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'आप गए तो मुझे खिड़की से नीचे फिंकवा देंगे’, जब जगदंबिका पाल ने पत्रकार का हाथ पकड़ की विनती

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल के बीच हुई बातचीत ने अचानक सबका ध्यान 1998 की उस रात की तरफ खींचा, जब Jagdambika Pal उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे और 'एक दिन के लिए मुख्यमंत्री' बने थे. इस पूरे प्रसंग का असली बैकग्राउंड सुनाया सीनियर पत्रकार राहुल श्रीवास्तव ने लल्लनटॉप के खास शो ‘नेतानगरी’ में. आप भी जानिए तब क्या हुआ था.

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल (बाएं). (फोटो: आजतक)

बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल की नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कुछ अन्य नेताओं के साथ हल्की नोकझोंक हुई. लेकिन इस नोकझोंक ने जगदंबिका पाल के 'पुराने' और राहुल गांधी के 'ताजे' जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया. राहुल गांधी ने कहा, “आप हमारी पार्टी के सदस्य रहे हैं, मैं आपकी बात मानता हूं.” जगदंबिका पाल ने पलटवार करते हुए कह दिया, “आप अगर मेरी बात मानते, तो वहां नहीं बैठे होते… ” इसी बीच, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल की एंट्री हुई. उन्होंने जगदंबिका पाल से कहा, ‘आज आप चेयर पर बैठे हैं, लोग आपको लोकसभा अध्यक्ष की तरह देख रहे हैं. जो बैठा है वही राजा है. और आप तो एक दिन के मुख्यमंत्री बने थे, आपके नाम पर मूवी बनी, नायक बनी तो देखी आपने?’

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इस बातचीत ने अचानक सबका ध्यान 1998 की उस रात की तरफ खींचा, जब जगदंबिका पाल उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे और 'एक दिन के लिए मुख्यमंत्री' बने थे. इस पूरे प्रसंग का असली बैकग्राउंड सुनाया सीनियर पत्रकार राहुल श्रीवास्तव ने लल्लनटॉप के खास शो ‘नेतानगरी’ में. आइए आपको भी इसके बारे में बताते हैं.

साल 1998. उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे. कल्याण सिंह सरकार में शामिल 'लोकतांत्रिक कांग्रेस' के नेता नरेश अग्रवाल ने अचानक अपना समर्थन वापस ले लिया और विपक्षी दलों के साथ मिल गए. तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह को सदन में बहुमत साबित करने का मौका दिए बिना ही रातों-रात बर्खास्त कर दिया. बर्खास्तगी के तुरंत बाद, राज्यपाल ने 21 फरवरी को जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी. शपथ इतनी जल्दबाजी में हुई कि राष्ट्रगान तक नहीं बजा. राहुल श्रीवास्तव बताते हैं,

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ये शायद दुनिया की इकलौती सरकार रही होगी, जिसमें करीब 100 मंत्री थे.

कल्याण सिंह अदालत पहुंचे. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि फ्लोर टेस्ट होगा. आगे बताते हैं,

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वो नोटिफिकेशन ही रद्द कर दिया, जो जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री घोषित करता था. ये बहुत रेयर था.

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आदेश आते ही सत्ता का पहिया उलटा घूम गया. 22 फरवरी को कल्याण सिंह फिर मुख्यमंत्री बन गए. जगदंबिका पाल का मुख्यमंत्री कार्यकाल कुल मिलाकर करीब 31 घंटे रहा. 

उस दिन क्या हुआ था?

राहुल श्रीवास्तव बताते हैं, मुख्यमंत्री कार्यालय में उस दिन अजीब दृश्य थे. कुर्सी खाली, कमरे में पत्रकार बैठे. किसी ने पेपरवेट उठाया, किसी ने पैड. मुख्यमंत्री के फोन से देश-विदेश कॉल लगे. खुद राहुल श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर कैमरे के सामने साइन-ऑफ किया. उन्होंने याद करते हुए बताया,

चीफ मिनिस्टर का कमरा खाली था और अंदर करीब 20 पत्रकार बैठे थे. ऐसा सीन मैंने पहले कभी नहीं देखा. लोग मुख्यमंत्री के फोन से आईएसडी-एसटीडी कॉल ठोक रहे थे… मैं भी गिल्टी था. मैंने चीफ मिनिस्टर की कुर्सी पर बैठकर पीटीसी किया. फ्रॉम द चेयर ऑफ द चीफ मिनिस्टर ऑफ उत्तर प्रदेश.

उस समय कल्याण सिंह हाई कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा मुख्यमंत्री बन चुके थे. लेकिन जगदंबिका पाल अभी भी मुख्यमंत्री कार्यालय (पंचम तल) में मौजूद थे. सत्ता बदल चुकी थी, माहौल बेहद तनावपूर्ण और अस्थिर था. राहुल बताते हैं,

जगदंबिका पाल ने मेरा हाथ पकड़कर कहा था, ‘राहुल भाई, कैमरा टीम लेकर मत जाना, आप लोग रहोगे तो मैं सेफ हूं. आप लोग गए तो मुझे खिड़की से नीचे फिंकवा दिया जाएगा.’

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कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर

जगदंबिका पाल कभी “कट इन द कांग्रेस क्लॉथ” नेता माने जाते थे. मिलनसार, अपने इलाके से गहरे जुड़े हुए. राहुल श्रीवास्तव बताते हैं,

जगदंबिका पाल खालिस कांग्रेसी नेता थे. अगर उनके क्षेत्र बस्ती में किसी का मुंडन होता था और वो लखनऊ में होते थे, तो पहले हाउस में अटेंडेंस लगाते थे, फिर गाड़ी भगाकर मुंडन में जाते थे और दोपहर में वापस विधानसभा आ जाते थे. वो बेहद मिलनसार नेता हैं, लेकिन बड़े जल्दी उखड़ भी जाते हैं. ऐसा भी लोग बताते हैं.

जगदंबिका पाल, बाद में 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए. आज वे डुमरियागंज से सांसद हैं और संसद की कुर्सी पर बैठकर कार्यवाही चला रहे हैं.

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