सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट यानी ACP को फटकार लगाई है. वजह बना एक छात्र, जिसे 5 लाख रुपये का बॉन्ड भरने का नोटिस दे दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका था कि CJP प्रदर्शन से जुड़े मामलों में छात्रों के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई नहीं होगी. इसके बावजूद नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया? इसी सवाल पर CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान सख्त नाराजगी जताई और संबंधित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से जवाब मांगा है.
मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई... प्रोटेस्ट में शामिल छात्र को 5 लाख का नोटिस भेजने पर SC ने फटकारा
1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने CJP के जुलाई में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी FIRs को रद्द करने का आदेश दिया था. इसके बावजूद यूपी के नोएडा में 4 सितंबर को ही अक्षत त्रिपाठी को 5 लाख रुपये के बॉन्ड वाला नोटिस जारी हो गया. अब CJI सूर्यकांत ने एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई है.

मामला गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है. उन्हें CJP प्रदर्शन में छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने और भीड़ जुटाने के आरोप में ये नोटिस भेजा गया था. 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से ये नोटिस जारी किया गया. इसमें उनसे छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी बॉन्ड और इतनी ही रकम की दो जमानत देने को कहा गया था. हालांकि बाद में नोटिस वापस ले लिया गया.
9 सितंबर को इस केस की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया था कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. ऐसे में किसी मजिस्ट्रेट की ओर से इस तरह का नोटिस जारी किया जाना हैरान करने वाला है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी से इस पर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा.
अक्षत त्रिपाठी गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में सेकेंड ईयर के लॉ स्टूडेंट हैं. 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट-3 ने उन्हें एक नोटिस भेजा. ये नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 130 के तहत जारी किया गया. यह कार्रवाई ईकोटेक-1 थाने के एक सब-इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई है.
यूपी पुलिस की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक ग्रेटर नोएडा में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट-3 (Executive Magistrate III) का पद असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP-3), ग्रेटर नोएडा संभालते हैं. जिन्हें पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी गई हैं. वर्तमान में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के ACP-3 डॉ. रवि शंकर हैं.
पुलिस की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि अक्षत यूनिवर्सिटी के दूसरे छात्रों को सरकार विरोधी और भ्रामक बातें बताकर उन्हें CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे. पुलिस ने इसे शांति और कानून-व्यवस्था के लिए संभावित खतरा बताया था.
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अक्षत और CJP ने क्या बताया?अक्षत ने इन आरोपों को खारिज किया. उनका कहना था कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था. उन्होंने ये भी कहा कि उस समय यूनिवर्सिटी करीब तीन महीने से बंद थी, इसलिए उनके खिलाफ छात्रों को भड़काने का आरोप ही सवालों के घेरे में है. अक्षत का दावा है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वो घायल भी हुए थे.
अक्षत त्रिपाठी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं. इसलिए इस नोटिस पर SFI ने आपत्ति जताई थी. CJP के को-कन्वीनर सौरभ दास ने भी इस पर सवाल उठाए थे. मामला बढ़ा तो पुलिस ने नोटिस वापस ले लिया. लेकिन इसी बीच ये पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया.
दरअसल, 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने CJP के जुलाई में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी FIRs को रद्द करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने ये भी साफ किया था कि छात्रों के खिलाफ इन प्रदर्शनों के सिलसिले में नई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. इसके बावजूद 4 सितंबर को ही अक्षत त्रिपाठी को 5 लाख रुपये के बॉन्ड वाला नोटिस जारी हो गया.
वीडियो: 5 सितम्बर को होने वाला प्रोटेस्ट मार्च CJP ने किया रद्द, सुप्रीम कोर्ट में क्या बताया?













