पेट्रोल महंगा क्या हुआ, झारखंड के गढ़वा जिले में एक 'माटसाब' ने घोड़ा ही निकाल लिया. सरकारी स्कूल के टीचर मुन्ना प्रसाद गुप्ता अब बाइक नहीं, घोड़े पर सवार होकर सेंसस माने जनगणना का काम कर रहे हैं. पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी देखकर उन्होंने सोचा 'जब घर में है घोड़ा, तो काहे का रोना?' पेट्रोल पंपों की लंबी-लंबी लाइनों में लगकर समय क्यों बर्बाद किया जाए. तो मास्टर जी ने घोड़े निकाला और उस पर सवार होकर 'गिनती' करनी चालू कर दी.
पेट्रोल महंगा हुआ तो 'माटसाब' ने निकाल लिया घोड़ा, घुड़सवारी के सहारे करने लगे जनगणना
Jharkhand School Teacher Viral Video: सबसे मजेदार बात ये कि गांव के छोटे बच्चे घोड़े को देखकर हैरान हो जा रहे हैं. कई बच्चों ने असली घोड़ा पहली बार देखा. सरकारी स्कूल टीचर मुन्ना प्रसाद गुप्ता बोले कि आजकल के बच्चे घोड़ा सिर्फ फोटो में देखते हैं, इसलिए पास आकर बड़े उत्साह से घोड़ा देखते हैं.


सफेद यूनिफॉर्म, सिर पर सरकारी सेंसस वाली टोपी, गले में आईडी कार्ड और नीचे भूरे रंग का घोड़ा. मास्टर साहब पूरी जिम्मेदारी के साथ घर-घर घूम रहे हैं और काम कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनके वीडियो भी वायरल हो रहे हैं.
मुन्ना गुप्ता गढ़वा के धुरकी ब्लॉक के टाटीडीरी गांव के सरकारी स्कूल 'उत्क्रमित उच्च विद्यालय' (Upgraded High School) में असिस्टेंट टीचर हैं. उन्हें सेंसस के तहत घर-घर जाकर जानकारी जुटाने और 'नजरी नक्शा' तैयार करने का काम मिला है. कई गांव ऐसे हैं जहां कच्चे और पतले रास्ते हैं, वहां बाइक भी ठीक से नहीं जा पाती. लेकिन घोड़ा आराम से पहुंच जाता है.
टीचर मुन्ना के मुताबिक, उनके यहां पेट्रोल का सकंट है. पेट्रोल का दाम महंगा हो रहा है. इसलिए उन्हें घोड़े का सहारा लेना पड़ा. इंडिया टुडे से जुड़े चंदन कुमार कश्यप की रिपोर्ट के मुताबिक, मुन्ना गुप्ता ने बताया,
“पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमत के कारण मैं घोड़े पर सवार होकर जनगणना कार्य के लिए घर से निकल चुका हूं.”
मुन्ना बताते हैं कि उनके परिवार में पहले से घोड़े रखने की परंपरा रही है और उन्होंने बचपन में ही अपने पिता से घुड़सवारी सीख ली थी. अब वही हुनर काम आ रहा है. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा,
मुन्ना बोले- बच्चों ने पहली बार घोड़ा देखा"पेट्रोल आसानी से नहीं मिल रहा था, और लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई थीं. इसलिए, मैंने सोचा कि लाइनों में समय बर्बाद करने के बजाय, मुझे कोई दूसरा उपाय सोचना चाहिए. हमारे परिवार में यह घोड़ा सालों से है, इसलिए मैंने सोचा कि मुझे घोड़े पर ही जाना चाहिए."
सबसे मजेदार बात ये कि गांव के छोटे बच्चे घोड़े को देखकर हैरान हो जा रहे हैं. कई बच्चों ने असली घोड़ा पहली बार देखा. मुन्ना बोले, "आजकल के बच्चे घोड़ा सिर्फ फोटो में देखते हैं, इसलिए पास आकर बड़े उत्साह से उसे देख रहे थे."
मुन्ना सेंसस को एक बड़ी जिम्मेदारी वाला काम मानते हैं. उन्होंने कहा,
16 मई से शुरू हुई जनगणना"अगर भारत सरकार ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी है, तो मुझे इसे तुरंत शुरू करना चाहिए और पूरी ईमानदारी के साथ इसे पूरा करना चाहिए."
मुन्ना ने बताया कि सेंसस का काम पूरा करने में करीब एक महीना लगेगा. रोजाना पांच से बीस घर कवर होते हैं. कई बार लोग घर पर नहीं मिलते, खराब नेटवर्क की वजह से फोन काम नहीं करता, इसलिए घरों पर दोबारा भी जाना पड़ता है. ऐसे में तय नहीं है कि एक दिन में कितने घर कवर होंगे. झारखंड में ‘सेंसस 2027’ का पहला फेज 16 मई से शुरू हुआ है, जो 14 जून तक चलेगा. इस दौरान राज्यभर में घर-घर जाकर आंकड़े डिजिटली जुटाए जा रहे हैं.
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