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भोपाल में किसानों का आंदोलन खत्म, मूंग खरीद की मांग हुई पूरी, किन मुद्दों पर बनी सहमति?

Bhopal farmer protest: 29 जुलाई को किसानों और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच बात हुई. जिसमें सरकार ने 25 फीसदी की जगह 60 फीसदी मूंग खरीद का फैसला किया और इसके बाद आंदोलन ख़त्म हो गया. भोपाल में किसान 27 जुलाई से धरना दे रहे थे.

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मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन ख़त्म हो गया है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों ने भोपाल में मूंग दाल की MSP पर खरीद बढ़ाने और ई-टोकन व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 27 जुलाई से आंदोलन शुरू किया था, जो बातचीत के बाद समाप्त हुआ।
  • कृषकों की प्रमुख समस्या इस बार मूंग दाल की अधिक उत्पादन के बावजूद सरकार द्वारा सीमित मात्रा में खरीद और ई-टोकन प्रणाली के कारण खाद वितरण में देरी थी, जिससे आंदोलन शुरू हुआ।
  • सरकार ने मूंग दाल की खरीद को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने और ई-टोकन प्रणाली पर रोक लगाने का फैसला किया, साथ ही खाद वितरण व्यवस्था की जांच के लिए समिति गठित की जाएगी।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन ख़त्म हो चुका है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद धरना समाप्त करने का ऐलान किया. 27 जुलाई को ये आंदोलन शुरू हुआ था, जिसमें किसानों की सबसे बड़ी मांग थी कि मूंग दाल की MSP पर खरीद बढ़ाई जाए. 

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आजतक से जुड़े रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मूंग दाल की खेती कई गुना बढ़ गई है. लेकिन सरकार सीमित मात्रा में ही खरीद रही थी. इससे बड़ी संख्या में किसानों को अपनी फसल बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ती. बीती रात किसानों और मध्य प्रदेश सरकार के बीच तीन घंटे तक बैठक चली. सरकार ने 25 फीसदी की जगह 60 फीसदी मूंग खरीद का फैसला किया है.

कैसे शुरू हुआ आंदोलन?

किसानों की दूसरी बड़ी शिकायत खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को लेकर थी. किसानों का आरोप था कि इस सिस्टम की वजह से समय पर खाद नहीं मिलता है और खेती प्रभावित हो रही है. इन्हीं मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 19 किसान संगठनों ने आंदोलन शुरू किया. 

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27 जुलाई को नर्मदापुरम से करीब दो हज़ार किसानों ने भोपाल के लिए पैदल कूच किया. ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में बिस्तर और खाने का सामान था. पुलिस ने रास्ते में कई जगह बैरीकेड लगाए थे, लेकिन किसानों ने वहां धरना दिया और आगे बढ़े. अगले दिन भोपाल की सीमा तक पहुंच गए. प्रशासन ने उन्हें शहर के भीतर जाने से रोका तो किसानों ने वीर सावरकर सेतु के पास डेरा डाल दिया. इसी दौरान सड़क पर ही दाल-बाटी बनाई गई. 

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किसान आंदोलन की एक तस्वीर. 

29 जुलाई को किसानों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास की ओर कूच किया. पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई. जिसके बाद सरकारी प्रतिनिधियों ने किसानों से बात की. 

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किस बात पर सहमति बनी?

कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस साल 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद को मंजूरी दी थी. लेकिन किसानों को राज्य भर में लगभग 20.16 लाख मीट्रिक टन मूंग उत्पादन की उम्मीद है. इसलिए किसानों ने खरीद बढ़ाने की मांग की. किसानों ने 100 फीसदी खरीद बढ़ाने की मांग की थी. लेकिन सरकार ने 60 फीसदी मूंग खरीद पर मंजूरी दी है. 

ऐदल सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर खरीद मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया है. इस प्रोटेस्ट में कुछ जेन-जी प्रदर्शनकारी भी पहुंचे. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी भारतीय किसान यूनियन से मुलाकात कर इस प्रदर्शन को समर्थन देने का वादा किया. 

इस सहमति के बाद नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में करीब 3 क्विंटल प्रति एकड़ खरीद होगा. सरकार ने स्लॉट बुकिंग की आखिरी तारीख भी 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है. इसके अलावा सरकार ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन सिस्टम पर भी फिलहाल रोक लगा दी है. कृषि मंत्री ने कहा कि शुरुआती स्तर पर इस व्यवस्था में कई दिक्कतें आ रही हैं. इसकी जांच के लिए एक समिति बनाई जाएगी. 

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