान लीजिए

दिल्ली सरकार ‘PG Accommodation Regulation And Welfare Bill’ पर काम कर रही है. अगले 2 महीनों में इस बिल के प्रावधानों को पूरा किया जा सकता है. यह कदम Satya Niketan इलाके में हुए हादसे के बाद उठाया जा रहा है.

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सत्य निकेतन हादसे के बाद की एक तस्वीर (PTI)

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  • दिल्ली सरकार ने पीजी मालिकों के लिए लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और फायर सेफ्टी के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करने वाला 'पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल' प्रस्तावित किया है।
  • 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना में 7 लोगों की मौत के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर कम्युनिटी में PG रेगुलेशन की आवश्यकता महसूस हुई।
  • इस बिल के लागू होने के बाद PG से जुड़ी सारी जानकारी एक ऑनलाइन वेब पोर्टल पर उपलब्ध होगी और शिकायतों का त्वरित निपटारा करने के लिए संबंधित विभागों को सूचना दी जाएगी।

दिल्ली सरकार ने पीजी में रह रहे छात्रों की सुरक्षा के लिए एक ड्राफ्ट बिल का प्रस्ताव रखा है. इसका नाम ‘पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल’ रखा गया है. इसके तहत सभी ‘पेइंग गेस्ट’ यानी PG चलाने वालों को लाइसेंस लेना, रजिस्ट्रेशन कराना और संबंधित विभाग से स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य होगा.

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बीती 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला इमारत गिरने से 5 छात्र समेत 7 लोगों की मौत हो गई थी. इस बिल्डिंग में कई लोग पीजी के तहत ही रह रहे थे. हादसे के बाद अब सरकार ने ये प्रस्ताव रखा है. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य आला अधिकारियों के साथ मीटिंग की. बैठक में बिल्डिंग की सुरक्षा, छात्रों के रहने की सुविधा और PG के रेगुलेशन पर बात की गई. 

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PG रेगुलेशन बिल के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है. इसके चेयरमैन दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद को बनाया गया है. ड्राफ्ट बिल के हवाले से उन्होंने बताया, 

‘छात्रों की बढ़ती संख्या की वजह से प्राइवेट PG चलाए जा रहे हैं , जो एक अहम विकल्प बन गए हैं. एक औपचारिक इंटीग्रेटेड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क न होने की वजह से मनमाना किराया लिया जा रहा है. रहने की अच्छी व्यवस्था और सुरक्षा के बेहतर इंतजाम न होने जैसी मुश्किलें भी शामिल हैं. साथ ही छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रभावी सिस्टम न होने जैसी भी समस्याएं सामने आई हैं.’

आशीष ने अखबार को बताया कि अगले 2 महीनों में बिल के प्रावधान पूरे हो जाएंगे. बिल को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. इसके अलावा ड्राफ्ट में एक ‘Govt PG’ ऑनलाइन वेब पोर्टल बनाने की भी बात है. इसमें सभी रजिस्टर्ड PG की जानकारी को अपलोड किया जाएगा, जो जानकारियों और शिकायतों के लिए ‘वन-स्टॉप हब’ के तौर पर काम करेगा. ड्राफ्ट में मेंशन किया गया कि हर PG का अपना एक रजिस्ट्रेशन नंबर होगा, जिसे वेब पोर्टल पर लिस्ट करना होगा. 

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सभी मालिकों को अपने PG से जुड़ी सभी जानकारियों को हरेक महीने वेब पोर्टल पर अपडेट करना होगा. इसमें छात्रों की संख्या, किराए में बदलाव और ऑडिट से जुड़ी बातों को बताना होगा. इसके अलावा छात्र बिना अपनी पहचान बताए पोर्टल पर अपनी शिकायतों को बता सकते हैं. अगर पोर्टल पर कोई शिकायत आती है, तो पोर्टल से संबंधित जोन अथॉरिटी और इंस्टीट्यूशनल अकोमोडेशन कमेटी को इसकी सूचना देगा. 

इसके अलावा कॉलेज, यूनिवर्सिटीज और कोचिंग इंस्टिट्यूट्स को एक ‘इंस्टिट्यूशनल अकोमोडेशन कमिटी’ बनानी होगी. कमेटी में 2 फैकल्टी मेंबर, 2 छात्र संघनेता, NSS या NCC से 1, वार्ड-लेवल का म्युनिसिपल ऑफिसर और 1 पुलिस लाइजन ऑफिसर शामिल होंगे. PG को सभी एंट्री गेट और कॉमन एरिया में CCTV लगाने होंगे. साथ ही उनके फुटेज को कम से कम 30 दिन तक रखना होगा. 

इसके अलावा जिस PG में 15 से ज्यादा छात्र रहते हैं, उन्हें रात में एक लाइसेंस्ड सिक्योरिटी गार्ड रखना होगा. सभी PG को एक वार्डन रखना होगा, जो 500 मीटर के भीतर में रहता हो या उसका ऑफिस हो. वार्डन के पास एक डेडिकेटेड मोबाइल नंबर हो, जिस पर किसी भी इमरजेंसी सिचुएशन में बात की जाए. और वो 15 मिनट के भीतर पहुंच जाए. 

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देशभर से हजारों छात्र दिल्ली में पढ़ने आते हैं. मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, मुनिरका और नॉर्थ व साउथ कैंपस के आस-पास करीब 2 लाख कमरे, प्राइवेट हॉस्टल या PG के तौर पर रेंट पर दिए जाते हैं. बावजूद इसके पुलिस, फायर डिपार्टमेंट या MCD के पास इन बिल्डिगों उनके मालिकों और किराएदारों का कोई रिकॉर्ड नहीं है. 

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