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सैलरी से कमाए ₹27 लाख, खर्चा ₹ढाई करोड़, बिहार के अधिकारी ने 'कमाल' कर दिया

अधिकारी का नाम अजित अमर है. वो सारण जिले में सेकेंडरी एजुकेशन, प्लानिंग और अकाउंट्स के DPO हैं. अजित पर अपनी आय से कहीं ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप है. मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई थी.

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सांकेतिक फोटो- Adobe stock

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  • सरकारी अधिकारी अजित अमर पर अपनी सैलरी से दस गुना अधिक खर्च करने और 2.51 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लेन-देन के आरोप लगे हैं, जिससे जांच की गई है।
  • जांच की शुरुआत एक ठेकेदार की शिकायत के बाद हुई, जिसमें अधिकारी पर सरकारी काम के बदले पैसे मांगने और आय-लेनदेन में गड़बड़ी के संकेत मिले।
  • जांच समिति ने बैंक खातों और संपत्ति की गहराई से जांच करवाने की सिफारिश की है, और रिपोर्ट राज्य मुख्यालय भेज कर आगे की कार्रवाई का निर्णय होना है।
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रोहित कुमार सिंह

वेतन पतला लेकिन खर्चा मोटा. बिहार के एक सरकारी अधिकारी पर ये 'कमाल' कर दिखाने का आरोप लगा है. साहब अपनी सैलरी से करीब दस गुना ज्यादा खर्चा कर रहे थे. आरोपी सारण में डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर (DPO) है. उसकी 32 महीने की नौकरी का हिसाब-किताब ‘समझ से परे’ पाया गया है. बताया गया कि इतने महीनों के हिसाब से उसकी सैलरी सिर्फ 27.43 लाख रुपये बनती है. लेकिन उससे जुड़े बैंक खातों में 2.51 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का लेन-देन हुआ है. 

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इंडिया टुडे से जुड़े रोहित शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी का नाम अजित अमर है. वो सारण जिले में सेकेंडरी एजुकेशन, प्लानिंग और अकाउंट्स के DPO हैं. अजित पर अपनी आय से कहीं ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप है. मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई थी. समिति ने अपनी रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट (DM) को सौंप दी है. डीएम ने आगे की कार्रवाई के लिए ये रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेज दी है.

जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिस अवधि में अजित पर निगरानी रखी जा रही थी उस दौरान उनके और उनकी पत्नी के बैंक अकाउंट से 2.51 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन हुआ है. इसके अलावा जांच करने वाली टीम को ये भी पता चला है कि अजित की पत्नी के नाम पर एकमा में 120 कट्ठा जमीन खरीदी गई. इसकी कीमत करीब 41.5 लाख रुपये की है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस दौरान अधिकारी ने कई लाख रुपये की लागत से एक मकान भी बनवाया है.

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जांच के घेरे में कैसे आया अधिकारी?

अजित अमर को लेकर एक ठेकेदार के आरोप के बाद जांच शुरू हुई. ठेकेदार का आरोप था कि अजित ने सरकारी काम कराने के बदले पैसे मांगे थे. जांच के दौरान अधिकारियों ने उनके बैंक खातों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की, जिसमें आय और संपत्ति के बीच कथित गड़बड़ियां सामने आईं.

अब जांच के आधार पर समिति ने सिफारिश की है कि अजित, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों, संपत्तियों और पैसों के लेन-देन की और गहराई से जांच कराई जाए. इसके साथ ही, बैंकों और कई सरकारी विभागों से रिकॉर्ड मंगाकर ये पता लगाने की भी बात कही गई है कि अजित के पास इतनी रकम कहां से आई.

जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने पुष्टि की है कि जांच रिपोर्ट राज्य मुख्यालय भेज दी गई है. अब इस रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार तय करेगी कि अजित अमर के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए या नहीं. 

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इस खबर को आप सोशल मीडिया पर 'अइये ना हमरा बिहार में' और 'बिहार इज नॉट फॉर बिगनर्स' जैसे मीम्स के साथ शेयर होता देख लेंगे, लेकिन ये मामला अपने आप में काफी गंभीर है. आरोपी अधिकारी है शिक्षा और प्लानिंग से जुड़े हैं. और बिहार में इन क्षेत्रों का कैसा हाल है, ये किसी से छिपा नहीं है.

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