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बिहार के स्कूलों में रील बनाने पर रोक, यूट्यूबर छोड़िए टीचर्स तक वीडियो नहीं बना पाएंगे

बिहार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के दौरान टीचर और छात्रों के सोशल मीडिया के लिए वीडियो या रील बनाने पर रोक लगा दी है. सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्वच्छता अभियान के वीडियो शूट करने के लिए भी पहले लिखित अनुमति लेनी होगी. क्लास चलने के दौरान बाहरी लोगों की एंट्री पर भी रोक लगाई गई है.

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बिहार में सरकारी स्कूल में रील बनाने पर रोक लगी. (Photo Courtesy- PTI)

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  • बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति के क्लास वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर साझा करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है, यह निर्देश 4 नवंबर को जारी किया गया।
  • यह फैसला इस कारण लिया गया क्योंकि क्लास वीडियो बनाने से छात्रों की पढ़ाई में बाधा आती है और उनकी गोपनीयता पर असर पड़ता है, साथ ही टीचर्स का रिसोर्सेस का गलत उपयोग भी देखा गया।
  • आदेश के पालन की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी और क्षेत्रीय उपनिदेशक को दी गई है तथा उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पर क्लास के बच्चों के साथ रील बनाने वाले टीचरों के लिए बड़ी खबर है. बिहार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में बिना पहले से इजाजत लिए क्लास के वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करने पर रोक लगा दी है. विभाग ने कहा है कि चाहे स्कूल के टीचर हों या स्टूडेंट, बिना पहले से इजाजत लिए क्लास में सोशल मीडिया के लिए रील शूट नहीं करेंगे. ये रोक स्कूल के किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वच्छता प्रोग्राम या ऐसे किसी भी आयोजनों के दौरान भी लागू रहेगी. इतना ही नहीं, विभागीय आदेश में पढ़ाई के दौरान सरकारी स्कूल कैंपस में बाहरी लोगों की एंट्री भी रोक दी गई है.

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बिहार स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पांडेय ने 4 नवंबर को इस बारे में आदेश जारी किया था. उन्होंने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला कार्यक्रम अधिकारयों को निर्देश दिया था कि वो ये तय करें कि स्कूलों में पढ़ाई के दौरान टीचर या स्टूडेंट न तो वीडियो बनाएं और न सोशल मीडिया पर ऐसा कोई रील ही शेयर करें. इस निर्देश को लागू कराने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को दी गई है.

आदेश के मुताबिक, विभाग ने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि स्कूल के समय रील और वीडियो बनाने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है. इससे छात्रों की ‘प्राइवेसी’ का उल्लंघन भी हो सकता है. द हिंदू से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा, 

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क्लास में पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट्स के साथ रील बनाना और बाद में उसे सोशल मीडिया पर डालना बिल्कुल भी ठीक नहीं है. इन नियमों का उल्लंघन करने पर विभाग की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि स्कूल में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है और इस आदेश का मकसद पढ़ाई के समय शिक्षकों और छात्रों का ध्यान भटकने से रोकना है. विभाग ने इस पर भी चिंता जताई है कि टीचर सरकारी स्कूल के रिसोर्सेज का इस्तेमाल इन्फ्लुएंसर बनने के लिए कर रहे हैं. 

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कब बना सकते हैं वीडियो?

स्कूलों में वीडियो बनाने पर पूरी तरह से रोक भी नहीं लगी है. विभाग ने साफ किया है कि स्कूल के टीचर और नॉन टीचिंग स्टाफ को सोशल मीडिया मीडिया के लिए वीडियो शूट करने की लिखित इजाजत अपने कंट्रोलर ऑफिसर से लेनी होगी. स्कूलों में 15 अगस्त या 26 जनवरी जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं. पौधारोपण अभियान, रक्तदान और स्वच्छता कैंपेन भी चलाया जाता है. इन सारे प्रोग्राम के वीडियो भी बिना इजाजत के शूट करना और शेयर करना मना है. अगर कोई ऐसा करना चाहता है तो उसे भी संबंधित अधिकारी से इसकी परमिशन लेनी होगी. 

आदेश में आंतरिक सुरक्षा पर असर डालने वाले या अश्लील कंटेंट वाले पोस्ट शेयर करने पर भी रोक लगाई गई है. 

बता दें कि इससे पहले 30 अक्टूबर को बिहार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूल के सभी टीचरों और नॉन-टीचिंग स्टाफ को पढ़ाने और दफ्तर के कामकाज के दौरान तय ड्रेस कोड का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया था.

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