NEET पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर से प्रोटेस्ट शुरू हुआ. इसके बाद ये देश के कई हिस्सों तक फैल गया. बिहार में भी कई जगह छात्रों ने इसको लेकर प्रदर्शन किया. इस दौरान बिहार के सिवान में छात्रों पर AK-47 राइफल के इस्तेमाल का आरोप लगा. इस पर काफी बवाल हुआ. अब सुप्रीम कोर्ट में बिहार पुलिस ने इसको लेकर सफाई दी है. राज्य पुलिस ने दावा किया है कि एक कांस्टेबल भीड़ में फंस गया था, इसलिए उसे हवाई फायरिंग करनी पड़ी.
प्रोटेस्ट के बीच AK-47 कैसे चला दी? बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में वजह बताई
जंतर मंतर पर प्रदर्शन हिंसक होने के बाद 25 जुलाई को बिहार में कई पार्टियों ने बंद बुलाया था. ये घटना उसी वक्त की है. इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार पुलिस ने कोर्ट में कहा कि जिस कांस्टेबल ने गोली चलाई उसकी तैनाती डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट में थी.

जंतर मंतर पर प्रदर्शन हिंसक होने के बाद 25 जुलाई को बिहार में कई पार्टियों ने बंद बुलाया था. ये घटना उसी वक्त की है. इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार पुलिस ने कोर्ट में कहा कि जिस कांस्टेबल ने गोली चलाई उसकी तैनाती डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट में थी. 25 जुलाई को वो सिवान में प्रदर्शनकारियों की भीड़ में फंस गया था. इसके बाद उसने अपनी AK-47 से चार राउंड फायरिंग की थी.
इस संबंध में ADP (लॉ एंड ऑर्डर) के. सुहिता अनुपम ने 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में एक जवाबी हलफनामा दायर किया है. इसमें उन्होंने कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की थी. जिसमें सिवान के SP, 2 SDO, 2 इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 13 कांस्टेबल समेत कुल 20 पुलिसकर्मी घायल हुए. हिंसा के दौरान पुलिस की दो गाड़ियों और बड़ी संख्या में ट्रैफिक बैरिकेड/ट्रोलियों को नुकसान पहुंचा. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए.
हलफनामे में आगे कहा गया,
"मौके पर तैनात पुलिस बल पर्याप्त नहीं था. इसलिए अलग-अलग विभागों और पुलिस लाइनों में काम कर रहे सभी अधिकारियों और जवानों को अतिरिक्त पुलिस बल के रूप में मौके पर बुलाया गया. जेपी चौक के पास भीड़ के बीच जिला खुफिया इकाई (DIU) में तैनात एक कांस्टेबल फंस गया. उसने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अपनी AK-47 से हवा में 4 गोलियां चलाईं."
पुलिस ने अपने हलफनामे में दावा किया कि इस फायरिंग में कोई ‘घायल नहीं हुआ’.
बिहार पुलिस ने हलफनामे में घायल प्रदर्शनकारियों और गिरफ्तारियों का भी जिक्र किया है. इसमें कहा गया है-
- इन घटनाओं के संबंध में 6 FIR दर्ज की गईं, जिनमें 82 लोगों को आरोपी बनाया गया. इनमें से 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
- जेपी चौक से करीब 1.5 से 2 किलोमीटर दूर हाथी चौक पर एक अन्य सहायक सब-इंस्पेक्टर (ASI) ने भीड़ को हटाने के लिए अपनी 9mm पिस्तौल से 2 गोलियां चलाईं. घटनास्थल से .315 बोर के 2 कारतूस और 7.65 mm का 1 इस्तेमाल किया हुआ कारतूस बरामद हुआ.
- तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आईं. उन्हें सिवान के सदर अस्पताल में इलाज दिया गया और बेहतर इलाज के लिए तुरंत पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया.
- प्रदर्शनकारियों को लगी चोटें AK-47 से नहीं हुई थीं. घायल लोग उस जगह पर भी मौजूद नहीं थे, जहां AK-47 चलाने वाला कांस्टेबल खड़ा था.
- पुलिस ने हथियार की पहचान, गोली चलने की दूरी और गोली किस ऐंगल से चली आदि का पता लगाने के लिए बैलिस्टिक जांच शुरू की है.
हलफनामे में यह भी कहा गया कि AK-47 चलाने वाले कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है. उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है. राज्य सरकार ने अदालत के सामने माना, "AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है, जिसका इस्तेमाल विशेष अभियानों में किया जाना चाहिए, कानून-व्यवस्था संभालने की सामान्य स्थिति में नहीं."
बिहार पुलिस ने कहा कि पुलिस महानिदेशक (DGP) ने 1 अगस्त को AK-47 के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर विस्तृत निर्देश जारी किए हैं. इस तरह के निर्देश पहले भी जारी किए जा चुके हैं.
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