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भारत के खिलाफ साजिश, हसीना पर ग्रेनेड फेंका, मिली मौत की सजा... बांग्लादेश में ऐसे लोग भी जीत गए

बांग्लादेश के इस बार के चुनाव में तीन ऐसे लोगों ने जीत दर्ज की है जिन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी थी. इनमें से दो पर भारत में आतंक फैलाने के केस चल रहे थे. लेकिन चुनाव जीतने के बाद अब ये संसद में बैठे नजर आएंगे.

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बांग्लादेश चुनाव में जीते तीनों लोगों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी थी (PHOTO-India Today)

बांग्लादेश के चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने दो तिहाई बहुमत हासिल कर, जमात-ए-इस्लामी पार्टी को हरा दिया है. दिलचस्प बात ये है कि इस चुनाव में तीन ऐसे लोगों ने जीत दर्ज की है जिन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी थी. इनमें से दो पर भारत में आतंक फैलाने के केस चल रहे थे. लेकिन चुनाव जीतने के बाद अब ये संसद में बैठे नजर आएंगे.

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इन तीनों व्यक्तियों, लुत्फोज्जमां बाबर (Lutfozzaman Babar), अब्दुस सलाम पिंटू (Abdus Salam Pintu) और एटीएम अजहरुल इस्लाम (ATM Azharul Islam) को मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान कोर्ट ने रिहा कर दिया था. इन तीनों में से दो पर भारत विरोधी टेरर केस चल रहे थे. इनमें से दो, लुत्फोज्जमां बाबर और अब्दुस सलाम पिंटू BNP से है, जबकि ATM अजहरुल इस्लाम जमात से है. जुलाई 2024 में हुए विद्रोह से पहले इन तीनों को मौत की सजा दी गई थी. लुत्फोज्जमां बाबर ने 2001 से 2006 तक पीएम खालिदा जिया की सरकार में गृह राज्य मंत्री के रूप में भी काम किया है. यह वह समय था जब बांग्लादेश की कमान BNP-जमात गठबंधन के हाथ में थी. 12 फरवरी, 2026 को हुए चुनावों में, बाबर ने नेत्रोकोना-4 सीट जीती. बाबर को 1 लाख 60 हजार से अधिक वोट मिले हैं. 

भारत में हथियार सप्लाई किए थे

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में बाबर को 2004 के ढाका ग्रेनेड अटैक में शामिल होने के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी. इस हमले में कम से कम 23 लोग मारे गए थे और लगभग 500 लोग घायल हुए थे. उस हमले का निशाना PM हसीना थीं. लेकिन वो बच गईं. फिर 2018 में बाबर को 2004 के चटगांव हथियार तस्करी मामले में शामिल होने के लिए दूसरी मौत की सजा सुनाई गई. इसमें बांग्लादेश पुलिस और कोस्ट गार्ड ने भारत के नॉर्थईस्ट में विद्रोहियों के लिए भेजे जा रहे हथियारों से भरे 10 ट्रक पकड़े थे. शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद, बांग्लादेश हाईकोर्ट ने 14 जनवरी, 2025 को बाबर को हथियार तस्करी के मामले में बरी कर दिया.

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चुनाव जीतने वालों में दूसरा नाम अब्दुस सलाम पिंटू का है. पिंटू और बाबर BNP के साथी हैं. वह पहले 2001 से 2006 तक खालिदा जिया की सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर रह चुके हैं. नेशनल इलेक्शन में, पिंटू ने तंगेल-2 सीट से करीब 2 लाख वोटों से जीत हासिल की है. बाबर की तरह, पिंटू को भी 2004 के ढाका ग्रेनेड अटैक में शामिल होने के लिए 2016 में अरेस्ट किया गया और मौत की सजा सुनाई गई थी. इसके साथ ही, पिंटो पाकिस्तान के टेररिस्ट ग्रुप हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) को सपोर्ट करने के लिए भी जाना जाता है. HujI भारत में कई टेरर अटैक जैसे 2006 में वाराणसी में कोर्ट कॉम्प्लेक्स में बम धमाके, 2007 में अजमेर शरीफ दरगाह में बम धमाका, और 2011 में दिल्ली में बम धमाके करवा चुका है.

पार्लियामेंट जाने वाले तीसरे व्यक्ति का नाम ATM अजहरुल इस्लाम हैं. अजहरुल जमात-ए-इस्लामी के मेंबर हैं. चुनावों में, ATM ने लगभग 1 लाख 39 हजार वोट पाकर रंगपुर-2 सीट से जीत दर्ज की है. उन्होंने पहले 1998, 2001 और 2006 में इसी सीट से चुनाव लड़ा था, और 2012 तक जमात के सेक्रेटरी जनरल के तौर पर काम किया था.

साल 2012 में ATM को देश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने गिरफ्तार कर लिया और उन पर वॉर क्राइम का आरोप लगाया. उन पर 1971 के लिबरेशन वॉर के दौरान कम से कम 1,256 लोगों की हत्या और 13 महिलाओं के रेप का आरोप था, और 2014 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई. लेकिन, BNP के बाबर और पिंटू की तरह वो भी शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद फांसी से बच गए.

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