मद्रास हाईकोर्ट ने आगम मंदिरों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि जो गैर-हिंदू हैं और मंदिर के मुख्य देवता के प्रति श्रद्धा नहीं है, उन्हें एंट्री नहीं दी जा सकती. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि मंदिर की स्थापित परंपराओं का पालन करना जरूरी है. जिनकी श्रद्धा इसमें नहीं है, उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इन मंदिरों की धार्मिक पवित्रता की रक्षा की जानी चाहिए. हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस पी मुरुगन की बेंच ने 27 अक्टूबर को यह आदेश दिया.
आगम मंदिर में प्रवेश पर हाई कोर्ट की दो टूक, 'श्रद्धा नहीं है तो परिसर में प्रवेश नहीं कर सकते'
तमिलनाडु के आगम मंदिरों में प्रवेश को लेकर जारी विवाद पर मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मंदिर में सिर्फ श्रद्धालुओं को ही प्रवेश मिल सकता है. मंदिर कोई टूरिस्ट स्पॉट नहीं है. उन्होंने मंदिर परिसर में परंपराओं के पालन पर जोर दिया.

कोर्ट ने थंगम वेंकटेश द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) पर यह फैसला सुनाया. इस याचिका में 'तमिलनाडु मंदिर प्रवेश प्राधिकरण अधिनियम' (Tamil Nadu Temple Entry Authorisation Act) को सख्ती से लागू करने की मांग की गई थी. साथ ही, याचिका में नियमों के उल्लंघन के लिए जवाबदेही तय करने की मांग भी की गई थी. कोर्ट ने कहा कि यह फैसला केवल 'आगम मंदिरों' (Agamic temples) पर लागू होता है. ये वे मंदिर हैं जिनका निर्माण, प्राण-प्रतिष्ठा और रखरखाव, प्राचीन 'आगम शास्त्रों' में बताए गए सिद्धांतों के तहत ही किया जाता है. कोर्ट ने जोर दिया कि ऐसे मंदिर कोई टूरिस्ट स्पॉट नहीं हैं. इनकी स्थापित परंपराओं और धार्मिक प्रथाओं का सम्मान किया जाना चाहिए.
बेंच ने अपने फैसले में कुछ बातों पर जोर दिया. दो जजों की बेंच ने कहा कि जो गैर-हिंदू दूसरे धर्मों से जुड़े धार्मिक चिह्न दिखाते हैं, उन्हें एंट्री नहीं मिलेगी. ऐसे लोग जो संबंधित देवता के प्रति श्रद्धा नहीं रखते, उन्हें भी एंट्री नही दी जा सकती. कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था की मंदिर की ओर से तय नियमों के मुताबिक ही होनी चाहिए. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक बेंच ने इस मामले में ‘कल्याण दास’ मामले का हवाला दिया. पुराने फैसले का हवाला देते हुए, कोर्ट ने कहा कि पूरे मंदिर परिसर को पवित्र माना जाना चाहिए. कोर्ट ने तमिलनाडु में मंदिर प्रवेश से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी जिक्र किया.
साथ ही कोर्ट ने मंदिरों में प्रवेश के नियमों को स्पष्ट करने के लिए HR&CE Act की धारा 10 और 24 का जिक्र किया. धारा 10 के मुताबिक, इस अधिनियम के तहत वहां पर नियुक्त किए गए अधिकारियों का हिंदू धर्म का अनुयायी होना अनिवार्य है. धारा 24 के तहत अधिकारियों को मंदिर की परंपराओं और धार्मिक प्रथाओं का सम्मान करना आवश्यक है. साथ ही, यह स्पष्ट किया गया है कि यह प्रावधान गैर-हिंदुओं को उन परिसरों में प्रवेश करने का अधिकार नहीं देता है जो इसके दायरे में आते हैं.
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गर्भगृह में कौन प्रवेश कर सकता है, इस बात को लेकर भी आगमिक मंदिरों में कुछ विशेष परंपराएं हैं. अदालत ने कहा कि आगमी मंदिरों की परंपरा उत्तर भारत के कुछ मंदिरों जैसी नहीं है. उत्तर भारत में हिंदू श्रद्धालु शिवलिंग को छू सकते हैं और खुद अभिषेक कर सकते हैं. आगमिक मंदिरों के गर्भगृह में केवल निर्धारित पुजारी ही जा सकते हैं. इनमें शिवाचार्य, दीक्षितार और भट्टार शामिल हैं.
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