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भोजशाला में नहीं होगी नमाज, झटके के साथ सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को दो बड़ी राहत भी दीं

Bhojshala Supreme Court Case: सुप्रीम कोर्ट ने Madhya Pradesh High Court के भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने के फैसले पर स्टे नहीं लगाया. सर्वोच्च न्यायालय ने भोजशाला विवाद में सरकार को एक अंतरिम व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अलग से नमाज की जगह देने का निर्देश दिया. (PTI)

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  • सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया और मुस्लिम पक्ष को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी।
  • धार के भोजशाला परिसर को लेकर मुस्लिम पक्ष और हिंदू पक्ष के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है, जिसमें हाई कोर्ट ने मई 2023 में इसे मंदिर घोषित किया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को परिसर के पास एक खुली जगह में नमाज पढ़ने के लिए सरकार से व्यवस्था करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद निर्धारित की।

भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से एक तरफ झटका, तो दूसरी तरफ राहत मिली. सर्वोच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने के मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की इजाजत भी नहीं दी. राहत ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने अंतिरम व्यवस्था के तौर पर सरकार को नमाज पढ़ने के लिए भोजशाला परिसर के पास खुली जगह देने के लिए कहा है.

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भोजशाला में नमाज से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अलग-अलग मुस्लिम पार्टियों की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले से पहले की स्थिति को बहाल करने के लिए अंतरिम आदेश की मुस्लिम पार्टियों की रिक्वेस्ट को खारिज कर दिया.

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से रिक्वेस्ट की थी कि उन्हें हर शुक्रवार को भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाए, ठीक वैसे ही जैसे हाई कोर्ट के फैसले से पहले उन्हें इसकी इजाजत थी. लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष की गुजारिश पर चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कहा,

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"हमें ऐसा कोई ऑर्डर पास नहीं करना चाहिए जिससे टेंशन हो."

'नमाज के लिए जगह दे सरकार'

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह निर्देश जरूर दिया कि वो मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ने के लिए, उस जगह (भोजशाला परिसर) के पास एक अलग खुली जगह दे. बेंच ने साफ किया कि यह इंतजाम एड-हॉक है, जो मामले के आखिरी नतीजे पर निर्भर है. कोर्ट ने कहा कि इसका पार्टियों की दलीलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम निर्देश दिया. मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश सीनियर वकील हुजैफा अहमदी की याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) को कोर्ट की इजाजत के बिना विवादित परिसर में किसी भी तरह के स्ट्रक्चरल बदलाव ना करने का निर्देश दिया. मामले की अगली फाइनल सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी.

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क्या है पूरा मामला?

बीते कई दशकों से धार के भोजशाला परिसर पर विवाद चल रहा है. हिंदू पक्ष इसे भोजशाला मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि ये 11वीं सदी की कमाल मौला मस्जिद है. इस साल 15 मई को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर माना और ASI को ही इसका संरक्षण दिया.

यह भी पढ़ें: 'धार का भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं... ', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ये फैसला देने की वजह भी बताई

हाई कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं को यहां पूजा करने का अधिकार है. कोर्ट ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को भोजशाला में शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी.

हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि अगर मुस्लिम समुदाय धार जिले में मस्जिद निर्माण के लिए जमीन के आवंटन के लिए आवेदन करता है, तो सरकार उन्हें एक अलग जमीन देने पर विचार करे.

वीडियो: मध्य प्रदेश की वो भोजशाला जिसके चलते अक्सर हिंदू-मुस्लिम तनाव होता है

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