ऑफिस से दो-चार दिन समय से 10-15 मिनट पहले निकल जाइए. फिर देखिए. कोई न कोई ‘नो डाउट’ आपको टोक ही देगा. कह दिया जाएगा कि ‘क्या भाई इतनी जल्दी कहां निकल जाते हो?’ अगर आप एक हफ्ता, दो हफ्ता या एक महीना भी एक्स्ट्रा रुककर ऑफिस में काम करेंगे या अपनी छुट्टियों के बीच कोई टास्क पूरा करेंगे तो माना जाएगा कि आप ही सबसे काबिल एंप्लॉई हैं. भारत में अब भी कई ऑफिस में ‘एक्स्ट्रा वर्क’ या फिर बीमारी में काम करने को ‘लगन’ माना जाता है. कहा जाता है कि ये इंसान अपने काम को लेकर काफी डेडिकेटेड है लेकिन दुनिया के कुछ देशों में वर्क कल्चर काफी अलग है. या कहें कि उल्टा ही है. वहां आपको छुट्टी कैंसिल करके काम करने पर डांट पड़ सकती है. ये कहा जा सकता है कि ज्यादा काम करके आप जूनियर्स को क्या सिखाएंगे?
भारतीय नॉर्वे जाकर रात-दिन काम कर रहा था, बॉस ने बुरी तरह सुना डाला!
India Norway work culture: नॉर्वे में काम कर रहे एक भारतीय कर्मचारी ने बताया कि छुट्टी रद्द कर प्रोजेक्ट पूरा करने पर बॉस ने उनकी तारीफ नहीं, बल्कि डांट लगाई. इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भारत और नॉर्वे के वर्क कल्चर, ओवरवर्क और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस छिड़ गई.


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक शख्स ने ऐसा ही एक किस्सा शेयर किया है. उसने बताया कि जब वो नॉर्वे काम करने के लिए गया तो भारत में जैसे काम करता था उन तरीकों के साथ ही गया था. उसे लगा कि वहां भी अगर वो ज्यादा काम करेंगे तो वाहवाही मिलेगी. लेकिन उनके साथ उल्टा हो गया. विनोद नाम के इस यूजर ने लिखा,
मैं 15 साल पहले नॉर्वे आ गया था. भारत के काम करने के तौर-तरीकों के साथ. माने वीकेंड वर्क, लंच स्किप करना. देर तक काम करना और जब ठीक महसूस नहीं हो रहा, तब भी खुद पर जोर डालकर काम करना. फिर एक दिन नॉर्वे के मेरे शुरुआती दिनों में मेरे बॉस ने मुझे बुलाया. मुझे लगा कि मेरी तारीफ होगी. लेकिन बॉस ने कहा कि तुमने शनिवार को मेरे ईमेल का जवाब दिया और बिना मुझे बताए एक प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अपनी छुट्टियां कैंसिल कर दीं?
छुट्टियां कैंसिल करने पर विनोद के बॉस ने उनसे सवाल कर डाला कि इससे उनके जूनियर्स क्या सीखेंगे? विनोद ने लिखा,
बॉस ने कहा कि मैं जानता हूं कि तुम्हारी नीयत अच्छी थी लेकिन ये ठीक नहीं है. छुट्टी लेना जरूरी है. इसे कभी मत छोड़िए. आपके जूनियर्स आपको देख रहे हैं. अगर वे ऐसा देखेंगे तो उन्हें लगेगा कि डेडिकेशन का मतलब यही है.
यूजर ने आगे लिखा,
मुझे डांट पड़ी. बहुत ज्यादा काम करने के लिए. मैं वहां उलझन में बैठा रहा. भारत में शायद इसके लिए मुझे "बहुत ज्यादा डेडिकेटेड" कहा जाता. यहां ये एक दिक्कत थी. उस दिन मेरे अंदर कुछ टूट गया. इसने मुझे उस भागदौड़, बेचैनी और हर समय काम में जुटे रहने की जरूरत को समझने पर मजबूर किया. पहली बार मैं उन चीजों के बारे में सोचकर रो पड़ा जो मैंने चुपचाप खो दी थीं.
आखिर में उन्होंने अपने फॉलोअर्स से सवाल किया आज आपके लिए बॉस और कॉर्पोरेट कल्चर कैसा है?
वर्क कल्चर को लेकर छिड़ी बहसपोस्ट कई लोगों को पसंद आया लेकिन इसने ‘वर्क कल्चर’ को लेकर भी सोशल मीडिया पर एक बहस छेड़ दी. राहुल नाम के एक यूजर ने कहा,
भारत में सिखाया गया है कि अगर आप ज्यादा काम करेंगे तो रिस्पेक्ट ज्यादा मिलेगी. ये मानसिकता यहां कभी नहीं बदलने वाली. लेकिन उन देशों की तारीफ करनी होगी, जो वकाई में वर्क लाइफ बैलेंस की परवाह करते हैं.

करुष नाम की यूजर ने छुट्टी ना मिलने के किस्से को बताते हुए लिखा,
एक दिन मुझे तेज बुखार था. जब मैंने कहा कि मुझे जाना है तो मेरे बॉस ने मुझे जाने से पहले दो काम पूरे करने को कहा. उसी दिन मुझे अस्पताल में एडमिट होना पड़ा. तब भी मेरी आधे दिन की सैलरी काट ली गई. मेरे लिए यह पैसे की बात नहीं थी. यह इंसानियत की बात थी.

एक यूजर ने लिखा,
अंग्रेज तो बहुत पहले भारत छोड़कर चले गए, लेकिन खुद को 'बॉस' समझने वालों की ब्रिटिश मानसिकता आज भी वैसी ही है. वे जूनियर्स के साथ गुलामों जैसा बर्ताव करते हैं.

कई यूजर्स ने माना कि भारत में जरूरत से ज्यादा काम करने को अब भी लगन माना जाता है. और यहां ये जल्द बदलने वाला नहीं है.
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