बिहार के रहने वाले 82 साल के कवि कामेश्वर मिश्रा अपनी पेंशन निकालने गए थे. पैसे निकालने के बाद उन्होंने सोचा कि अपना अकाउंट बैलेंस भी जांच लें. जैसे ही उन्होंने अपने खाते की जांच करवाई, उनके होश उड़ गए. खाते में इतने पैसे थे, जितने उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में देखना छोड़िए सोचे भी नहीं थे. उनका बैंक अकाउंट बता रहा था कि उनके खजाने में 7,59,69,51,951 रुपये जमा हैं. आसान भाषा में भी बता देते हैं. लगभग 760 करोड़ रुपये.
पेंशन लेने गए पिता-पुत्र ने बैंक बैलेंस चेक किया, ₹1500 करोड़ देखकर हाथ-पांव फूल गए
बिहार के मुजफ्फरपुर के 82 वर्षीय कवि कामेश्वर मिश्रा पेंशन निकालने गए तो खाते में 759 करोड़ रुपये देखकर हैरान रह गए. उनके विकलांग बेटे के खाते में भी उतनी ही रकम दिखी, जिसके बाद बैंकिंग सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है.


ये धनराशि उनके खाते में जाने कहां से बरस पड़ी थी. उनके साथ उनका बेटा भी था. उसे भी विकलांग पेंशन मिलती है. कामेश्वर मिश्रा ने उसका खाता भी चेक करवाया. चौंकने की बारी एक बार फिर से आई क्योंकि बेटे के खाते में भी तकरीबन उतने ही पैसे (760 करोड़) जमा थे. यानी बाप और बेटे दोनों के खातों को मिला दें तो उनके पास कुल 1500 करोड़ रुपये की कैश संपत्ति हो गई थी.
एक झटके में बन गए अल्ट्रा रिच?खास बात ये है कि अमीरों की संपत्ति पर नजर रखने वाली ‘हुरुन इंडिया रिच लिस्ट’ ने एक हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति वाले लोगों को ‘अति-धनी’ (Ultra Rich) घोषित किया है. साल 2022 में हुरुन की एक लिस्ट में ऐसे भारतीयों की संख्या 1013 बताई गई थी, जिनकी सालाना आय एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है. यानी, बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले कामेश्वर मिश्रा और उनके बेटे बैंकिंग सिस्टम की गड़बड़ी की वजह से एक झटके में देश के ‘अल्ट्रा रिच’ लोगों की लिस्ट में आ गए, जिनकी संख्या कुछ हजार ही है.
लेकिन थोड़ा रुकिए, क्योंकि ये अमीरी क्षणिक है.
कामेश्वर मिश्रा और उनके बेटे के खाते में 1500 करोड़ रुपये हैं जरूर, लेकिन ये भी बात स्पष्ट है कि ये उनके पैसे नहीं हैं. कामेश्वर मिश्रा को भी समझ नहीं आ रहा कि उनके खाते में इतनी बड़ी रकम कैसे आ गई. उन्होंने बैंक के अफसरों से गुजारिश की है कि वो इसकी जांच करें.
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कामेश्वर मिश्रा तो अपनी ‘सामाजिक सुरक्षा पेंशन’ निकालने के लिए जन सेवा केंद्र (सीएससी) गए थे. उनके साथ उनका विकलांग बेटा भी था, जो विकलांगता पेंशन स्कीम का लाभार्थी है. पेंशन की राशि निकालने के बाद कामेश्वर मिश्रा ने सोचा कि अपने खाते का बैलेंस जांच लें. वो ये देखकर हैरान रह गए कि उनके खाते में 759 करोड़ 69 लाख 51 हजार 951 रुपये जमा थे. उनके बेटे के खाते में भी इतनी ही बड़ी धनराशि थी, जिससे दोनों खातों में कुल मिलाकर 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा थे. ये सब देखकर मिश्रा तो चौंके ही. सीएससी ऑपरेटर भी हैरान रह गया.
मिश्रा ने कहा कि वो इस मुद्दे को जनता के ध्यान में इसलिए लाए हैं ताकि अधिकारी बैलेंस की जांच कर सकें और अगर उनसे कोई गलती हुई हो तो उसे सुधार सकें. इस मामले पर अभी तक बैंक की ओर से भी कोई सफाई नहीं आई है. शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि ये पैसे किसी तकनीकी या बैंकिंग सिस्टम की गड़बड़ी के कारण कामेश्वर मिश्रा के खाते में आ गए होंगे.
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