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आवारा कुत्तों वाले फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में फिर से विचार, CJI गवई ने इशारा तो यही दिया है

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सीजेआई ने विचार करने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि दूसरी पीठ ने इस पर फैसला दे दिया है लेकिन वह इस मामले को देखेंगे.

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सीजेआई गवई ने कहा कि आवारा कुत्तों वाला मामले को वह देखेंगे (India Today)

आवारा कुत्तों को शेल्टर्स में भेजने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सीजेआई बीआर गवई विचार करेंगे. एक पुरानी याचिका पर सुनवाई के दौरान इसका जिक्र आने पर उन्होंने कहा कि दूसरी पीठ ने इस पर फैसला दे दिया है लेकिन वह इस मामले को देखेंगे. हालांकि, उन्होंने इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया है. बीती 11 अगस्त को जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने आदेश दिया था कि दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने का काम तुरंत शुरू किया जाए और उन्हें शेल्टर्स में शिफ्ट किया जाए.

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इस फैसले का समाज के अलग-अलग हिस्सों से विरोध हो रहा है. डॉग लवर्स से लेकर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं तक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अव्यवहारिक बताया है. 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार, 13 अगस्त को कुत्तों के नसबंदी कार्यक्रम को लेकर एक पुरानी याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील ननिता शर्मा ने यह मुद्दा सीजेआई गवई के सामने उठाया. उन्होंने कहा कि पर्याप्त फंड जारी होने के बाद भी एमसीडी एनसीआर इलाके में कुत्तों की संख्या में कमी लाने में विफल रहा. अगर प्रोग्राम के लिए जारी पैसे का सही इस्तेमाल करते हुए कुत्तों के नसबंदी का कार्यक्रम ठीक से चलाया गया होता तो सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश की जरूरत नहीं पड़ती. शर्मा ने आगाह किया कि कुत्तों को शेल्टर्स में शिफ्ट करने से वहां बीमारियां बढ़ सकती हैं, जिसका संक्रमण इंसानों में भी फैलने का खतरा होगा.

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शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि ‘कुत्तों की अंधाधुंध हत्या नहीं की जा सकती और सभी जीवों के प्रति करुणा होनी चाहिए.'

सर्वोच्च अदालत के इन दो विरोधाभासी फैसलों पर ध्यान दिलाते हुए शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश गवई से आग्रह किया कि 11 अगस्त के कुत्तों को शेल्टर्स में शिफ्ट करने के मामले को सूचीबद्ध किया जाए ताकि कोर्ट ये तय कर सके कि इस विवाद को एक बड़ी पीठ को सौंपकर सुलझाया जाए या नहीं? 

इस पर सीजेआई ने कहा, ‘(जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की) दूसरी पीठ ने पहले ही आदेश पारित कर दिया है. मैं इस पर गौर करूंगा.’

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