राम मंदिर ट्रस्ट को क्या 'दान चोरी' की भनक पहले से थी, फिर कार्रवाई में क्यों हुई देरी?
राम मंदिर कथित चंदा चोरी मामले से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि मंदिर ट्रस्ट को इस मामले के बारे में पहले ही पता चल गया था. यानी ट्रस्ट को यह भनक लग चुकी थी कि दान में ‘गड़बड़ी’ हो रही है. बावजूद इसके ‘कानूनी कार्रवाई में देरी’ हुई.

अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा चोरी मामले में हर दिन नई जानकारी सामने आ रही है. सूत्रों का दावा है कि राम मंदिर ट्रस्ट को इस चोरी की जानकारी पहले से ही थी. संदिग्ध गड़बड़ी के बारे में पता होने के बावजूद कानूनी कार्रवाई में देरी की गई. अब तक इस मामले में पुलिस ने 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है. वहीं, मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि चंपत राय के कहने पर मामले से जुड़ा एक आरोपी पुलिस के साथ 5 जून को दूसरे आरोपी अविनाश शुक्ला के घर गया था. इस दौरान घर की तलाशी लेने पर कथित तौर पर पुलिस ने कैश भी बरामद किया था.
ट्रस्ट को पहले पता था?इससे पता चलता है कि पुलिस और ट्रस्ट दोनों के ही संज्ञान में ये मामला आ गया था. बावजूद इसके ट्रस्ट की ओर से कोई शिकायत नहीं की गई. सूत्रों ने यह भी दावा किया कि 5 जून को जो कार्रवाई हुई, वो ‘अनौपचारिक’ थी. ‘ऑफिशियल FIR’ पर आधारित नहीं थी.
राम मंदिर के दान में कथित चोरी का मामला 7 जून को सार्वजनिक हुआ था. घटना से जुड़े कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिसमें अब एक और 24 सेकंड के वीडियो वायरल हुआ है. वीडियो में कुछ पुलिस वाले अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर एक सफेद गाड़ी की ओर ले जाते दिख रहे हैं. वायरल वीडियो में वो एक काला बैग भी ले जाते हुए दिख रहे हैं, जो सूत्र दावा कर रहे हैं कि इस बैग में बरामद किया गया कैश था.
अधिकारियों की सफाई नहीं आईसीसीटीवी फुटेज और घटनाओं के क्रम से जोड़कर किए जा रहे दावों की सच्चाई की कोई अलग से जांच नहीं की गई. वहीं, अब इस एंगल के सामने आने के बाद जांच अधिकारियों और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में कथित देरी पर भी कोई ‘सफाई’ नहीं दी गई है. इससे पहले भी चंदा चोरी मामले में 8 आरोपियों में से एक आरोपी रमाशंकर मिश्रा की एक्सक्लूसिव फोटो सामने आ चुकी हैं.
मामले की जांच कर रही SIT ने भी मंदिर के मैनेजमेंट में कई कमियों का खुलासा किया था. सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान कैश हैंडलिंग, कर्मचारियों के वेरिफिकेशन और सीसीटीवी मॉनिटरिंग में भी कमियां पाई गईं. SIT की जांच में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंक के वो कर्मचारी भी हैं, जो एक प्राइवेट एजेंसी के जरिए हायर किए गए थे. कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों की हायरिंग ट्रस्ट अधिकारियों से जुड़ी है. SIT ने अभी तक किए गए अपने जांच की रिपोर्ट मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है.
वीडियो: मोहर्रम को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने क्या दावा कर दिया?

