दिल्ली को ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए बारापूला फ्लाईओवर बनाया गया. लेकिन अब वही बारापुला फेज-3 फ्लाईओवर जाम की सबसे बड़ी वजह बन रहा है. करीब 9 किलोमीटर लंबा ये फ्लाईओवर मयूर विहार फेज-1 को AIIMS से सिग्नल-फ्री जोड़ने के लिए बना था. 29 सितंबर को गृहमंत्री अमित शाह ने इस का उद्घाटन किया था. लेकिन उद्घाटन के महज एक हफ्ते के अंदर ही सिग्नल-फ्री फ्लाईओवर पर भयंकर ट्रैफिक जाम लगने लगा है.
1600 करोड़ की लागत से बना बारापुला फ्लाईओवर, उद्घाटन के 1 हफ्ते बाद ही होगा 'रिडिजाइन'
बारापुला एलिवेटेड रोड फेज-3 की लागत करीब 1,635 करोड़ है. अब इसे फिर से रिडिजाइन किया जाएगा. यानी सरकारी लापरवाही और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से फिर से खर्चा होगा. ट्रैफिक पुलिस ने PWD से कहा है कि वे मर्जर पॉइंट में तुरंत बदलाव करें.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 1,635 करोड़ की लागत से बने बारापुला एलिवेटेड रोड फेज-3 को फिर से रिडिजाइन किया जाएगा. यानी सरकारी लापरवाही और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से फिर से खर्चा होगा. फिर से सरकारी खजाने से पैसा लूटेगा और फिर से फ्लाईओवर का रिडिजाइन किया जाएगा.
फ्लाईओवर के बावजूद क्यों नहीं कम हुआ जाम?बारापुला फ़ेज़-III फ्लाईओवर में तीन लेन हैं. इसी जगह पर, सनडायल की तरफ़ से सराय काले खां और रिंग रोड की ओर आने वाली तीन और लेन कॉरिडोर से जुड़ती हैं. आश्रम और DND की तरफ़ से आने वाली तीन और लेन भी मौजूदा बारापुला कॉरिडोर से जुड़ती हैं. जिससे रास्ता पतला और कम पड़ रहा है. और जाम लग रहा है.
एक अक्टूबर को जाम की स्थिति बिगड़ी तो फिर सबका ध्यान फ्लाईओवर के डिजाइन पर गया. फिर ट्रैफिक पुलिस ने ड्रोन सर्वे किया. जिससे समस्या पता चली. असल समस्या है कि अलग-अलग रास्तों से आने वाला करीब 8 से 9 लेन का ट्रैफिक पुराने बारापुला फ्लाईओवर की सिर्फ तीन लेन में समा रहा है.
अब जाम की समस्या को कम करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस जंक्शन को फिर से डिजाइन करने का सुझाव दिया है. ट्रैफिक पुलिस ने PWD से कहा है कि वे उस मर्जर पॉइंट में तुरंत बदलाव करें. जहां हाल ही में खुला फ़ेज़-III फ्लाईओवर मौजूदा बारापुल्ला कॉरिडोर से जुड़ता है. पुलिस का कहना है कि जंक्शन का अजीब मोड़ वाला डिज़ाइन इस रास्ते पर भीड़ बढ़ा रहा है.
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यही वजह है कि अब फ्लाईओवर को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं. लोग सिस्टम को ट्रोल कर रहे हैं और बनाने वाले खूब मीम बना रहे. अक्षय नाम के यूजर ने लिखा, ‘मैं तो इसे कागज़ पर भी नहीं बनाता. लेकिन बेवकूफ आर्किटेक्ट और कॉन्ट्रैक्टर ने इसे बना दिया. और किसी ने कोई आपत्ति भी नहीं की.’
अमित कुमार नाम के यूजर ने लिखा, ‘एक फ्लाईओवर को समय बचाने के लिए बनाए गया था. मगर फ्लाईओवर के पहले मर्ज पॉइंट तक पहुंचने में ही 55 मिनट लग गए.’

वहीं अनीश जैन नाम के यूजर ने वैलिड प्वाइंट रेज करते हुए लिखा, ‘फ्लाईओवर बनाने में 12 साल लगे. जाम लगने में सिर्फ़ 1 दिन. मुझे नहीं लगता कि फ्लाईओवर खराब बना है. मुझे लगता है कि यह तय स्पेसिफ़िकेशन के हिसाब से ही बना है. स्पेसिफिकेशन लगभग 2014 का है. तब से नोएडा में बहुत सारे ऑफ़िस खुल गए हैं, और यह रास्ता ईस्ट से साउथ जाने वालों के लिए ज़रूरी हो गया है.’
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