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हार्ट अटैक से तड़प रहे शख्स के सामने अस्पताल था, ट्रैफिक ने पहुंचने नहीं दिया, दर्दनाक मौत

51 साल के साजिर 5 अक्टूबर की रात दोस्त के साथ बोलेरो से होसुर जा रहे थे. चंदापुरा के पास फ्लाईओवर पर उन्हें तेज सीने में दर्द हुआ. नीचे अस्पताल था, लेकिन जाम के कारण गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी. बाद में अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

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बेंगलुरू में हमेशा से ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या रहा है (COURTSEY- India Today)

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  • 51 वर्षीय साजिर को छाती में तेज दर्द उठा और वे बेंगलुरु के होसुर रोड पर फ्लाईओवर पर जीरो गति से ट्रैफिक में फंस गए, जिससे समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए।
  • साजिर और उनके दोस्त नजफ की गाड़ी एक व्यस्त फ्लाईओवर पर फंसी थी, जहां ट्रैफिक जाम की समस्या लंबे समय से बनी है और दोनों इन्फ्रास्ट्रक्चर एजेंसियां एक-दूसरे पर दोष लगा रही हैं।
  • ट्रैफिक जाम के कारण साजिर को अस्पताल पहुँचाने में देर हुई, जिससे उनकी मौत हुई; यह घटना बेंगलुरु में ट्रैफिक व्यवस्था सुधार की जरूरत को दर्शाती है।

फ्लाईओवर पर फंसी एक बोलेरो, छाती में उठा हार्ट अटैक का असहनीय दर्द, और ठीक ‘नीचे’ हॉस्पिटल. लेकिन ट्रैफिक जाम ऐसा कि गाड़ी हिल तक नहीं पा रही. पढ़कर लगता है जैसे घड़ी और जिंदगी की कोई रेस चल रही हो. पर हर कहानी के अंत में जिंदगी की जीत नहीं होती. कुछ का अंत बहुत ही दुखद होता है. ऐसी ही एक कहानी है बेंगलुरू के साजिर की. 51 साल के साजिर अपने एक दोस्त के साथ कार से जा रहे थे. उन्हें छाती में दर्द उठा जो बढ़ता जा रहा था. समय पर अस्पताल पहुंच जाते तो शायद जान बच सकती थी. लेकिन ट्रैफिक ऐसा कि वो जाम के लिए बदनाम एक फ्लाईओवर पर फंस गए. 

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सामने हॉस्पिटल था, लेकिन पहुंच ना सके

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक घटना 5 अक्टूबर की रात हुई. 51 साल के केके साजिर रात करीब 11 बजे अपने दोस्त नजफ के साथ एक बोलेरो पिकअप में होसुर की ओर जा रहे थे. वहां उन्हें एक और दोस्त से मिलना था. NH-44 पर चंदापुरा के पास पहुंचने पर वे एक फ्लाईओवर पर चढ़ गए. इसके कुछ ही मिनटों बाद साजिर को सीने में तेज दर्द उठा. दर्द जल्द ही असहनीय हो गया. उन्होंने नजफ से कहा कि वे अब गाड़ी नहीं चला पाएंगे.

लेकिन दिक्कत ये थी कि नजफ को गाड़ी चलानी नहीं आती थी. उन्होंने रास्ते पर आ-जा रहे लोगों से मदद मांगने की कोशिश की. लेकिन उनके पीछे तेजी से गाड़ियां जमा हो गईं. इससे उनकी बोलेरो फ्लाईओवर पर लगे ट्रैफिक जाम में फंस गई. ट्रैफिक बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था. फ्लाईओवर के ठीक नीचे एक अस्पताल था, लेकिन वहां तक पहुंचना बहुत मुश्किल था. साजिर और नजफ के दोस्त सलीम मलिक ने बताया,

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फ्लाइओवर के ठीक नीचे एक अस्पताल था. लेकिन वे उसके ऊपर फंसे हुए थे. वे नीचे नहीं उतर पा रहे थे. वह (नजफ) लोगों से मदद मांगता रहा. उसे नीचे अस्पताल तो दिख रहा था, लेकिन वह वहां पहुंच नहीं पा रहा था. करीब 35 मिनट तक गाड़ियों की लंबी कतारों वाले जाम में कोई कुछ नहीं कर सका.

नजफ ने इसी दौरान सलीम को इसकी सूचना दी थी और वह ऑटो-रिक्शा से मौके पर पहुंचे थे. लेकिन ट्रैफिक जाम की वजह से मलिक को बोलेरो तक पहुंचने में करीब 55 मिनट लग गए. जब ​​तक साजिर को ऑटो-रिक्शा में डालकर अस्पताल ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

साजिर के लिए अस्पताल की दूरी तो कम ही थी. लेकिन फ्लाईओवर पर लगा ट्रैफिक जाम वक्त रहते पार करना नामुमकिन था. इस दुखद घटना ने एक बार फिर बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम के खतरनाक नतीजों को उजागर किया है. खासकर होसुर रोड कॉरिडोर पर, जहां हमेशा बहुत भीड़ रहती है. चंदापुरा के पास होसुर रोड पर ट्रैफिक जाम की समस्या काफी गंभीर है. इंफ्रास्ट्रक्चर का काम करने वाली एजेंसियां ​​इसे लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं.

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NHAI ने हाल के जाम के लिए काफी हद तक K-RIDE द्वारा बनाए जा रहे रेलवे ओवरब्रिज (ROB) को जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि, K-RIDE ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उनके अस्थायी स्ट्रक्चर ने सड़क (कैरेजवे) पर कोई जगह नहीं घेरी है. NHAI के अनुसार, रेलवे ब्रिज के पास सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कार्य तभी शुरू किया जा सकता है जब K-RIDE उस जगह पर अपना काम पूरा कर ले.

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