एक वायरल रील में पुरुष के अंडकोष की कीमत करोड़ों रुपये बताई गई. घूमते-घूमते यह रील मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक युवक के पास पहुंची. उसने तय कर लिया कि अब इंसानी अंडकोष बेचकर करोड़ों रुपये कमाने हैं. आरोप है कि युवक ने कुछ नाबालिगों के साथ मिलकर 15-16 साल के लड़कों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. तीन कोशिशों के बाद एक 17 साल के लड़के की कथित तौर पर हत्या कर दी गई. आरोप है कि हत्या के बाद डेड बॉडी से अंडकोष निकाल लिए, लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं मिला. करोड़पति बनने की चाहत में आरोपी वायरल रील पर भरोसा कर एक मासूम की जान ले चुके थे.
भोपाल: प्राइवेट पार्ट की कीमत 6 करोड़! रील में ऐसे दावे देख कर की हत्या, यूं खुली खौफनाक साजिश
Human Testicles से जुड़ी Reel देखकर एक युवक ने करोड़ों रुपये कमाने की ठानी. उसने कथित तौर पर साथियों के साथ मिलकर हत्या की (Bhopal Teen Murder) और मृतक की बॉडी से प्राइवेट पार्ट काट लिए. पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

सोशल मीडिया पर '6 करोड़ रुपये में इंसानी अंडकोष' का तगड़ा हव्वा है. हवाबाजी की जाती है कि इंसानी अंडकोष (Human Testicles) बेचकर करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं. खासकर खाड़ी देशों में. लेकिन ये दावे सरासर झूठे हैं. इसका पर्दाफाश बाद में करेंगे. पहले, इस रील के चक्कर में भोपाल में किशोर की हत्या का मामला समझते हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक 20 साल के BBA स्टूडेंट ने पुलिस को बताया कि वह एक रील से 'इंस्पायर' हुआ था. फिर उसने टीनएज लड़कों को टारगेट करने के लिए एक ग्रुप बनाया. ग्रुप में नाबालिग लड़के भी शामिल किए.
दो नाकाम कोशिशों के बाद उन्होंने कथित तौर पर पेन और चाबी के छल्ले बेचने वाले एक लड़के की हत्या कर दी. उसकी बॉडी से प्राइवेट पार्ट भी काटकर निकाल लिया. बाद में पता चला कि जिस चीज के उन्हें करोड़ों मिलने थे, उसका तो कोई खरीदार ही नहीं था.
पुलिस ने क्या बताया?इंडिया टुडे से जुड़े रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि इस मामले में एक नाबालिग समेत करीब 13 लोगों से पूछताछ की गई है. उन्होंने कहा कि जांच करने वालों को शक है कि इंसानी अंगों को विदेश भेजने की साजिश थी और इसी एंगल से जांच की जा रही है.
करोड़ों रुपये कमाने के सपने दिखाएपुलिस के अनुसार, लड़के की हत्या का कथित मास्टरमाइंड जोहेब खुद को मेडिकल स्टूडेंट की तरह दिखाता था. आरोप है कि वो चार और लोगों को इस बात पर राजी करने में कामयाब रहा कि इंसान का प्राइवेट पार्ट बेचकर 1 से 1.5 करोड़ रुपये कमाए जा सकते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, एक सीनियर पुलिस ऑफिसर ने 2 करोड़ रुपये की बात बताई,
"उसने (मास्टरमाइंड) खुद को डॉक्टर बताया और उनसे (नाबालिगों से) डॉक्टर जैसे कपड़े पहनकर मिला. उसने उन्हें अपने मोबाइल फोन पर एक वीडियो दिखाया और एक टीनेजर को टारगेट करने का प्लान समझाया. फिर उसने करीब 2 करोड़ रुपये कमाने का लालच दिया, और कहा कि 15-16 साल के लड़के की जरूरत है."
मामले में दो नाबालिग समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, पहले उन्होंने एक लड़के को फंसाने की कोशिश की. उसे लड़ाई में मदद करने के बदले 100 रुपये देने का लालच दिया गया. लड़के ने मना कर दिया. दूसरी कोशिश में एक लड़का लड़ने में मदद करने के लिए राजी हो गया. लड़ा भी, लेकिन भाग गया. इसके बाद तीसरी कोशिश की गई.
आरोप है कि तीसरी कोशिश में दो नाबालिग 6 अगस्त को इकबाल मैदान के पास एक लड़के से मिले. उसे खटलापुरा के पास लड़ाई में मदद के नाम पर फंसा लिया. आरोपी उस लड़के को धोबी घाट की तरफ ले गए, जहां उसकी कथित तौर पर हत्या कर दी गई. जोहेब को हत्या की जानकारी दी गई, लेकिन उसने वहां आने से मना कर दिया.
पुलिस का कहना है कि जोहेब ने बॉडी से प्राइवेट पार्ट काटने के तरीके बताने वाला एक वीडियो आरोपियों को दिखाया था. कथित तौर पर जोेहेब ने उनसे उसी वीडियो के हिसाब से प्राइवेट पार्ट निकालने के लिए कहा. इल्जाम है कि आरोपियों ने जोहेब के बताए मुताबिक डेड बॉडी से अंडकोष निकाल लिए.
10 अगस्त को धोबी घाट के पास छोटे तालाब से सड़ी हालत में शव बरामद किया गया. मृतक की मां ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसके पांच दिन उन्होंने टैटू से शव की पहचान बेटे के तौर पर की. पोस्टमॉर्टम में जानलेवा चोटें और उसके टेस्टिकल्स निकाले जाने की बात भी सामने आई.
आरोपियों ने बताया कि उनका प्लान फेल हो गया. पुलिस ने बताया कि आरोपियों को अंडकोष का कोई खरीदार नहीं मिला. उन्हें टिशू को प्रिजर्व करना या बेचना नहीं आता था. कथित तौर पर उन्होंने तीन दिन तक प्राइवेट पार्ट अपने पास रखे और फिर तालाब में फेंक दिए.
अंडकोष के बदले 6 करोड़ का सच?अब बात करते हैं कि अंडकोष बेचकर करोड़ों रुपये कमाने की लफ्फाजी की. साल 2017 की बात है. अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंसिलवेनिया की एक जूरी ने एक शख्स को 8,70,000 डॉलर (उस समय करीब 6 करोड़ रुपये) मुआवजा देने का आदेश दिया था. पीड़ित का सर्जन ने गलत अंडकोष निकाल दिया था, जिसके बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया.
तब 54 साल के स्टीवन हेन्स ने डॉ. वी स्पेंसर लॉन्ग पर केस किया, जिनके पास हेन्स 2013 में गए थे. उन्हें अपने दाहिने टेस्टिकल में 15 साल से दर्द हो रहा था. एक अल्ट्रासाउंड से पता चला कि पिछली चोट से हुए नुकसान के बाद अंडकोष खराब हो गया था.
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स्टीवन हेन्स ने दर्द कम करने के लिए टेस्टिकल सर्जरी कराई. सर्जरी के दौरान डॉक्टर ने खराब अंडकोष के बजाय गलत अंडकोष निकाल दिया. कोर्ट में भी यह बात साबित हो गई. कोर्ट ने उन्हें लगभग 6 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. इसके बाद से अंडकोष के बदले 6 करोड़ रुपये की बात फैल गई. सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़े दावे किए जाने लगे.
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