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ससुराल बिहार में है लेकिन मायका बाहर तो आरक्षण नहीं मिलेगा

बिहार सरकार की नई डोमिसाइल पॉलिसी के मुताबिक, दूसरे राज्य से शादी करके बिहार आई महिलाओं को आरक्षण का लाभ लेने के लिए पति के बजाय पिता के पते के दस्तावेज देने होंगे.

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बिहार सरकार ने डोमिसाइल पॉलिसी में नया नियम जोड़ा है. (फोटो- India today)

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  • बिहार सरकार ने डोमिसाइल पॉलिसी-2025 में नया नियम जोड़ा है जिसमें दूसरी राज्य से शादी करके बिहार आई महिलाओं को सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए पति के पते की बजाय पिता का पता प्रमाणित करने की आवश्यकता है।
  • इस नियम के पीछे कारण यह है कि पहले बाहरी राज्य से आई महिलाओं को भी बिहार में सरकारी नौकरी में आरक्षण मिलता था, जिससे राज्य के मूल निवासियों में नौकरी पाने की संभावनाएं कम हो रही थीं।
  • इस बदलाव के बाद बाहरी राज्य से शादी करके आई महिलाओं को बिहार की सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें अब आम उम्मीदवारों के साथ खुली प्रतियोगिता में भाग लेना होगा।

आप बिहार की रहने वाली नहीं हैं, लेकिन शादी बिहार में हुई है तो आपके लिए एक जरूरी खबर आई है. अगर आप बिहार में सरकारी नौकरी की परीक्षा में बैठती हैं तो आपको आरक्षण के वो लाभ नहीं मिलेंगे, जो यहां के लोगों को ‘डोमिसाइल पॉलिसी’ के तहत मिलते हैं.

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बिहार सरकार ने अपनी डोमिसाइल पॉलिसी-2025 में एक नया नियम जोड़ दिया है. ये पॉलिसी बिहार के लोगों के लिए सरकार की नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था करती है. लेकिन अगर कोई महिला राज्य के बाहर से शादी करके बिहार में आई है तो उसे ये लाभ नहीं मिलेगा. आमतौर पर शादी के बाद महिलाओं का पता उनके ससुराल का ही माना जाता है. लेकिन सरकारी नौकरी की बात पर बिहार सरकार ने ये ‘अपवाद’ पैदा कर दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अगस्त (2025 में) बिहार सरकार ने राज्य में डोमिसाइल पॉलिसी लागू की थी. ये पॉलिसी राज्य की सरकारी नौकरियों में प्रदेश के मूल नागरिकों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करती है. पहले इसका लाभ उन महिलाओं को भी मिलता था, जिनकी शादी बिहार के किसी व्यक्ति से हुई है. अब इसमें एक नया नियम जोड़ते हुए सरकार ने कहा है कि बिहार में शादी करके आई महिलाओं को अपने पति के पते के बजाय पिता के पते के डॉक्युमेंट्स जमा करने होंगे. इससे वो इस आरक्षण व्यवस्था से बाहर हो जाएंगी.

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22 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने कहा कि शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में आरक्षण का लाभ पाने के लिए जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और नॉन क्रीमीलेयर सर्टिफिकेट देना होगा. जो महिलाएं बिहार की नागरिक नहीं हैं और बाहर के प्रदेशों से शादी करके बिहार में आई हैं, उन्हें ये सारे सर्टिफिकेट अपने पति के नहीं पिता के पते से बनवाकर देना होगा.

बाहर के लोग ले जाते थे नौकरी

अफसरों का कहना है कि साल 2023 से TRE (Teachers Recruitment Examination) परीक्षाओं यानी TRE-1 से लेकर TRE-3 तक करीब 50 हजार ऐसे टीचर्स की नियुक्ति हुई है, जो दूसरे राज्यों के हैं. यानी BPSC ने इन सालों में जितनी भर्तियां की हैं, यह उनका करीब पांचवां हिस्सा बैठता है. शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने एक्सप्रेस को बताया कि 2006 से अब तक बिहार में करीब 5.68 लाख शिक्षकों की भर्ती हुई है. इनमें बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के उम्मीदवार भी शामिल थे. इससे बिहार के उम्मीदवारों में नाराजगी रहती थी. सरकार ने इसी नाराजगी को दूर करने का तोड़ निकाला है.

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डोमिसाइल पॉलिसी के तहत आरक्षण

बता दें कि BPSC TRE डोमिसाइल नियमों के तहत उन उम्मीदवारों के लिए 40 फीसदी का आरक्षण रखा गया है, जिन्होंने बिहार के किसी संस्थान से मैट्रिक या इंटरमीडिएट की पढ़ाई की है. लेकिन बिहार के बाहर के उम्मीदवारों के लिए कोई अलग कोटा नहीं है. बिहार की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अलग-अलग आरक्षण व्यवस्था के जरिए कुल 85 फीसदी सीटें राज्य के लोगों के लिए आरक्षित हैं. ऐसे में बिहार के बाहर के लोगों के लिए सिर्फ 15 फीसदी सीटें ओपन हैं. इसी पर उन्हें दूसरे उम्मीदवारों से कंपटीशन करना है.

हाल ही में BPSC ने TRE-4 के जरिए 32 हजार 388 शिक्षक के पदों पर भर्ती निकाली है. पिछले साल बिहार सरकार की बनाई डोमिसाइल पॉलिसी पहली बार इसी भर्ती पर लागू की जाएगी.

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