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मायावती ने भतीजे आकाश आनंद के ससुर को चेतावनी दी, बोलीं- 'पूरी तरह संन्यास लो वर्ना...'

Mayawati Akash Anand BSP return: आकाश आनंद के बहुजन समाज पार्टी (BSP) में वापस आने के चांस हैं. लेकिन इसके लिए मायावती ने एक शर्त रखी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर शर्त के बारे में बताया है.

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मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को 3 सितंबर, 2026 को पद से हटा दिया गया था.

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  • मायावती ने कहा है कि आकाश आनंद को बहुजन समाज पार्टी में वापस लाने से पहले पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेना होगा, तभी उनकी जिम्मेदारियां लौटाने पर विचार होगा।
  • बसपा प्रमुख मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर निजी और पारिवारिक स्वार्थ को महत्व देने का आरोप लगाया है, जिसके कारण पार्टी में आकाश आनंद की स्थिति प्रभावित हुई है और अनुशासनिक कार्रवाई की गई।
  • यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लेते हैं, तो आकाश आनंद को पार्टी में उनकी जिम्मेदारियां पुनः सौंपे जाने की संभावना है, जिससे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के विधानसभा चुनावों की तैयारी प्रभावित हो सकती है।

मायावती अपने भतीजे आकाश आनंद को बहुजन समाज पार्टी (BSP) में वापस लाने के लिए तैयार हैं. लेकिन उन्होंने एक शर्त रख दी है. शर्त यह कि अगर पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लेते हैं, तो आनंद को उनकी जिम्मेदारियां फिर देने पर विचार किया जाएगा. 

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अशोक सिद्धार्थ की बेटी डॉ. प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी 2023 में आकाश आनंद से हुई थी. लेकिन अब मायावती चाहती हैं कि अशोक संन्यास ले लें. उनका कहना है कि पूर्व सांसद ने अपने ‘निजी स्वार्थ’ के लिए काम किया है. इसका खामियाजा कोई और भुगत रहा है.

बुधवार, 9 अगस्त को बसपा प्रमुख ने एक एक्स पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव अब बहुत नजदीक हैं. पार्टी डॉ. भीमराव आंबेडकर के 'शोषित से शासक वर्ग' बनने के सपने को पूरा करने के लिए तन-मन-धन से जुटी है.

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‘सुधरने के एक नहीं, कई मौके दिए’ 

उन्होंने आगे लिखते हुए ’बहुजन मूवमेन्ट’ और आरक्षण आदि मुद्दों को लेकर खड़ी चुनौतियों का जिक्र किया. कहा कि दलित समाज के लोगों को निजी या पारिवारिक स्वार्थ में ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए, जो रुकावट बने और इतिहास उन्हें माफ ना कर पाए.

उन्होंने आगे कहा,

“भूले-भटके हुए लोगों को उनके आचार-व्यवहार आदि को ध्यान में रखकर पार्टी में शामिल किया जा रहा है. जो लोग इसकी राह में थोड़ा भी रुकावट बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जा रही है. इसका चर्चित उदाहरण है पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ. पार्टी ने इनको सुधरने के एक नहीं बल्कि कई बार मौके दिए. लेकिन उन्होंने मिशन से ज्यादा अपने निजी और पारिवारिक स्वार्थ को महत्व दिया. इसका खामियाजा उनके साथ दामाद आकाश आनंद को भी भुगतना पड़ा है.”

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मायावती ने आगे लिखा कि उन्होंने अपने निजी स्वार्थ में आकाश आनंद और बीएसपी मूवमेंट की भी परवाह नहीं की. बसपा प्रमुख ने कहा,

"अशोक के पास अब भी मौका है कि वह अपनी राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें. तभी आकाश आनंद का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा. तभी पार्टी उन्हें उनकी जिम्मेदारियां वापस देने के बारे में सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी. ऐसी पार्टी में आम राय है."

दैनिक भास्कर से बात करते हुए अशोक ने कहा कि राजनीति से संन्यास बहुत छोटी चीज है. बहनजी का आदेश हो तो मैं अपनी जान दे दूंगा.

मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को 3 सितंबर को पद से हटा दिया था. मायावती ने कहा था कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और ज्यादा परिपक्व होने की जरूरत है.

पहले आकाश आनंद के सोशल मीडिया प्रोफाइल बायो में लगातार चेंज देखने को मिल रहा था. माने कि पहले खुद को कार्यकर्ता और बाद में समर्थक बताना. पार्टी पदाधिकारियों को भी आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करने के निर्देश दिए गए थे. 

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी खबर आई थी कि दिल्ली के यूट्यूबर समरराज के आकाश आनंद से जुड़े दो पोस्ट में से एक को सांसद अशोक ने रीट्वीट किया था. यह जानकारी किसी ने मायवती तक पहुंचाई. इसके बाद उन्होंने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय के प्रभारी मेवालाल गौतम को दोनों नेताओं को अनफॉलो करने के निर्देश दिए.

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खबर ये भी है कि मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद को राजनीति में आगे लाया जा सकता है. उन्हें मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाए जाने की चर्चाएं भी तेजी से चल रही हैं.

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