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LPG की कमी हुई तो चूल्हे पर पकाया मिड-डे मील, प्रिंसिपल सस्पेंड; अब HC ने फैसला सुनाया

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के एक स्कूल का ये मामला है. प्रिंसिपल ने गैस सिलेंडरों की कमी चलते लकड़ी के चूल्हे पर मिड-डे मील बनवाया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने Allahabad High Court का दरवाजा खटखटाया.

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हेड मास्टर इस मामले को हाई कोर्ट तक लेकर गए (सांकेतिक फोटो: इंडिया टुडे)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक स्कूल के हेडमास्टर के निलंबन पर रोक लगा दी. मामला उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले का है. हेडमास्टर ने गैस सिलेंडरों की कमी चलते लकड़ी के चूल्हे पर मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) बनवाया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उस आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत उन्हें निलंबित किया गया था.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस मंजू रानी चौहान ने आदेश दिया कि हेडमास्टर के खिलाफ विभागीय जांच पूरी होने तक निलंबन आदेश पर रोक रहेगी. याचिकाकर्ता ने वाराणसी के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के 19 मार्च, 2026 के ‘सस्पेंशन ऑर्डर’ को चुनौती दी थी. हेडमास्टर ने कोर्ट से कहा कि उन्होंने कथित गैस की कमी के बारे में न तो मीडिया को कोई बयान दिया और न ही कानूनी नियमों का कोई उल्लंघन किया. 

याचिकाकर्ता ने क्या कहा?

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याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उनकी तरफ से कोई गैर-कानूनी काम नहीं किया गया था, क्योंकि वह स्कूल के हेडमास्टर के तौर पर अपना कर्तव्य निभाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि सस्पेंशन ऑर्डर साफ नहीं था और ऐसे फैक्ट्स पर आधारित था जो मौजूद नहीं थे. वकील ने कहा कि अगर आरोपों को सच मान भी लिया जाए, तो भी उनके लिए इतनी बड़ी पेनल्टी लगाने की जरूरत नहीं है.

राज्य सरकार ने क्या कहा?

दूसरी तरफ, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि स्कूल को दो गैस सिलेंडर दिए गए थे, फिर भी गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए मिड-डे मील लकड़ी के चूल्हे पर पकाया गया था. हालांकि, यह माना गया कि गैस सिलेंडर की कमी थी, जिससे हेडमास्टर के पास बहुत कम ऑप्शन बचे थे. राज्य के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को एक हफ्ते के अंदर चार्जशीट दे दी जाएगी और जांच जल्द से जल्द पूरी कर ली जाएगी.

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दलीलों पर ध्यान देते हुए, कोर्ट ने निर्देश दिया कि पिटीशनर को एक हफ्ते के अंदर चार्जशीट जारी की जाए और जांच दो महीने के अंदर पूरी कर ली जाए. अदालत ने याचिकाकर्ता को भी जांच प्रक्रिया में सहयोग करने का निर्देश दिया है.

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मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही मामला

एक दूसरे मामले में, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक सरकारी स्कूल के टीचर के सस्पेंशन पर रोक लगा दी. टीचर ने LPG की कमी का जिक्र करते हुए फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया. कोर्ट ने कहा कि बिना सोचे-समझे या बाहरी दबाव में कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती.

जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच शिवपुरी जिले में पोस्टेड एक सरकारी टीचर की रिट पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी. टीचर ने 13 मार्च के अपने सस्पेंशन ऑर्डर को चुनौती दी थी. कोर्ट ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को 'सस्पेंशन सिंड्रोम' के तहत महज एक रूटीन प्रक्रिया के तौर पर सस्पेंड नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी को सस्पेंड करने की शक्ति का होना और ऐसा ऑर्डर तरीके से पास होना, ये दोनों अलग-अलग पहलू हैं.

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