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CBSE ने माना OSM से कॉपी जांचने में 'गलती' हो सकती है, अब री-चेकिंग फीस पर उठने लगे सवाल

CBSE 12 Result: कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने JEE Main में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन CBSE के OSM सिस्टम के कारण बोर्ड परीक्षा में कम अंक मिले. इससे वे 75% पात्रता मानदंड पूरा नहीं कर सके. इससे कई योग्य छात्रों का IIT/NIT में एडमिशन लेने का सपना टूट गया.

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17 मई 2026 (अपडेटेड: 17 मई 2026, 12:15 PM IST)
CBSE opens Class 12 re-checking window, Re-evaluation fees, osm system controversy
CBSE ने 12वीं का रिजल्ट 13 मई को घोषित किया था. (सांकेतिक फोटो: इंडिया टुडे)
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12 के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन और री-चेकिंग की तारीखें और गाइडलाइंस जारी कर दी हैं. बोर्ड ने कहा कि जो छात्र अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं हैं, वे री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. CBSE ने कबूला कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के तहत कॉपियों की जांच में गलती की संभावना हो सकती है. हालांकि, एक दिन पहले ही बोर्ड ने OSM का बचाव करते हुए दावा किया था कि इससे बिना गलती के साथ कॉपियां चेक हो सकेंगी. अब बोर्ड ने साफ किया कि अगर कॉपियां जांचने में कोई गलती पाई जाती है, तो उसे सुधार दिया जाएगा.

‘गलती की गुंजाइश’

CBSE के एग्जामिनेशन कंट्रोलर संयम भारद्वाज ने 16 मई को न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, 

"हम लगभग 1.25 करोड़ आंसर कॉपी चेक करते हैं. इसमें संभावना हो सकती है कि कहीं कोई गलती हो. ऐसी गलतियों को ठीक करने के लिए हम अपने छात्रों को कुछ सुविधाएं देते हैं. CBSE एक ऐसी संस्था है जो छात्रों के सर्वोत्तम हित में काम करती है. हम पूरी पारदर्शिता के साथ काम करते हैं."

री-चेकिंग प्रोसेस कैसे काम करेगा?

यह प्रक्रिया दो चरणों में होगी. पहला चरण- सबसे पहले छात्र अपनी जांची हुई आंसर शीट की कॉपी डाउनलोड करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इसकी फीस 700 रुपये प्रति सब्जेक्ट है. CBSE के एग्जामिनेशन कंट्रोलर संयम भारद्वाज ने कहा, 

"इन आंसर शीट के लिए रिक्वेस्ट करने का विंडो 19 मई को खुलेगा. स्टूडेंट्स 22 तारीख तक इनके लिए अप्लाई कर सकते हैं."

कॉपी मिलने के बाद छात्रों को अपना हर आंसर देखना होगा, मार्किंग स्कीम से उसकी तुलना करनी होगी और हो सकने वाली गलतियों की पहचान करनी होगी. अगर उन्हें कोई गलती नजर आती है, तो उसे नोट करना होगा. छात्र खुद अपनी आंखों से देख सकते हैं कि टीचर ने किस प्रश्न पर कितने नंबर दिए हैं और क्या ऑन-स्क्रीन मार्किंग की स्कैनिंग में कोई पेज या ग्राफ धुंधला होने के कारण छूट तो नहीं गया या B शीट की चेकिंग तो नहीं छूट गई.

CBSE
(फोटो: CBSE)

दूसरा चरण-

1. वेरिफिकेशन: अगर छात्रों को कॉपी देखने के बाद लगता है कि उनके नंबरों को गिनने में गलती हुई है, या कोई और गड़बड़ी हुई है, तो वे इसके लिए अप्लाई करते हैं. इसमें अंकों का कुल जोड़ दोबारा कंप्यूटर सिस्टम द्वारा री-चेक किया जाता है और देखा जाता है कि कहीं कोई उत्तर बिना जांचे तो नहीं छूट गया. अन्य गड़बड़ियों का भी निपटारा इसके जरिए किया जाएगा. इसकी फीस 500 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका है.

2: री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन): अगर डिजिटल कॉपी देखने के बाद आपको पूरा भरोसा है कि आपका कोई चुनिंदा उत्तर बिल्कुल सही था, लेकिन ऑन-स्क्रीन मार्किंग के दौरान शिक्षक ने उसे गलत काट दिया या कम अंक दिए हैं, तो आप उस चुनिंदा प्रश्न को सीधे चुनौती दे सकते हैं. इसकी फीस 100 रुपये प्रति प्रश्न है.

CBSE
(फोटो: CBSE)

मार्क्स के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन रिक्वेस्ट के लिए विंडो 26 से 29 मई तक खुली रहेगी. CBSE के एग्जामिनेशन कंट्रोलर ने बताया, 

“26 से 29 तारीख तक एक दूसरी विंडो खुलेगी, जिसके दौरान वे अप्लाई करके बता सकते हैं कि कोई दिक्कत या कमी है.”

मार्क्स बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं

यहां छात्रों का यह भी याद रखना होगा कि इस प्रक्रिया के नुकसान और फायदे दोनों है. संयम भारद्वाज ने बताया,

"अगर कोई गलती पकड़ी जाती है और हमारे एक्सपर्ट्स का पैनल इसे कंफर्म करते हैं, तो उस गलती को तुरंत ठीक कर दिया जाएगा."

उन्होंने इसका दूसरा पहलू भी साफ किया और कहा,

“अगर उस गलती को ठीक करने पर छात्रों को ज्यादा मार्क्स मिलते हैं, तो वे एक्स्ट्रा मार्क्स सही तरीके से दिए जाएंगे. यह भी साफ करना जरूरी है कि अगर किसी गलती को ठीक करने पर स्कोर कम होता है, तो स्टूडेंट के मार्क्स उसी हिसाब से कम कर दिए जाएंगे.”

OSM सिस्टम क्या है?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है. CBSE ने साल 2026 की कक्षा 12वीं की परीक्षाओं में इस सिस्टम को पहली बार लागू किया है. पारंपरिक व्यवस्था में टीचर कागज की कॉपियों को पेन से जांचते थे और अंकों को मैन्युअली जोड़ते थे. OSM सिस्टम में इस प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया गया है. 

परीक्षा के बाद छात्रों की कॉपियों को स्कैन करके डिजिटल कॉपियों में बदला जाता है. टीचर कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचते हैं और हर उत्तर या स्टेप के अंक को सिस्टम में फीड करते है. कुल अंको की गणना यानी टोटलिंग सॉफ्टवेयर की मदद से ऑटोमैटिक हो जाती है.

OSM पर विवाद क्यों है?

कक्षा 12वीं के नतीजे आने के बाद छात्रों ने सोशल मीडिया पर OSM सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इस साल CBSE कक्षा 12वीं का कुल पास प्रतिशत गिरकर 85.2% रह गया है, जो पिछले 7 सालों में सबसे कम है. फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथमेटिक्स जैसे मुख्य सब्जेक्ट में हजारों छात्रों के नंबर उनकी उम्मीदों से काफी कम आए हैं.

cbse osm system controversy
(फोटो: X)

कई छात्रों का दावा है कि उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) में एडमिशन के लिए जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम मेन (JEE Main) जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत अच्छा स्कोर किया है, लेकिन CBSE के इस नए सिस्टम की वजह से उनके बोर्ड परीक्षा में कम नंबर आए और वे 75% की एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा नहीं कर पाए. इससे कई योग्य छात्रों का IIT/NIT में एडमिशन लेने का सपना टूट गया.

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(फोटो: X)

सेंट जेवियर्स स्कूल के टीचर ने एक्स पर लिखा, 

“OSM में गड़बड़ी के कारण 90s की उम्मीदें 50s-60s में बदल गईं. JEE 75% का क्राइटेरिया भी हाथ से निकल गया. छात्रों का भविष्य बर्बाद हो गया. सिर्फ फोटोकॉपी नहीं, बल्कि सही तरीके से पुनर्मूल्यांकन की जरूरत है.”

CBSE ने दी सफाई

विवाद बढ़ता देख CBSE ने आधिकारिक बयान और सर्कुलर जारी कर OSM सिस्टम का बचाव किया. बोर्ड ने दावा किया कि OSM सिस्टम पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है. इससे मानवीय त्रुटियों जैसे अंकों को गलत जोड़ने या अपलोड करने की गलतियों में भारी कमी आती है. 

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(फोटो: CBSE)
महंगी फीस पर सवाल

CBSE ने यह भी साफ किया है कि रिजल्ट से असंतुष्ट छात्रों के लिए हमेशा की तरह पुनर्मूल्यांकन यानी री-इवैल्यूएशन और अपनी आंसर शीट की फोटोकॉपी पाने का विकल्प खुला है. लेकिन इसकी भारी फीस ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर कोई छात्र 3 या 4 विषयों में री-इवैल्यूएशन कराना चाहता है, तो उसका कुल खर्च 4,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच सकता है. 

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए यह राशि बहुत ज्यादा है. पहले तो CBSE ने खुद माना कि कॉपी चेक करने में गलती की गुंजाइश ह सकती है, और फिर, अगर टीचर की लापरवाही से स्टूडेंट के मार्क्स कम भी आते हैं, तो भी उन्हें अपनी बात साबित करने के लिए भारी फीस देनी पड़ती है.

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करोड़ों की कमाई

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, CBSE ने पिछले साल क्लास 10 और 12 के स्टूडेंट्स से आंसर शीट के री-इवैल्यूएशन और री-चेकिंग के नाम पर करीब 23 करोड़ रुपये कमाए. शिक्षक केशव अग्रवाल द्वारा दायर एक RTI से पता चला है कि 2024-25 की परीक्षाओं के बाद, CBSE को क्लास 10 और 12 के स्टूडेंट्स को आंसर शीट की फोटोकॉपी देने के लिए 3.09 करोड़ रुपये मिले, जबकि री-चेकिंग और री-वेरिफिकेशन प्रोसेस के लिए 20.09 करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए.

उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि दोबारा जांच के बाद छात्रों के अंक बढ़ जाते हैं. केशव ने यह सवाल उठाया है कि क्या CBSE के एग्जामिनर्स की गलतियों का खामियाजा अभिभावकों को भुगतना चाहिए?

वीडियो: सोशल लिस्ट: CBSE ने बच्चों के साथ कर दिया मजाक? Rickrolling प्रैंक क्या है?

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