अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. इस मामले में जिन आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. उनकी तीन दिन की न्यायिक हिरासत 29 जून को खत्म हो रही है. ऐसे में उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा. लेकिन यहीं एक पेंच फंस रहा है. खबर है कि फैजाबाद बार एसोसिएशन के ज्यादातर वकीलों ने आरोपियों की पैरवी नहीं करने की इच्छा जताई है.
अयोध्या की छवि खराब की... राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों का केस वकील नहीं लड़ेंगे!
Ayodhya Ram Mandir theft case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपियों के खिलाफ फ़ैजाबाद बार एसोसिएशन के ज्यादातर वकीलों ने पैरवी करने से मना कर दिया है. इसपर आखिरी फैसला 29 जून को बार एसोसिएशन की आमसभा में लिया जाएगा.


आजतक से जुड़े सिमर चावला की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पर आखिरी फैसला 29 जून को बार एसोसिएशन की आमसभा में लिया जाएगा. अगर प्रस्ताव पास हो जाता है, तो बार एसोसिएशन का कोई भी सदस्य आरोपियों की तरफ से अदालत में पेश नहीं होगा.
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने कहा है कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला आमसभा में होगा. वहीं सचिव शैलेंद्र जायसवाल का कहना है कि मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी की खबर से वकीलों की भावनाएं आहत हुई हैं और इसलिए ज्यादातर वकील इस केस की पैरवी नहीं करना चाहते.
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ वकीलों ने तो आरोपियों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग की है. वकील विवेक कुमार सिंह का कहना है कि आरोपियों को भारी सुरक्षा में कोर्ट लाने के बजाय पहले जनता के बीच ले जाना चाहिए था. वहीं वकील राजेंद्र चौधरी ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इस घटना से अयोध्या की छवि को नुकसान पहुंचा है.
पुलिस ने जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं. ये सभी राम मंदिर में चढ़ावे के तौर पर आने वाले नकद, गहनों और दूसरी कीमती चीजों की गिनती और प्रबंधन से जुड़े काम में लगे थे. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान अब तक करीब 79 लाख 85 हज़ार रुपये बरामद किए जा चुके हैं.
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28 जून को पुलिस ने सभी आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की थी. स्थानीय मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तलाशी ली गई. इस दौरान कुछ घरों से नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. अब पुलिस ये जांच करेगी कि इनका संबंध कहीं मंदिर के चढ़ावे की रकम से तो नहीं है. कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस आरोपियों की कस्टडी रिमांड भी मांग सकती है.
इस बीच जांच से जुड़ी एक और अहम जानकारी सामने आई है. आजतक ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को इस कथित गड़बड़ी के बारे में मामला सार्वजनिक होने से पहले ही पता चल गया था. बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के निर्देश पर 5 जून को ट्रस्ट के प्रतिनिधि, पुलिस के साथ आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पहुंचे थे. सूत्रों के मुताबिक, उस तलाशी के दौरान वहां से नकदी भी मिली थी. यानी ट्रस्ट को मामले की जानकारी पहले से थी. हालांकि उस समय कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई.
इसी बीच एक कथित CCTV वीडियो भी सामने आया है. करीब 24 सेकेंड के इस वीडियो में पुलिस आरोपी अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर एक सफेद गाड़ी की तरफ ले जाती दिखाई दे रही है. उसके हाथ में एक काला बैग भी दिख रहा है. सूत्रों का दावा है कि इसी बैग में तलाशी के दौरान बरामद की गई नकदी थी.
अब इस मामले में एक बड़ा सवाल उठ रहा है. अगर 5 जून को ही ट्रस्ट को कथित गड़बड़ी की जानकारी मिल गई थी, तो कानूनी कार्रवाई शुरू होने में देरी क्यों हुई?
वीडियो: पड़ताल: राम मंदिर दान केस से जुड़े सीसीटीवी फुटेज से क्या पता चला?


















