The Lallantop

उद्धव ठाकरे के 6 बागी सांसद शिंदे के हुए, स्पीकर ने लगाई मुहर, कितना ताकतवर हुआ NDA?

Eknath Shinde ने कहा कि यह विलय संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के हिसाब से ही है. ये विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने की अनुमति देता है, अगर किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्य विलय के लिए सहमत हों.

Advertisement
post-main-image
उद्धव गुट के 6 सांसदों को शिंदे गुट में शामिल होने को सही पाया गया है (PHOTO- India Toay)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना-UBT के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत मंजूरी दे दी है, जो संसद के मॉनसून सत्र से पहले हुआ है।
  • 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का कारण यह था कि उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर दो-तिहाई बहुमत की संख्या पूरी की और दलबदल कानून के तहत विधायी प्रक्रिया पूरी की।
  • इस विलय के बाद शिंदे गुट के सांसद 7 से बढ़कर 13 हो गए हैं, जिससे लोकसभा में शिवसेना की ताकत बढ़ी है और एनडीए की संख्या 318 तक पहुंच गई है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत अभी भी नहीं मिला है।

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से उथल-पुथल देखने को मिल रही है. पार्टी टूटने के बाद से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को एक बड़ा झटका लगा है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शिवसेना-UBT के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मंजूरी दे दी है. संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले दलबदल विरोधी कानून के तहत उनके इस कदम को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई. यह फैसला इन 6 सांसदों के उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के लगभग एक महीने बाद आया है. इस कदम से लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
स्पीकर ने विलय को सही ठहराया

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मान्यता शिंदे के उस दावे के बाद मिली है जिसमें उन्होंने कहा था कि सांसदों को शामिल करने की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और कानूनी रूप से भी सही है. शिंदे गुट ने भरोसा जताया था कि स्पीकर उनके गुट के पक्ष में फैसला सुनाएंगे, क्योंकि इस विलय में सभी संवैधानिक जरूरतों को पूरा किया गया है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एकनाथ शिंदे ने कहा कि छह सांसद जरूरी दो-तिहाई बहुमत के समर्थन से उनकी पार्टी में शामिल हुए हैं और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं. 

उन्होंने कहा,

Advertisement

ये 6 सांसद दो-तिहाई बहुमत के साथ हमारे साथ आए हैं. कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद वो लोकसभा स्पीकर से मिले और जरूरी दस्तावेज और वीडियो रिकॉर्डिंग जमा करने सहित हर प्रक्रिया पूरी की.

एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह विलय संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के हिसाब से ही है. ये विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य होने से बचने की अनुमति देता है, अगर किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्य विलय के लिए सहमत हों. उन्होंने कहा,

लोकतंत्र में बहुमत मायने रखता है. इन 6 सांसदों के हमारे साथ जुड़ने से शिवसेना को बहुमत मिल गया है. हमने सब कुछ संसदीय प्रक्रिया और विधायी प्रक्रिया के ज़रिए किया है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: कभी ऑटोरिक्शा चालक रहे एकनाथ शिंदे इतने ताकतवर कैसे बने कि आज महाराष्ट्र सरकार को हिला दिया?

बीजेपी की ताकत बढ़ेगी

शिंदे सेना की लोकसभा में ताकत बढ़ना सीधे तौर पर बीजेपी के लिए फायदे की बात है. पार्टी को डिलिमिटेशन बिल पास कराने के लिए दो तिहाई सांसदों की जरूरत है. फिलहाल लोकसभा में 540 सांसद हैं. तीन सीटें खाली हैं. तृणमूल कांग्रेस से टूटकर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन का ऐलान किया है. इसके अलावा, शिंदे सेना के सांसदों की संख्या 7 से 13 हो गई है. इसके साथ लोकसभा में एनडीए की ताकत 318 के आंकड़े तक पहुंच गई है. हालांकि, अब भी वह दो तिहाई बहुमत से दूर है. इसके लिए उसे 360 सीटों की जरूरत होगी. एनडीए के अलावा इंडिया गठबंधन के पास 181 सांसदों की सेना है. अन्य सांसद 41 है.

उद्धव ठाकरे ने दी थी चुनौती

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने इस कदम को चुनौती दी थी. उनका तर्क था कि यह विभाजन पार्टी संगठन के ढांचे के दो-तिहाई रिप्रेजेंटेशन की कानूनी जरूरत को पूरा नहीं करता. इसका जवाब देते हुए शिंदे ने कहा था कि मामला स्पीकर के पास है. शिंदे के मुताबिक उनके गुट ने उचित प्रक्रिया का पालन किया है. स्पीकर का यह फैसला 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले आया है. इससे लोकसभा में शिंदे गुट वाली शिवसेना की स्थिति को और मज़बूत हो जाएगी. 

वीडियो: TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर बुलडोजर क्यों चला?

Advertisement