IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे से कथित तौर पर चीटिंग करते हुए पकड़े जाने के बाद एक 'माफीनामे' पर साइन करवाए गए थे. उस पर साइन किए थे. मगर IIT के नियम कहते हैं कि जब बच्चा चीटिंग करते हुए पकड़ा जाए, तो उसे दूसरी आंसर शीट देनी चाहिए. लेकिन नकल करते हुए पकड़े जाने पर अपॉलिजी लेटर लिखने का कोई प्रावधान नहीं है.
माफी का नियम नहीं लेकिन साहिल वाकोडे से 'माफीनामे' पर साइन करवाए गए, रिपोर्ट में दावा
IIT Bombay student suicide: 22 साल के छात्र साहिल ने 18 सितंबर को अपने हॉस्टल के कमरे में सुसाइड कर लिया था. बताया गया कि इनविजिलेटर ने उन्हें पेपर के समय फोन का इस्तेमाल करते हुए देखा था.

22 साल के छात्र साहिल ने 18 सितंबर को अपने हॉस्टल के कमरे में सुसाइड कर लिया था. बताया गया कि इनविजिलेटर ने उन्हें पेपर के समय फोन का इस्तेमाल करते हुए देखा था. इसके बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला उन्हें अधिकारियों के पास लेकर गए, जहां साहिल से लेटर लिखवाया गया. इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा,
“पता चला है कि इनविजिलेटर प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने छात्र को दोपहर लगभग 12:38 बजे परीक्षा हॉल से बाहर जाने के लिए कहा था. इसके बाद साहिल को अधिकारियों के पास ले जाया गया, जहां उन्होंने परीक्षा में नकल करने के लिए एक लिखित माफीनामे पर हस्ताक्षर किए. CCTV फुटेज के अनुसार फिर वे दोपहर लगभग 1:25 बजे अपने कमरे में पहुंचे.”
अखबार ने IIT बॉम्बे के अप्रैल 2015 में बनाए गए अकादमिक मेलप्रैक्टिस से जुड़े नियमों के बार में बताया. इनके मुताबिक अगर इनविजिलेटर एग्जाम के समय किसी छात्र को अनुशासनहीनता या नकल करते हुए पकड़ता है, तो वह नकल से जुड़ी चीजें जब्त कर सकते हैं. माने की चिट, फोन, आंसर पेपर आदि.
नियम ये भी कहता है कि "छात्र को एक नई आंसर बुक दी जानी चाहिए. उसे परीक्षा जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए." फिर एक डिटेल्ड नोट उस कोर्स के डिपार्टमेंट ऑफ हेड (HOD) को देना चाहिए. आगे HOD मामले को डिपार्टमेंटल एकेडमिक डिसीप्लिनरी एक्शन कमिटी (D-ADAC) के पास भेजते हैं.
ये भी पढ़ें: IIT बॉम्बे सुसाइड केस: साहिल वाकोडे और प्रोफेसर डूला का वीडियो सामने आ गया
D-ADAC सबूतों की जांच करता है. पता लगाने की कोशिश करता है कि क्या मेलप्रैक्टिस हुई. जो सदस्य रिपोर्ट से सहमत नहीं होते, वे नोट छोड़ सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सबूत स्पष्ट नहीं हैं तो इसका लाभ छात्र को मिलता है. इसके बाद समिति की सिफारिश को हेड के माध्यम से डीन के पास भेजा जाता है.
कैंपस में विरोध करने वाले छात्रों ने शिकायत की है कि साहिल वाकोडे के मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. छात्रों ने यह भी सवाल उठाया है कि नियमों के मुताबिक साहिल वाकोडे को दूसरी आंसर शीट क्यों नहीं दी गई. उन्हें एग्जाम हॉल से बाहर क्यों भेज दिया गया.
वीडियो: सलमान खान का 'मॉन्स्टर' वाले रोल का राज़ खुला! फिल्म में दिखेगी सनक की भरमार?









