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दिल्ली में महंगी होगी बिजली, जून का बिल बढ़कर आएगा

Delhi Electricity Hike: दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने बिजली कंपनियों को बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बिल में जोड़ने की मंजूरी दे दी है. इसका असर जून में आने वाले बिजली बिल पर दिखाई देगा.

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दिल्ली में बिजली महंगी होने वाली है. (सांकेतिक फोटो: इंडिया टुडे)

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  • दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने बिजली कंपनियों को PPAC सरचार्ज बढ़ाने की मंजूरी दी है, जिसका असर जून महीने के बिजली बिलों में 1% से 3.5% तक देखा जाएगा।
  • पश्चिम एशिया में तनाव और ईंधन के दाम बढ़ने की वजह से बिजली उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है, जिसके कारण बिजली कंपनियों ने इसका अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए PPAC बढ़ाया है।
  • बढ़ी हुई PPAC के कारण ज्यादा बिजली खर्च करने वालों के बिल में увеличение होगा, जबकि सरकारी सब्सिडी लेने वाले अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं पड़ने की उम्मीद है।
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सुशांत मेहरा

राजधानी दिल्ली में बिजली महंगी होने वाली है. दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने बिजली कंपनियों को बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बिल में जोड़ने की मंजूरी दे दी है. इसका असर जून में आने वाले बिजली बिल पर दिखाई देगा. हालांकि, हर उपभोक्ता पर इसका असर नहीं पड़ेगा. सरकारी सब्सिडी लेने वाले ज्यादातर घरों को राहत रहेगी, जबकि ज्यादा बिजली खर्च करने वालों को ज्यादा बिल देना पड़ सकता है.

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किन लोगों पर असर नहीं पड़ेगा?

दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी लेने वाले ज्यादातर घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं होगा. जिन घरों में हर महीने 200 से 500 यूनिट तक बिजली खर्च होती है और सब्सिडी के दायरे में आते हैं, उन्हें PPAC की वजह से ज्यादा बिल नहीं देना पड़ेगा. इसकी वजह यह है कि सरकार की सब्सिडी बिल की रकम के आधार पर नहीं, बल्कि खर्च हुई बिजली की यूनिट के आधार पर मिलती है.

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किसका बिल बढ़ सकता है?

जो लोग ज्यादा बिजली इस्तेमाल करते हैं या जिन्हें सरकारी सब्सिडी नहीं मिलती, उनके बिजली बिल में अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकता है. ऐसे उपभोक्ताओं के बिल में लगभग 1 से 3.5 फीसदी तक अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. 500 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है.

क्या बदला है?

दिल्ली में तीन बिजली वितरक कंपनियां हैं. बीएसईएस राजधानी (BRPL), बीएसईएस यमुना (BYPL) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन (TPDDL). दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने इन तीनों कंपनियों को अप्रैल 2026 के लिए पीपीएसी (PPAC) नाम का सरचार्ज लेने की मंजूरी दी है. पहले यह चार्ज हर तीन महीने में तय होता था, लेकिन अब इसकी समीक्षा हर महीने होगी.

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PPAC क्या होता है?

घरों तक बिजली पहुंचाने से पहले कंपनियां उसे अलग-अलग बिजली उत्पादन कंपनियों से खरीदती हैं. अगर कोयला, गैस या दूसरे ईंधन महंगे हो जाते हैं, तो बिजली खरीदने की लागत भी बढ़ जाती है. इसी बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा उपभोक्ताओं से वसूलने के लिए PPAC यानी ‘पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट’ लगाया जाता है.

किस कंपनी के उपभोक्ताओं पर कितना शुल्क?

डीईआरसी ने अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग दरें तय की हैं.

-BRPL (दक्षिणी दिल्ली): पुराना बेस रेट 14.51% था, जिसे बढ़ाकर 17.94% किया गया (3.43% की बढ़ोतरी).

-BYPL (पूर्वी और मध्य दिल्ली): पुराना बेस रेट 11.71% था, जिसे बढ़ाकर 17.43% किया गया (5.72% की बढ़ोतरी).

-TPDDL (उत्तर व पश्चिम दिल्ली): पुराना रेट 15.99% था, जिसे बढ़ाकर 16% किया गया (0.01% की नाममात्र बढ़ोतरी).

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(फोटो: DERC)

PPAC बढ़ने से बिजली के फाइनल बिल पर 1% से 3.30% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

नया नियम क्या है?

डीईआरसी ने एक नया प्रावधान भी लागू किया है. इसके तहत अगर किसी महीने पूरा PPAC नहीं वसूला जा सका, तो बची हुई रकम अगले महीनों के बिल में थोड़ा-थोड़ा करके जोड़ी जा सकेगी. यानी कंपनियां एक साथ बड़ा बोझ डालने के बजाय बाद में किस्तों में यह रकम वसूल सकेंगी.

यह फैसला क्यों लिया गया?

बिजली वितरण कंपनियों को बिजली खरीदने के बाद उत्पादन कंपनियों को समय पर भुगतान करना पड़ता है. अगर उन्हें बढ़ी हुई लागत का पैसा समय पर नहीं मिलता, तो उन पर आर्थिक दबाव बढ़ता है और उन्हें ब्याज भी देना पड़ सकता है. समय पर PPAC लेने से यह अतिरिक्त ब्याज का बोझ कम होगा.

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बिजली विशेषज्ञ ने उठाए सवाल

बिजली मामलों के जानकार बी.एस. वोहरा का कहना है कि डीईआरसी ने पहले बिजली कंपनियों को अधिकतम 10 फीसदी तक ही PPAC लगाने की अनुमति दी थी. उनका आरोप है कि कंपनियां इससे ज्यादा वसूली की कोशिश करती हैं और बिना नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट के भी उन्हें मंजूरी मिल जाती है.

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं पर करीब 38,500 करोड़ रुपये के 'रेगुलेटरी एसेट्स' का बोझ भी है. यह वह रकम है, जिसे बिजली कंपनियां अभी तक पूरी तरह वसूल नहीं कर पाई हैं और भविष्य में इसे भी उपभोक्ताओं से लिया जा सकता है. उनका मानना है कि दिल्ली सरकार को इस पूरे मामले की विस्तार से समीक्षा करनी चाहिए.

बिजली मंत्री क्या बोले?

दिल्ली सरकार में बिजली मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सब्सिडी लेने वालों पर इसका असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि देश के कानून में PPAC बढ़ाने का प्रावधान है. इसलिए डीईआरसी ने PPAC बढ़ाया है. मंत्री आशीष ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के चलते ईंधन के दाम बढ़ रहे है. इसी वजह से बिजली कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं.

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