केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं कक्षा का रिजल्ट सवालों के घेरे में है. आरोप है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की वजह से कई छात्रों के नंबर कम हो गए. तकनीकी खामियों और खराब स्क्रीनिंग को लेकर भी छात्रों ने आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि अच्छे पेपर के बावजूद नंबर उम्मीद से काफी कम आए. इतना ही नहीं, छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी मार्कशीट शेयर करते हुए कॉपी चेकिंग में AI के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है.
कॉपी चेक करने में AI का इस्तेमाल पर CBSE ने दी सफाई, OSM सिस्टम पर भी उठे सवाल
CBSE 12 Result: छात्रों का आरोप है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की वजह से उनके नंबर कम हो गए. कई छात्रों ने कॉपी चेकिंग में AI के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है. इस पर CBSE ने सफाई दी है.


इन आरोपों पर अब ‘स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग’ के सचिव संजय कुमार की सफाई आई है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, संजय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मूल्यांकन में कुछ गलतियां पाई गई हैं. आगे कहा,
"चेक हुई लगभग 98 लाख कॉपियों में से, लगभग 13,000 में सुधार और समीक्षा की जरूरत थी. OSM सिस्टम उन्हें ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाया था. बाद में इन मामलों की जांच एक मैनुअल चेकिंग प्रक्रिया के जरिए की गई."
12वीं रिजल्ट की मार्किंग इस बार OSM सिस्टम से की गई थी. इसके बाद पास परसेंटेज 88 से घटकर 85 प्रतिशत हो गया है. यह पिछले 7 सालों में सबसे कम है. कुछ छात्रों का आरोप है कि उन्हें जितने अंक मिलने चाहिए थे, उतने नहीं मिले.
OSM सिस्टम का किया बचावOSM सिस्टम का बचाव करते हुए संजय कुमार ने कहा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग न तो कोई नया कॉन्सेप्ट है और न ही यह पहली बार लागू किया गया है. CBSE ने सबसे पहले 2014 में OSM सिस्टम शुरू किया था. हालांकि, तब टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से इसे जारी नहीं रखा गया. अब इसे फिर से शुरू किया गया है.
उन्होंने कहा कि बहुत से संस्थानों में यह पैटर्न लागू किया जा रहा है. मुंबई यूनिवर्सिटी, विश्वेश्वरैया यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) और कैम्ब्रिज शिक्षा बोर्ड ने भी OSM लागू किया गया है.
ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है. CBSE ने साल 2026 की कक्षा 12वीं की परीक्षाओं में इस सिस्टम को पहली बार लागू किया है. पारंपरिक व्यवस्था में टीचर कागज की कॉपियों को पेन से जांचते थे और अंकों को मैन्युअली जोड़ते थे. OSM सिस्टम में इस प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया गया है.
परीक्षा के बाद छात्रों की कॉपियों को स्कैन करके डिजिटल कॉपियों में बदला जाता है. टीचर कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचते हैं और हर उत्तर या स्टेप के अंक को सिस्टम में फीड करते है. कुल अंको की गणना यानी टोटलिंग सॉफ्टवेयर की मदद से ऑटोमैटिक हो जाती है.
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पेपर चेकिंग में AI का इस्तेमाल हुआ है कि नहीं? इस पर भी CBSE ने सफाई दी है. CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह ने कहा कि पेपर चेकिंग में AI का इस्तेमाल नहीं किया गया है, केवल मार्किंग का तरीका बदला गया है. पहले कागज पर जांच होती थी और इस बार ऑन-स्क्रीन जांच हुई है. CBSE चेयरमैन ने आगे कहा कि अगर उन्हें आंसर शीट हासिल करने के बाद लगता है कि जांच में कोई समस्या है तो दोबारा मूल्यांकन के लिए जरूर आवेदन करें और शिक्षा बोर्ड उनके हर सवाल का जवाब देगा.
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