पंचकूला के स्कूल में 6 वर्षीय छात्रा को बुरी तरह पीटने वाले मामले में दो अपडेट आए हैं. पहली- 8 वर्षीय आरोपी छात्र को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) से जमानत मिली है. दूसरी- दोनों बच्चों की पहचान उजागर करने वाली वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया से हटाई जाएंगी.
बच्ची को ईंट से मारने वाले छात्र को बेल मिली, वकील ने बताया, 'वो हिंसक गेम्स का आदी है'
Panchkula school horror: पंचकूला में केजी की छात्रा को बुरी तरह पीटने वाले छात्र को जमानत मिल गई है. आरोपी बच्चे के परिवार ने दलील दी कि ऑब्जर्वेशन होम में रहने से उसकी शिक्षा और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है.

28 अक्टूबर को तीसरी क्लास में पढ़ने वाले आरोपी ने केजी की छात्र को बुरी तरह पीटा था. हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी. घटना के बाद छात्र को अंबाला के ऑब्जर्वेशन होम भेजा गया था. लेकिन परिवार की तरफ से दायर जमानत याचिका और दलीलें सुनने के बाद बोर्ड ने उसे घर भेज दिया है.
ऑनलाइन वायरल सामग्री हटाने का निर्देशछात्र के पिता ने जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 की धारा 74 के तहत अलग से आवेदन दायर किया गया था. इसमें मांग की गई थी कि सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर वायरल हो रहे वीडियो, तस्वीरों को हटाया जाए, जिनमें बच्चे की पहचान पता लग रही है. इसे बोर्ड ने स्वीकार कर लिया.
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बोर्ड ने जांच अधिकारी को संबंधित सामग्री हटवाने के निर्देश दिए हैं. अधिकारी को 27 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी. इंडिया टुडे से जुड़ीं उमंग श्योराण ने मामले में मनबीर सिंह राठी से बात की. वे आरोपी बच्चे की तरफ से पैरवी कर रहे थे. उन्होंने जमानत मिलने और घटना को अंजाम देने के पीछे की मानसिक स्थिति के बारे में बताया.
मनबीर के मुताबिक बेल एप्किलेशन में उन्होंने कहा था,
“बच्चा आठ साल है. उसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. क्रिमिनल के कॉन्टैक्ट में आ सकता है. स्टडी ना खराब हो. उसकी काउंसलिंग के लिए उसे बेल मिलनी चाहिए.”
बोर्ड ने इसे मान लिया और कहा कि बच्चे की पढ़ाई जारी रहे. काउंसलिंग हो. उसे जिस मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है, वो मिले.
बच्चे के आक्रामक व्यवहार के पीछे वीडियो?बच्चे के अग्रेसिव बिहेवियर पर कई सवाल उठ रहे हैं. इस पर वकील मनबीर सिंह राठी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है. लेकिन अब तक की इन्वेस्टिगेशन में पता चला है कि वो काफी फोन देखता था. ऐसे गेम्स खेलता था, जिसमें दूसरे को चोट पहुंचाने पर पॉइंट्स मिलते हैं. उन्होंने कहा,
“वो ऐसे गेम्स खेलता था, जो वायलेंस दिखाता है. वो वायलेंट गेम्स का आदी हो चुका है. बच्चे ने खुद बताया कि वो ऐसे गेम्स खेलता है. उन गेम्स में पॉइंट्स मिलते हैं. जैसे कि गेम में अगर किसी को मारा जाता है, तो उसके 30 पॉइंट्स होते हैं. किसी को गिरा दिया, तो 10 पॉइंट्स मिलते हैं. तो वो बच्चा उस गेम को खेलता रहता था. अपने पॉइंट्स बनाने के लिए.”
उन्होंने कहा कि ऐसे में कई बार बच्चा हकीकत में भी वैसी एक्टिविटी करने लग जाता है. अभी बच्चे को काउंसलिंग की जरूरत है. आगे जांच भी चल रही है. ताकि ऐसी दुर्घटना ना हो. वकील ने कहा कि अब देखना होगा कि बच्चे की पढ़ाई कैसी होगी.
इस पर भी ध्यान दिया जाएगा कि बच्चे को स्कूल में बुली ना किया जाए. उसे आकर तंग ना किया जाए. बार-बार इन्वेस्टिगेशन कर उस दिन के बारे में पूछा जाए. इससे उसके दिमाग पर असर हो सकता है. इससे उसके भविष्य में नुकसान हो सकता है.
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