दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया था. इसमें देश भर से छात्रों ने हिस्सा लिया. गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करने वाले MBA ग्रेजुएट इरशाद शेख भी मार्च में शामिल हुए. वो पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के लाठीचार्ज और आंसू गैस कार्रवाई की चपेट में आए थे.
CJP प्रोटेस्ट: इरशाद पर किस चीज से फायर हुआ? शरीर पर छर्रे ही छर्रे, पूरी कहानी बताई
Cockroach Janata Party के ‘संसद मार्च’ के दिन Irshad Shaikh नाम का एक MBA ग्रेजुएट बुरी तरह से घायल हो गया. अब उन्होंने उस दिन हुई ‘पुलिसिया कार्रवाई’ पर खुलकर अपनी बात रखी है.

लेकिन इरशाद को जिस तरह की चोटें आईं उसने पुलिस और RAF की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए. इरशाद के चेहरे और सीने के आसपास ऐसे जख्म थे जैसे छर्रे लगने पर होते हैं. चेहरे के अलावा उनकी आंखों और गर्दन पर भी छर्रे जैसी चोटों के दर्जनों निशान मिले. इरशाद ने दावा किया कि ये जख्म उन्हें ‘पैलेट गन’ से मिले हैं.
घायल इरशाद इस समय लेडी हार्डिंग अस्पताल के ENT वार्ड में भर्ती हैं. उनकी सर्जरी हो चुकी है. परिवार दूसरे शहर में है. एक दोस्त उनकी देखभाल के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहा है. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पीड़ित युवक ने ‘संसद मार्च’ में पुलिस और RAF की कार्रवाई को लेकर कई दावे किए.
इरशाद ने बताया कि 20 जुलाई की सुबह 9 बजे से 11 बजे तक वो प्रोटेस्ट साइट पर मौजूद थे. इसके बाद उन्होंने ऑफिस की एक मीटिंग अटैंड की. मीटिंग के बाद वो वापस प्रोटेस्ट में शामिल होने पहुंच गए.
इरशाद ने बताया कि जब वो अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ चल रहे थे, तभी पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया. इससे लोग तितर-बितर होने लगे. बाद में आंसू गैस के गोले भी दागे गए. इरशाद ने उस दिन को याद करते हुए कहा,
'आंसू गैस से मेरी आंखों में बहुत जलन होने लगी. कुछ पल के लिए सब कुछ काला पड़ गया. जब मैंने पीछे देखा, तो पुलिस की बैरिकेडिंग थी. मैं आगे बढ़ा और पुलिस वालों से कहने लगा कि सर हमें मत मारिए. हम स्टूडेंट्स हैं. इस देश के नागरिक हैं. हम कोई आतंकवादी नहीं.'
इरशाद ने दावा किया कि इतना कहने के बावजूद एक RAF का जवान उनके सामने आया और मुंह पर बंदूक तान दी. उन्होंने कहा,
'पहले मुझे लगा कि वो सिर्फ डरा रहा है, लेकिन अचानक उसने मेरी तरफ बंदूक तानी और फायर कर दिया. कुछ समय के लिए ऐसा लगा, जैसे सब कुछ शांत हो गया हो.'
उन्होंने आगे बताया,
'मेरे चेहरे पर कई छोटे-छोटे छर्रे लगे. मुझे पहले एक बहुत अजीब सी बदबू महसूस हुई. फिर आंख के पास तेज दर्द हुआ. छर्रे मेरी आंख, गाल, नाक, गर्दन, कंधे और सीने तक में लग गए थे. जब मैंने चेहरे पर हाथ लगाया, तो खून बहने को महसूस किया.’
इरशाद ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से कोई चेतावनी या सायरन नहीं बजाया गया था. कुछ लोगों ने चेहरे से निकलते खून को रोकने के लिए उस पर कपड़ा रखा और उन्हें अस्पताल पहुंचाया. सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड में उनका इलाज हुआ. बाद में जनरल वार्ड में भर्ती किया गया. इरशाद के मुताबिक डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनके 'चेहरे, आंख और गर्दन में कई छर्रे फंसे' हुए हैं.

21 जुलाई को दोपहर में ENT विभाग के डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया. डॉक्टरों ने उन्हें यह भी बताया कि एक छर्रा उनकी आंख की मांसपेशियों के पास फंसा था. अगर उसे सही समय पर नहीं निकाला जाता, तो उसका असर आंख पर पड़ सकता था. दूसरा छर्रा उनकी गर्दन में एक बड़ी नस और खून की नली के पास था. तीसरा छर्रा नाक के अंदर चेहरे की हड्डी के पास फंसा हुआ था.
हालांकि, इरशाद के इन दावों से इतर दिल्ली पुलिस कुछ और कह रही है. पुलिस ने इस बात से इनकार कर दिया है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था. CRPF की ओर से भी इस सवाल का जवाब नहीं मिला है कि इरशाद को ये ‘छर्रे’ कैसे लगे. अस्पताल प्रशासन की ओर से भी यह अब तक साफ नहीं किया गया कि इरशाद को लगी चोट पैलेट गन के छर्रे से लगी है या नहीं.
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